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शनिवार, 5 सितंबर 2015

कृष्ण शिक्षक


गीता श्री कृष्ण द्वारा दी वह शिक्षा है 
जो जीवन के मुलभुत सिद्धांतों अवगत कराती है, जब भटके मन के हाथ से रास छूट जाती है तो सारथि बने कृष्ण गीता सुनाते हैं  … 
कितना खूबसूरत संयोग है कि आज कृष्ण जन्म महोत्सव और शिक्षक दिवस यानि सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन भी है 



नृत करती आकाशगंगाए
और ग्रह नक्षत्र तारे
नाद करता आकाश
इनके बीच जो काला घना अंधकार है
वो तुम हो युग्म कृष्ण
तुम्ही तो हो
एक अनाहत की गूंज
तुम्हारी वो बंसी
गुरु है हमारी
अरे ओं बंसी तुम गति हो और आवृति भी
जो जोडती हो हम मानव को
एक लय और ताल में
अरे पारिजात
सारयात अश्वान इति सारधि :
हमारे जीवन संचालक
तुम ही हो हमारे प्रारंभ और अंत
अरे ओं युग्म
हमें काल के प्रवाह से निकाल
उर्ध्वगामी बनाओ

बांसुरी के 'रंध्रों' से...
बहने दो 'स्वर'...
रेशा-रेशा मुक्त कर दो...
'शब्दों' के हर 'झंझावात' से...
कृष्ण...
बचा, रचा-बसा...
रहने दो मुझमे, केवल...
तन्मय 'धुन' का 'उत्सव'... ... .... !! - SC -


https://www.facebook.com/rosered8flower/posts/10204565373485826:0

















4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

kuldeep thakur ने कहा…

अति सुंदर....

Aparna Sah ने कहा…

sundar blog...pathniy samgri hai,achha laga..

शिवम् मिश्रा ने कहा…

सच है कृष्ण से बड़ा कोई शिक्षक नहीं ... सुंदर बुलेटिन ... आभार दीदी |

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