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रविवार, 5 मार्च 2017

अरे प्रभु, थोड़ा सिस्टम से चलिए ...

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक आदमी ने बहुत कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर उसके सामने भगवान प्रकट हुए और बोले,
 
"माँगो वत्स, क्या वर चाहिए?"
 
आदमी: "अरे प्रभु, थोड़ा सिस्टम से चलिए, पहले तपस्या भंग करने के लिए अप्सराएं आती हैं, फिर आप आना।"

सादर आपका
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जिन्दगी लीज पर है, फ्रीहोल्ड थोड़ी है...

अद्भुत और बहुत उपयोगी जानकारी जो जरुरी है अपनानी 

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

7 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति शिवम जी ।

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत सुंदर सूत्र सयोजन
बधाई
मुझे सम्मलित करने का आभार शिवम मिश्रा जी
"अद्भुत और बहुत उपयोगी जानकारी जो जरुरी है अपनानी"

yashoda Agrawal ने कहा…

शुभ प्रभात पण्डित शिवम जी मिश्र
उत्कृष्ठ अंक
सादर

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया लिंक्स | जय हिन्द

अर्चना तिवारी ने कहा…

मेरी लघुकथा 'काँटों में गुलाब' शामिल करने के लिए शुक्रिया शिवम् जी...सूत्र अच्छे लगाये हैं.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

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