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शनिवार, 7 मई 2016

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की १५५ वीं जंयती - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

"वे लोग जो अच्छाई करने में बहुत ज्यादा व्यस्त होते है, स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाते।"
- गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर 
 
' जन गन मन ' के रचयिता , भारत माता के लाल , गुरुदेव रविंद्रनाथ ठाकुर को उनकी १५५ वीं जंयती पर ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से शत शत नमन |
सादर आपका
शिवम् मिश्रा
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एक क़ता

लघुकथा- ईमानदार अधिकारी

'तानसेन गवइया अठन्नी-चोर'...

ऐलानों की जलेबियां बिकीं, वायदों के डमडमे बजे, जुमले के हिंडोले डले... और हो गया लोक सुराज

बवाल क्यूँ 

चांदनी रातें

मेरा आइना

खुला ख़त

'सरसों से अमलतास'- मन-जीवन को उकेरती कवितायें

सूखे खेत और झमाझम बरसते विज्ञापन

सरदारजी का बुढ़ापा

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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!

4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की १५५ वीं जंयती पर उन्हें नमन । सुन्दर शनिवारीय बुलेटिन शिवम जी ।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

करोड़पति हो जायेगा फिर ब्लागर कहाँ रह जायेगा ?

Madhulika Patel ने कहा…

तहे दिल से शुक्रिया मेरी रचना को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने का । सुंदर संकलन ।

बरुण सखाजी ने कहा…

shukriya....................

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बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

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