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मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

प्रतिभाओं की कमी नहीं - एक अवलोकन 2015 (२२)


समय कहता रहा,
हम सुनते रहे
कब शब्द उगे हमारे मन में
जाना नहीं
सुबह जब अपने नाम के पीछे
पड़े हुए निशानों को देखा
तो जाना-
एक पगडण्डी हमने भी बना ली ! ……

राजेश उत्साही 

8 टिप्पणियाँ:

Naveen Kr Chourasia ने कहा…

एक खूबसूरत रचना , शुभकामनायें !

Ananya Singh ने कहा…

बेहद उम्दा !

Asha Joglekar ने कहा…

बहुत सुंदर संभावना जगाती रचना।

Asha Joglekar ने कहा…

बहुत सुंदर संभावना जगाती रचना।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब :)

संजय भास्‍कर ने कहा…

बेहद उम्दा रचना।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह!

सदा ने कहा…

Waaaah bht khooob

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