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रविवार, 22 मई 2016

ऊर्जा के विकल्प

भीषण गर्मी, आग उगलता हुआ सूरज - एसी, कूलर, फ्रिज पूरी रफ़्तार से चलते हुए और बिजली की भयंकर मांग। इस मांग के अनुपात में आपूर्ति का न होना, नतीजा लोड-शेडिंग और बिजली में कटौती। पिछले दिनों कहीं पढ़ा की इस बार कोयला आयात में भयंकर कमी आई और भारत ने फलां फलां पैसा बचाया। दरअसल यह एक खुद को बेवकूफ बनाने जैसी बात है क्योंकि कोयला आपकी प्राकृतिक सम्पदा है और यदि आप अधिक खनन करेंगे तो आप अपनी ही सम्पदा को ख़त्म कर रहे हैं। यह आपका कीर्तिमान नहीं है, बल्कि प्राकृतिक सम्पदा का नुकसान है। बेहतर तब हो जब आप ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का प्रयोग करना प्रारंभ करें, जिसमे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा प्रमुख तौर पर उसका हिस्सा होंगे। 

गुजरात में कच्छ, राजस्थान के रेगिस्तान, आग उगलता आसमान और इस असहनीय स्थिति में सरहद पर हमारे जवान। यदि हम इन जगहों पर सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा के सयंत्र लगाएं और गाँव बसाएं जो सीधे फ़ौज नियंत्रित करे तो यह भारत के लिए बहुत बड़ी क्रांति होगी। मोदी इस बात को अच्छे से जानते हैं कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म-निर्भरता बिना इसके न होगी। 

सौर उर्जा का अर्थ सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही कहते हैं। सूर्य की उर्जा को दो प्रकार से विदुत उर्जा में बदला जा सकता है: पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जेनेरेटर चलाकर। यह दोनों ही साफ़, ग्रीन ऊर्जा हैं। 

अमेरिका के कैलिफोर्निया में लगभग चार सौ मेगावाट की क्षमता वाला विश्व का सबसे बड़ा सोलर प्लांट है। अकेले अमेरिका के पश्चिमी छोर में लगभग ऐसे बीस प्लांट हैं, यूरोप में जर्मनी, स्पेन और यहाँ तक की मोरक्को जैसे छोटे देश भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। भारत और चीन अभी भी पारंपरिक ऊर्जा स्रोत में ही अपना विकल्प तलाश रहे हैं। अच्छा तब तो जब हम इस दिशा में गंभीरता से काम करें और वैश्विक समस्या बन चुके ग्लोबल वार्मिंग से निबटने की दिशा में एक कदम बढ़ाएं।

चलिये अब चलते है आज की बुलेटिन की ओर ... 

हमें हमारे स्वाद ही बिगाड़ते हैं...

मुन्ना-मुन्नी की अनोखी शादी

मेरे जाने के बाद

भारत की "मौकापरस्त" विदेश-नीति

आपका आदर्श कौन ? टीना डाबी या कुलदीप द्विवेदी.......

163. "हीरक जयन्ती"

जादूगर अनि, जन्मदिन मुबारक!

रामराज में चिंतन !

गुरु दक्षिणा

राजा राममोहन राय - 'आधुनिक भारतीय समाज' के जनक

और कितनी फज़ीहत लिखी है कांग्रेस की किस्मत में?

4 टिप्पणियाँ:

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत ही सार्थक विषय को रेखांकित किया देव बाबा | ये सामयिक भी और सटीक भी खासकर जब एक तरफ हम भयंकर उष्मा के कारण परेशान हैं वहीँ उस उर्जा को परिवर्तित करके विद्युत् उर्जा में बदलने में भी घोर उदासीनता बरत रहे हैं ..अभी बहुत कुछ सीखना है देश को |

सुन्दर बुलेटिन

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति एक ज्वलंत विषय के साथ देव जी ।

Kavita Rawat ने कहा…

ऊर्जा के विकल्प पर बहुत अच्छी प्रेरक प्रस्तुति के साथ सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार !

शिवम् मिश्रा ने कहा…

सार्थक बुलेटिन प्रस्तुति देव बाबू |

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