Subscribe:

Ads 468x60px

मंगलवार, 5 जनवरी 2016

कुछ दूर साथ चलो




मुमकिन ही नहीं किसी को समझना, समझाना 
क्षणिक समझ,समझाने की बात और है 
सबकी सोच के परिधान अलग हैं 
कोई अमीर है कोई गरीब 
कोई गरीब होकर भी अमीर 
कोई अमीर होकर गरीब 
रहन-सहन अलग,
चाह अलग 
परिस्थिति,परिणाम अलग 
..... 
मुमकिन बनाने की जद्दोजहद से बाहर निकलकर 
कुछ दूर साथ चलो - 
यही बहुत है 


4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

समझ भी समझती है समझने को । बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति
आभार!

Neeraj Kumar Neer ने कहा…

आभार काव्यसुधा की रचनाओं को शामिल करने के लिए ....

शिवम् मिश्रा ने कहा…

सफर मे साथ जरूरी है |

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार