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शनिवार, 23 अप्रैल 2016

केलकुलेटर का धोखा - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक डॉक्टर के पास एक बेहाल मरीज़ गया।
मरीज़: डॉ. साहब पेट में बहुत दर्द हो रहा है।
डॉ: अच्छा, ये बताओ आखिरी बार खाना कब खाया था?
मरीज़: खाना तो रोज ही खाता हूँ।
डॉ: अच्छा-अच्छा, (2 ऊँगली उठाते हुए ) आखिरी बार कब गए थे?
मरीज़: जाता तो रोज ही हूँ पर होता नहीं है।
डॉकटर समझ गए कि कब्ज़ है। अन्दर बहुत सारी बोतलें पड़ी थी उस में से एक उठा लाये और साथ ही केल्क्युलेटर भी लेते आये। फिर पूछा, "घर कितना दूर है तुम्हारा?"
मरीज़: 1 किलोमीटर।
डॉक्टर ने केलकुलेटर पे कुछ हिसाब किया और फिर बोतल में से चार चम्मच दवाई निकाल कर एक कटोरी में डाली।
डॉ: गाडी से आये हो या चल कर?
मरीज़: चल कर।
डॉ: जाते वक्त भाग के जाना।
डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से बाहर निकाल ली।
डॉ: घर कौन सी मंज़िल पे है?
मरीज़: तीसरी मंज़िल पे।
डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।
डॉ: लिफ्ट है या सीढियाँ चढ़ के जाओगे?
मरीज़: सीढियां।
डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।
डॉ: अब आखिरी सवाल का जवाब दो। घर के मुख्य दरवाजे से टॉयलेट कितना दूर है?
मरीज़: करीब 20 फुट।
डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।
डॉ: अब मेरी फीस दे दो मुझे पहले फिर ये दवाई पियो और फटाफट घर चले जाओ, कहीं रुकना नहीं और फिर मुझे फोन करना।
मरीज़ ने वैसा ही किया। आधे घंटे बाद मरीज़ का फोन आया और एकदम ढीली आवाज में बोला, "डॉक्टर साहब, दवाई तो बहुत अच्छी थी आपकी पर आप अपना केलकुलेटर ठीक करवा लेना। हम 10 फुट से हार गये।

सादर आपका
शिवम् मिश्रा
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति । सुन्दर डाक्टर बस अफसोस उसके बेकार केल्कुलेटर के लिये ।

parmeshwari choudhary ने कहा…

Good links. Thanks

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

shikha varshney ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन. आभार .

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