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गुरुवार, 30 जुलाई 2015

कलाम-ए-हिन्द और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।


आज आपके सामने प्रस्तुत है मिसाइल मैन ऑफ इंडिया और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी एक कविता :-


मेरी माँ!!

समंदर की लहरें,
सुनहरी रेत,
श्रद्धानत तीर्थयात्री,
रामेश्वरम् द्वीप की वह
छोटी-पूरी दुनिया।
सबमें तू निहित,
सब तुझमें समाहित।

तेरी बाहों में पला मैं,
मेरी कायनात रही तू।
जब छिड़ा विश्वयुद्ध, छोटा सा मैं
जीवन बना था चुनौती, जिंदगी
अमानत
मीलों चलते थे हम
पहुँचते किरणों से पहले।

तेरी उंगलियों ने
निथारा था दर्द मेरे बालों से,
और भरी थी मुझमें
अपने विश्वास की शक्ति-निर्भय हो जीने की, जीतने की।
जिया मैं
मेरी मां!

- डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम


डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी को पूरा हिन्दी ब्लॉग जगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है।     



अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर  ......


बच्चे पूछते हैं कलाम से…

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आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द ... जय भारत।।

5 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर कलाम के कलाम के साथ सुंदर सूत्र सुंदर बुलेटिन हर्ष ।

Udan Tashtari ने कहा…

हमारे इस ब्लॉग को भी शामिल करिये: :)

http://www.ufoskitchen.com/

Naveen Kr Chourasia ने कहा…

क़लाम साहब का जवाब नहीं है दादा , आपका बहुत शुक्रिया इस कविता से अवगत करने के लिए !

Krishna Kumar Yadav ने कहा…

बहुत सुंदर। कलाम साहब को ब्लॉग जगत की तरफ से आपने सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम साहब को शत शत नमन और विनम्र श्रद्धाँजलि।

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