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बुधवार, 6 जनवरी 2016

ब्लॉग बुलेटिन और कमलेश्वर

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
कमलेश्वर ( जन्म- 6 जनवरी, 1932 - मृत्यु- 27 जनवरी, 2007 ) बीसवीं शती के सबसे सशक्त लेखकों में से एक हैं। कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फ़िल्म पटकथा जैसी अनेक विधाओं में उन्होंने अपनी लेखन प्रतिभा का परिचय दिया। इन्होंने अनेक हिन्दी फ़िल्मों के लिए पटकथाएँ लिखीं तथा भारतीय दूरदर्शन शृंखलाओं के लिए दर्पण, चन्द्रकान्ता, बेताल पच्चीसी, विराट युग आदि लिखे। भारतीय स्वातंत्रता संग्राम पर आधारित पहली प्रामाणिक एवं इतिहासपरक जन-मंचीय मीडिया कथा ‘हिन्दुस्तां हमारा’ का भी लेखन किया।


पूरा नाम 'कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना' का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में 6 जनवरी1932 को हुआ था। प्रारम्भिक पढ़ाई के पश्चात कमलेश्वर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से परास्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। कमलेश्वर बहुआयामी रचनाकार थे। उन्होंने सम्पादन क्षेत्र में भी एक प्रतिमान स्थापित किया। ‘नई कहानियों’ के अलावा ‘सारिका’, ‘कथा यात्रा’, ‘गंगा’ आदि पत्रिकाओं का सम्पादन तो किया ही ‘दैनिक भास्कर’ के राजस्थान अलंकरणों के प्रधान सम्पादक भी रहे। कश्मीर एवं अयोध्या आदि पर वृत्त चित्रों तथा दूरदर्शन के लिए ‘बन्द फ़ाइल’ एवं ‘जलता सवाल’ जैसे सामाजिक सरोकारों के वृत्त चित्रों का भी लेखन-निर्देशन और निर्माण किया।
उपन्यासकार के रूप में ‘कितने पाकिस्तान’ ने इन्हें सर्वाधिक ख्याति प्रदान की और इन्हें एक कालजयी साहित्यकार बना दिया। हिन्दी में यह प्रथम उपन्यास है, जिसके अब तक पाँच वर्षों में, 2002 से 2008 तक ग्यारह संस्करण हो चुके हैं। पहला संस्करण छ: महीने के अन्तर्गत समाप्त हो गया था। दूसरा संस्करण पाँच महीने के अन्तर्गत, तीसरा संस्करण चार महीने के अन्तर्गत। इस तरह हर कुछेक महीनों में इसके संस्करण होते रहे और समाप्त होते रहे।
कमलेश्वर को उनकी रचनाधर्मिता के फलस्वरूप पर्याप्त सम्मान एवं पुरस्कार मिले। 2005 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकरण से विभूषित किया गया। उनकी पुस्तक ‘कितने पाकिस्तान’ पर साहित्य अकादमी ने उन्हें पुरस्कृत किया। 27 जनवरी, 2007 को फ़रीदाबाद, हरियाणा में कमलेश्वर का निधन हो गया।

( जानकारी स्त्रोतhttp://bharatdiscovery.org/india/कमलेश्वर )


आज हिन्दी के महान साहित्यकार कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना जी के 84वें जन्म दिवस पर हिन्दी ब्लॉग जगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती है। 

सादर।।
हर्षवर्धन श्रीवास्तव



अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर..........















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे, शुभरात्रि। सादर  … अभिनन्दन।।

7 टिप्पणियाँ:

अर्चना चावजी Archana Chaoji ने कहा…

खुश हूँ ब्लॉग बुलेटिन में स्थान पाकर ...
आभार

smt. Ajit Gupta ने कहा…

आभार आपका।

Anita ने कहा…

नये वर्ष के लिए शुभकामनाओं के साथ बहुत बहुत आभार ! कमलेश्वर जी के संबंध में विस्तृत जानकरी पाकर अच्छा लगा.

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर बुलेटिन.
मुझे भी शामिल करने के लिए आभार.

Neeraj Kumar Neer ने कहा…

शुक्रिया ....... सुंदर बुल्लेटिन

Kavita Rawat ने कहा…

साहित्यकार कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना जी के 84वें जन्म दिवस पर बहुत अच्छी जानकारी के साथ सार्थक बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

मैनपुरी के रत्नों मे से एक कमलेश्वर जी को मेरा शत शत नमन |

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