Subscribe:

Ads 468x60px

मंगलवार, 1 मार्च 2016

बुत यूँ ही साथ चलते हैं



मैंने कुछ बुत बनाये थे अपनी अनकही सुनाने के लिए 
.... जाने कब वे जी उठे और मेरा अनकहा दर्द बन कहीं और चल दिए !

बुत यूँ ही साथ चलते हैं 
साथ होकर भी दूर होते हैं  ... 

3 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन ।

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया मिली-जुली बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

यादों के सफर मे कोई तो साथी हो ... अब वो यह बुत ही सही ... तो यही सही !!

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार