Subscribe:

Ads 468x60px

मंगलवार, 17 जनवरी 2017

समझ लेते हो तुम सब




समझ लेते हो तुम वह सब 
जिसकी आलोचना करते तुम रुकते नहीं 
जब तक दूसरों के जूते काटते हैं 
तुम टेढ़ी मुस्कान के साथ कहते हो 
नंगे पाँव ही चलो न  .... 
सारे हास्यास्पद हल होते हैं तुम्हारे पास 
पर वही जूते 
जब तुम्हें काटते हैं 
तुम्हारी भाषा बदल जाती है 
तुम अनोखे हो जाते हो !

Search Results

आहुति"लिखती है...!!!

ਜਿਵੇਂ ਨਿੱਕੇ -ਨਿੱਕੇ ਆਲ੍ਹਣੇ ( जैसे छोटे -छोटे कोटर )


4 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

क्या बात!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

जीवन की यही रीत!!

Kavita Rawat ने कहा…

सच जब अपने पर गुजरती है तब पता चलता है

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

आदरणीया रश्मि दी , लिंक्स देखते हुए अन्त में पाया कि मेरी कहानी भी यहाँ शामिल है .आभार आपका क्योंकि यहाँ शमिल होकर रचना का कद बढ़ जाता है .

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार