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मंगलवार, 21 जुलाई 2015

कुछ लिखना जिजीविषा है




कुछ लिखना जिजीविषा है 
अस्त होते मन का उदित क्षण है 
सत्य का पिघलता ज्वार है 

इसी ज्वार के पिघले पन्नों से ब्लॉग बुलेटिन जोड़ता है - कुछ पन्ने नए होते हैं, कुछ पुराने - 

डायरी के पन्नें...६ - दिशाएं - Blogger

3 टिप्पणियाँ:

shikha varshney ने कहा…

चाय बैठकी पसंद आई ... बढ़िया बुलेटिन

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

>>
कुछ लिखना कुछ भी लिखना
कुछ पढ़ ना कुछ तो पढ़ना ।

बहुत सुंदर बुलेटिन सुंदर प्रस्तुति ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप लिखती रहिए ...हम पढ़ते रहेंगे ... :)

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