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गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

केन्द्रीय बजट का इतिहास - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 01 फरवरी को देश का केन्द्रीय बजट पेश करके वर्षों से चली आ रही परम्परा को तोड़ दिया. अभी तक केन्द्रीय बजट प्रतिवर्ष फरवरी माह के अंतिम कार्यदिवस को पेश किया जाता रहा है. इस बजट के साथ रेल बजट को भी पेश करके एक और परिपाटी को भी तोड़ा गया है. अभी तक रेल बजट को केन्द्रीय बजट से अलग पेश किया जाता रहा है. इससे पूर्व सन 2000 में तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिंह ने भी बजट से जुड़ी एक परम्परा को तोड़ा था. वर्ष 2000 तक केंद्रीय बजट को फरवरी महीने के अंतिम कार्य-दिवस को शाम पाँच बजे घोषित किया जाता था. ऐसा औपनिवेशिक काल से चला आ रहा था, जब ब्रिटिश संसद दोपहर में बजट पारित करती थी जिसके बाद भारत ने इसे शाम को पेश करना आरम्भ किया. यह परंपरा सर बेसिल ब्लैकैट ने 1924 में शुरु की थी. इसके पीछे का कारण रात भर जागकर वित्तीय लेखा-जोखा जोखा तैयार करने वाले अधिकारियों को आराम बताया जाता था. अटल बिहारी बाजपेयी की एनडीए सरकार (बीजेपी द्वारा नेतृत्व) के तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने परम्परा को तोड़ते हुए 2001 के केंद्रीय बजट के समय को बदलते हुए पूर्वान्ह ग्यारह बजे घोषित किया. 


बजट शब्द की उत्पति लैटिन शब्द बुल्गा से हुई, इसका अर्थ है चमड़े का थैला. बुल्गा से फ्रांसीसी शब्द बोऊगेट की उत्पति हुई. जिसके बाद अंग्रजी शब्द बोगेट अस्तित्व में आया, इससे बजट शब्द बना. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के केन्द्रीय बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में निर्दिष्ट किया गया है. यह भारतीय गणराज्य का वार्षिक बजट होता है, जिसे प्रत्येक वर्ष फरवरी के अंतिम कार्य-दिवस में भारत के वित्तमंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता रहा है. इसके पश्चात् भारत के वित्तीय वर्ष की शुरूआत अर्थात 1 अप्रैल से बजट को लागू करने से पहले इसे सदन द्वारा पारित करना आवश्यक होता है. भारत देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था. जबकि आज़ादी के ठीक पहले अंतरिम सरकार का बजट लियाकत अली खां ने पेश किया था. यह बजट 9 अक्टूबर 1946 से लेकर 14 अगस्त 1947 तक की अवधि के लिए था. स्वतंत्र भारत का प्रथम केन्द्रीय बजट 26 नवम्बर 1947 को आर.के. षणमुखम चेट्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया था. इसमें 15 अगस्त 1947 से लेकर 31 मार्च 1948 के दौरान साढ़े सात महीनों को शामिल किया गया था. आर.के. षणमुखम चेट्टी ने ही अपने बजट में पहली बार अंतिरम शब्द का प्रयोग किया था. तब से लघु अवधि के बजट के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा. भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जान मथाई ने पेश किया था. इस बजट में ही योजना आयोग की स्थापना का वर्णन किया था.

बजट छपने के लिए भेजे जाने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है. इस रस्म के बाद बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के संबधित अधिकारी किसी के संपर्क में नहीं रहते हैं. यहाँ तक कि उनको अपने परिवार से दूर रहकर वित्त मंत्रालय में ही रुकना पड़ता है. 1958-59 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने बजट पेश किया उस समय वित्त मंत्रालय उनके पास था ऐसा करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने. मोरारजी देसाई ने अब तक सर्वाधिक दस बार बजट पेश किया है. इनमें आठ केन्द्रीय बजट तथा दो अंतरिम बजट हैं. अपने जन्मदिन पर बजट पेश वाले वह एकमात्र प्रधानमंत्री हैं. उनके इस्तीफा देने के बाद इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्रालय का पदभार भी संभाला. वित्त मंत्री के पद को हासिल करने वाली वे पहली महिला भी बनी.

कुछ प्रदेशों के चुनावी मौसम में वर्तमान बजट की विशेषताओं, कमियों का विश्लेषण-आकलन करने का काम अर्थशास्त्रियों के साथ-साथ राजनीतिज्ञों का भी बना हुआ है. उन्हें अपना काम करने दीजिये और आप-हम अपना काम करते हुए आज की बुलेटिन का आनंद उठायें.

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7 टिप्पणियाँ:

yashoda Agrawal ने कहा…

शुभ संध्या
एक लोकप्रिय अंक
सादर

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर विषय। बढ़िया बुलेटिन।

kavideepak bijnory ने कहा…

बजट की सुन्दर समीक्षा

Sushil Bakliwal ने कहा…

लोकोपयोगी विषय़ पर आधारित इस विशेष बुलेटिन में मेरी प्रस्तुति को भी स्थान देने हेतु आभार...

Kavita Rawat ने कहा…

बजट पर सार्थक नुक्ताचीनी प्रस्तुति के साथ सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति हेतु धन्यवाद....

Dr Hari Mohan ने कहा…

बहुत – बहुत धन्यवाद , विश्वास है आगे भी आप सहयोग करेंगे ...

Digvijay Agrawal ने कहा…

शुभ संध्या
आज देखा मैंने
आईने में
अपने आप को
आभार
सादर

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