Subscribe:

Ads 468x60px

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

खतरनाक क्या है !?




खतरनाक क्या है !? 
वह जिससे हम डर जाते हैं अचानक 
या जो धीरे धीरे हमारा अस्तित्व मिटाता है ? ....


दोनों की अपनी
बूंदे तो फनकार हुईं
धानी चुनरिया
हाथ की लाली
चमकी बिंदिया
तारों वाली
जब जब आता सावन
गोरी तेरा रूप लगे है
पार्वती सा पावन

आबशारों की सदा-ए-गश्त में
क़तरा-ए-शबनम पे छा जाये जुनूँ
इश्क-ए-सादिक़ वो मुझे
नायाब देते हैं ..
मेरी यादों की सरहद पर 
वो आकर थाम लेते हैं ..

2 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ।

Kavita Rawat ने कहा…

बढ़िया बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति
आभार!

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार