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मंगलवार, 6 अक्तूबर 2015

उधर मंगल पर पानी, इधर हैरान हिंदुस्तानी - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आप सब जानते है कि पिछले दिनों अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने घोषणा की कि उन्होंने मंगल ग्रह पर पानी खोज निकाला है। अब इस घटना पर हमारे देश की राजनीति में कैसी प्रतिक्रियाएं हुई, जरा देखिये:

नरेन्द्र मोदी:
मितरों... 60 साल हो गए देश आज़ाद हुए, आज तक पानी मिला क्या?

जनता: नहीं मिला

तो अब मंगल ग्रह पर पानी मिलने के बाद मैं आप सबसे पूछना चाहता हूँ कि...

आपको बुध पर पानी चाहिए कि नही चाहिए?

जनता: चाहिए

आपको शुक्र पर पानी चाहिए कि नहीं चाहिए?

जनता: चाहिए

आपको शनि पर पानी चाहिए कि नहीं चाहिए?

जनता: चाहिए

तो आपसे मेरी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस बिहार चुनाव में मुझे अपना आशीर्वाद दीजिये और भाजपा की सरकार बनवाइए।

राहुल गांधी:
पानी - पानी क्या होता है? आज मैं आपको बताता हूँ कि पानी क्या होता है? पानी, दरअसल पानी होता है। ये जो मंगल ग्रह का पानी है, वो किसानों और मजदूरों का पानी है, गरीबों का पानी है, और ये सूटबूट की सरकार - ये मोदी सरकार उस पानी को उद्योगपतियों को देना चाहती है लेकिन मैं आपको ये बताने आया हूँ कि हम ऐसा होने नहीं देंगे।

अरविन्द केजरीवाल:
मंगल पर पानी ढूँढने के लिए मैं वैज्ञानिकों को बधाई देता हूँ लेकिन ये केंद्र की सरकार पानी का कंट्रोल अपने हाथों में रखना चाहती है, दिल्ली की चुनी हुई सरकार को पानी से दूर रखना चाहती है।

ओवैसी:
कोई ये न समझे कि मंगल के पानी पर सिर्फ किसी एक कौम का हक है। ध्यान रहे कि उस पानी पर मुसलमानों का भी बराबर का हक है।

लालू यादव:
ई मंगल पे पानी, मंगल पे पानी, मंगल पे पानी का करता है रे? धुत! अरे ऊ तो बिहार का पानी है जो हमरे गया से जाता है। गया में जा के पुरखों को पानी देते हो कि नहीं? बोलिए? उहै पानी पहुँचता है मंगल पे बुडबक!

जी न्यूज़:
यहाँ आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि मोदी जी इस देश के ऐसे पहले प्रधानमन्त्री बन गए हैं जिनके कार्यकाल में मंगल पर पानी मिला है।

राजदीप सरदेसाई:
इस वक़्त मैं मंगल पर हूँ और जैसा कि यहाँ मैं देख पा रहा हूँ ये दरअसल एक स्विमिंग पूल है, जो ललित मोदी का है, जो अपनी पत्नी के इलाज के लिए पेरिस हिल्टन के साथ यहाँ आये हुए हैं। अब सवाल यह उठता है कि सुषमा स्वराज इस्तीफा कब देंगी!?

सादर आपका

जयप्रकाश

Amit Kumar Nema at एक: 

अन्तर -

प्रतिभा सक्सेना at शिप्रा की लहरें 
 
  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

8 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाकई अब बच्चों को निबंध लिखने को अगर कहा जायेगा तो उनसे क्या क्या लिखा जायेगा पानी पर गाय पर मंगल पर और तो और नेता पर अभिनेता पर सोचा भी नहीं जाता है होने को कुछ भी नहीं होगा पर कितना कितना ढेर सारा लिख लिया जायेगा ।
बहुत सुंदर प्रस्तुति शिवम जी और आज मंगलवारीय बुलेटिन में 'उलूक' के सूत्र 'गाय बहुत जरूरी होती है श्राद्ध करने के बाद पता चल रहा था' को जगह देने के लिये आभार ।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

कई विषयों पर सचेत कर गया बुलेटिन ,विविधता से पूर्ण भी - बहुत बहुत आभार शिवम् जी !

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

कविता रावत जी के ब्लाग पर दो बार ट्राई किया ,कुछ नहीं आ रहा है -ब्लैंक है .

शिवम् मिश्रा ने कहा…

@प्रतिभा सक्सेना जी,

कल मैंने जब पोस्ट लगाई तब मुझे भी लगा कि पोस्ट ब्लैंक है दरअसल पोस्ट की शुरुआत मे शायद उन से एंटर दबा रह गया है सो काफी ब्लैंक स्पेस है ... पोस्ट को पूरा नीचे कर के देखिये लिखा हुआ मेटर मिलेगा |

सादर |

parmeshwari choudhary ने कहा…

बुलेटिन और सभी सूत्र बढ़िया हैं। आभार

Kavita Rawat ने कहा…

सार्थक सामयिक चिंतन-सह-बुलेटिन प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

Amit Kumar Nema ने कहा…

लोकनायक जेपी को समर्पित स्मृति आलेख को ब्लॉग-बुलेटिन में सम्मिलित करने हेतु शिवम जी और ब्लॉग-बुलेटिन टीम का हार्दिक आभार !

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