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मंगलवार, 3 नवंबर 2015

मेरी नज़र से






घटित होती है कविता मौन में
चीखती है कविता रुदन में
शांत अरण्य में प्रतिध्वनित होती है कविता
प्रकृति के हर रहस्य में गुंजित है कविता  …

3 टिप्पणियाँ:

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति..
आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आभार दीदी

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति !

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