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शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

डॉ. अमरनाथ झा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
अमरनाथ झा
अमरनाथ झा (अंग्रेज़ी: Amarnath Jha, जन्म: 25 फ़रवरी, 1897 - मृत्यु: 2 सितम्बर, 1955) भारत के प्रसिद्ध विद्वान, साहित्यकार और शिक्षा शास्त्री थे। वे हिन्दी के प्रबल समर्थकों में से एक थे। हिन्दी को सम्माननीय स्तर तक ले जाने और उसे राजभाषा बनाने के लिए अमरनाथ झा ने बहुमूल्य योगदान दिया था। उन्हें एक कुशल वक्ता के रूप में भी जाना जाता था। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना भी की। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1954 में 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया था।

अमरनाथ झा का जन्म 25 फ़रवरी, 1897 ई. को बिहार के मधुबनी ज़िले के एक गाँव में हुआ था। उनके पिता डॉ. गंगानाथ झा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान थे। अमरनाथ झा की शिक्षा इलाहाबाद में हुई। एम.ए. की परीक्षा में वे 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय' में सर्वप्रथम रहे थे। उनकी योग्यता देखकर एम.ए. पास करने से पहले ही उन्हें प्रांतीय शिक्षा विभाग में अध्यापक नियुक्त कर लिया गय़ा था।

अमरनाथ झा की नियुक्त 1922 ई. में अंग्रेज़ी अध्यापक के रूप में 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय' में हुई। यहाँ वे प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहने के बाद वर्ष 1938 में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बने और वर्ष 1946 तक इस पद पर बने रहे। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने बहुत उन्नति की और उसकी गणना देश के उच्च कोटि के शिक्षा संस्थानों मे होने लगी। बाद में उन्होंने एक वर्ष 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' के वाइस चांसलर का पदभार सम्भाला तथा उत्तर प्रदेश और बिहार के 'लोक लेवा आयोग' के अध्यक्ष रहे।

डॉ. अमरनाथ झा अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। इलाहाबाद और आगरा विश्वविद्यालयों ने उन्हें एल.एल.ड़ी. की और 'पटना विश्वविद्यालय' ने डी.लिट् की उपाधि प्रदान की थी। वर्ष 1954 में उन्हें 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया।

हिन्दी को राजभाषा बनाने के प्रश्न पर विचार करने के लिए जो आयोग बनाया था, उसके एक सदस्य डॉ. अमरनाथ झा भी थे। वे हिन्दी के समर्थक थे और खिचड़ी भाषा उन्हें स्वीकर नहीं थी। डॉ. अमरनाथ झा ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

एक कुशल वक्ता के तौर पर भी अमरनाथ झा जाने जाते थे। उन्होंने अनेक पुस्तकों की रचना भी की। देश और समाज के लिए अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले इस महापुरुष का 2 सितम्बर, 1955 को देहांत हो गया।




आज भारत के महान साहित्यकार और शिक्षाशास्त्री डॉ. अमरनाथ झा जी की 120वीं जयंती पर हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम और समस्त हिंदी ब्लॉग जगत उनको याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है।  सादर।।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर ....














आज की ब्लॉग बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

8 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

पिता जी और चाचा जी से बहुत कुछ सुना था डॉ. अमरनाथ झा के विषय में। आज उन्हे ब्लाग बुलेटिन पर देख कर सुखद अहसास हुआ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

भारत के महान साहित्यकार और शिक्षाशास्त्री डॉ. अमरनाथ झा जी की 120वीं जयंती पर उनको सादर नमन |

सार्थक बुलेटिन प्रस्तुति हर्ष बाबू |

Anita ने कहा…

देर से आने के लिए खेद है, डा.अमरनाथ झा के विषय में प्रथम बार पढ़ा,आभार एवं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि ! मेरी पोस्ट को बुलेटिन में स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार !

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति \
अमरनाथ झा जी को सादर श्रद्धांजलि!

HARSHVARDHAN ने कहा…

आप सभी का सादर ... आभार।।

Alaknanda Singh ने कहा…

धन्‍यवाद हर्षबर्द्धन,मेरे ब्‍लॉग-पोस्‍ट को शामिल करने के लिए , अमरनाथ झा जी को विनम्र श्रद्धांजलि के साथ बाकी पोस्‍ट भी पढ़ी, अच्‍छा कलेक्‍शन एक जगह पर ही उपलब्‍ध कराने का शक्रिया।

shyam kori 'uday' ने कहा…

बेहतरीन ...

shyam kori 'uday' ने कहा…

बेहतरीन ...

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