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बुधवार, 9 मार्च 2016

दूसरों को मूर्ख समझना सबसे बड़ी मूर्खता

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

हम अक्सर इसी खुशफ़हमी में रहते हैं कि हम बहुत बुद्धिमान हैं और सामनेवाला हमारी बुद्धिमानी या होशियारी को समझ नहीं सकता. यहां तक तो ठीक है, लेकिन अगर हम खुद को बुद्धिमान और सामनेवाले को मूर्ख समझ लें, तो हम बड़ी परेशानी में फ़ंस सकते हैं. कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति बहुत चतुरता दिखाने के कारण ही बेवकूफ़ बन जाता है.
ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि वे सामनेवाले के सामने खुद को जैसा प्रजेंट कर रहे हैं, सामनेवाला उसे उसी रूप में ले रहा है, जबकि ऐसा होता नहीं है. अगर ऐसा होता, तो दुनिया की नजर में हर व्यक्ति वैसा ही हो जाता, जैसा वह सोचता है.मैं यह नहीं कहता कि आप खुद को बेवकूफ़ समझे, क्योंकि यह सोच आपसे आपका आत्मविश्वास छीन सकता है. आप होशियार रहें, लेकिन समझदार भी, ताकि सामनेवाले को बेवकूफ़ समझने की मूर्खता न करें.
इंजीनियरिंग के चार छात्र परीक्षा से ठीक एक दिन पहले रात में शराब पीते रहे. उन्होंने उस रात परीक्षा की बिल्कुल भी तैयारी नहीं की. अगले दिन सुबह उन्हें कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये. उन्होंने एक योजना पर विचार किया. खुद के कपड़े और हाथ बिल्कुल गंदे कर लिये. कपड़ों में ग्रीस और धूल लगी हुई थी. इसी हालत में वे चारों कॉलेज के डीन के पास पहुंचे और कहा, ‘‘महाशय, कल रात हमलोग शादी की एक पार्टी में गये थे. वापसी में कार का चक्का पंक्चर हो गया. बहुत मुश्किल से गाड़ी को धक्का देकर वापस ले गया. अब हमलोग इस स्थिति में नहीं हैं कि परीक्षा में शामिल हो सकें. आप हमारी स्थिति देख ही रहे हैं.’’ डीन अच्छे व्यक्ति थे, उन्होंने कहा, कि ‘‘ठीक है, तुमलोग तीन दिन का रेस्ट ले लो.’’ चारों ने कहा, ‘‘ठीक है सर, तीन दिन बाद हमलोग इस परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे.’’
तीन दिन बाद तीनों पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने कॉलेज डीन के पास पहुंचे. डीन ने कहा, ‘‘चूंकि यह स्पेशल केस में ली जा रही परीक्षा है, इसलिए चारों को अलग-अलग क्लासरूम में बैठना होगा.’’ चारों छात्र इसके लिए तैयार हो गये, क्योंकि अपने हिसाब से उन्होंने परीक्षा की पूरी तैयारी कर ली थी. टेस्ट में 100 अंकों के केवल 2 सवाल पूछे गये. पहला सवाल 2 अंकों का था- आपका नाम क्या है? और दूसरा सवाल 98 अंकों का था- कौन-सा टायर पंक्चर हुआ था? असल में जब लड़कों ने डीन को परीक्षा की अवधि बढ़ाने के लिए मना लिया, तो उन्होंने सोचा कि डीन को उन्होंने बेवकूफ़ बना दिया है. इंज्वॉय भी कर लिया और परीक्षा की तैयारी के लिए तीन दिन भी मिल गये. लेकिन डीन बेवकूफ़ नहीं बने थे, उन्होंने नहला पर दहला दिया और तब चारों लड़कों के पास न तो बोलने के लिए कुछ था, न लिखने के लिए.
-खुद को होशियार समझें, लेकिन दूसरों को बेवकूफ़ न समझें.
-होशियारी के साथ समझदारी भी जरूरी है.
-इस खुशफ़हमी में न रहें कि आप सबसे बुद्धिमान हैं और खुद को उसी रूप में पेश कर सकते हैं, जिस रूप में आप चाहते हैं|
 
सादर आपका
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सुख-दुःख का अधिष्ठाता 'मन'

पधारो म्हारे देश से जाने क्या दिख जाए

अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता

"अलीगढ़"

जनवरी में स्पीति - बर्फीला लोसर

महिला दिवस, एक छलावा

झटपट निराली गुजिया

महिला दिवस - बराबरी की दौड़ में दोहरापन क्‍यों ?

बेल का शर्बत बनाने की विध‍ि

कीठम झील सूर सरोवर पक्षी विहार..(कुछ पल आगरा से ......7)

एक ऐसा विश्व जहाँ सिर्फ इनसान रहते हों

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

7 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

डीन महाशय को पता चल गया होगा चारों टायर एक साथ पंक्चर हो गये थे :)
सुन्दर बुलेटिन।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन का आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन का आभार

Harash Mahajan ने कहा…

मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार !! सुंदर चयन !

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

Arshia Arshia ने कहा…

बढिया बुलेटिन संजोया है आपने।
लज़ीज़ खाना को शामिल करने के लिए शुक्रिया।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

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