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बुधवार, 24 जून 2015

जीना सब को नहीं आता - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज का ज्ञान :-
मौत सब को आती है बस जीना सब को नहीं आता।

सादर आपका
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छोटी-छोटी बातें

किस राह पर चल पड़ा है यार मेरे तू बता दे...

मन की गलियों को टोहती स्मृतियाँ

सोच ...

अनुलता ....... रूपांतरण

प्यार इतना किया हमने................फाल्गुनी

अँधेरे का रंग

दाढ़ी बनाएं, मूड़े नहीं

याद आता है

हनीमून के भूगोल का सिलेबस (पटना २०)

इस पार हम रहे

खेल और उसका खेला ...

ये ज़रूरी तो नहीं

बहुत दिनन में गाँव गये थे

++तुम वो जो मैं चाहुँ ++

डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी की ६२ वीं पुण्यतिथि

शिमला, सोनिया गांधी और सुविचार

कलम...

लड़कियाँ

चैतन्य वह अचेतन संसार........

इवनिंग डायरी - ४ - मेरा पहला ब्लॉग

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

15 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

मरना आना
जरूरी नहीं होता है
मौत आती है
मरना ही होता है
जीना सब चाहते हैं
अपने ही हिसाब से
यही हिसाब बस
किसी किताब में
नहीं दिया होता है :)

सुंदर बुलेटिन ।

Savita Mishra ने कहा…

bahut bahut shukriya shivam bhai aapka

yashoda agrawal ने कहा…

भाई श्री शिवम मिश्रा जी
शुभ प्रभात...

आभारी हूँ

सादर

Jitendra tayal ने कहा…

जीना सीखना कला है
यही तो है जो सीखते सीखते जिन्दगी निकल जाती है

सुन्दर बुलेटिन.............

Jyoti Dehliwal ने कहा…

जीना सीखते-सोखते जिंदगी ही खत्म हो जाती है ...इसी का नाम जीना है ...

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बुलेटिन में मेरी रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया शिवम जी

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

शुक्रिया शिवम जी मुझे शामिल करने के लिए। इसी बहाने कई उपयोगी लिंक्स पढ़ने को मिले।

Digamber Naswa ने कहा…

अच्छा है आज का बुलेटिन सर ...
आभार मुझे भी जगह देने का ...

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

bahut sundar buletin dhanyavad n aabhar ...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

रंजना ने कहा…

आलेख सम्मिलित करने हेतु आभार।

रंजना ने कहा…

आलेख सम्मिलित करने हेतु आभार।

रंजना ने कहा…

आलेख सम्मिलित करने हेतु आभार।

रंजना ने कहा…

आलेख सम्मिलित करने हेतु आभार।

रंजना ने कहा…

आलेख सम्मिलित करने हेतु आभार।

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