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शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

कुछ याद उन्हें भी कर लें - विजय दिवस - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
विजय दिवस के इस गौरवशाली क्षण पर शहीदों को नमन करते हुए आप सभी का स्वागत है।
आज से 15 वर्ष पहले भारतीय सेना ने आज के ही दिन नियंत्रण रेखा से लगी कारगिल की पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए आतंकियों और उनके वेश में घुस आए पाकिस्तानी सैनिकों को मार भगाया था। पाकिस्तान के ख़िलाफ़ यह पूरा युद्ध ही था, जिसमें पांच सौ से ज़्यादा भारतीय जवान शहीद हुए थे। इन वीर और जाबांज जवानों को पूरा देश ‘विजय दिवस’ के नाम से मनाकर याद करता है और श्रद्धापूर्वक नमन करता है। देश की इस जीत में कारगिल के स्थानीय नागरिकों ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी। 

कारगिल युद्ध  भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में मई के महीने में कश्मीर के कारगिल ज़िले से शुरू हुआ था। इस युद्ध का महत्त्वपूर्ण कारण पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का बड़ी संख्या में 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LOC) यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर घुस आना रहा था। इन लोगों का उद्देश्य कई महत्त्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर सियाचिन ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर करने के साथ-साथ हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिए खतरा पैदा करना था। दो महीने से भी अधिक समय तक चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना वायुसेना ने 'लाइन ऑफ कंट्रोल' पार न करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। 

इस युद्ध में भारत के 500 से भी ज़्यादा वीर योद्धा शहीद हुए और 1300 से ज्यादा घायल हो गए। इनमें से अधिकांश जवान ऐसे युवा थे जिन्होंने अपने जीवन के 30 वसंत भी नहीं देखे थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य तथा बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर भारतीय सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने अपने परिजनों से वापस लौटकर आने के वादे को निभाया मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे मगर लकड़ी के ताबूत में, उस तिरंगे को लपेट कर, जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने खाई थी। जिस राष्ट्र ध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुकता था, वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। 


आइये हम भी इन जांबाज़ रणबांकुरों के लिए सम्मान प्रकट करें। विजय के इस पर्व को पूरी श्रद्धा, ईमानदारी से मनाते हुए उन्हें याद करें जो लौट के घर न आये।
जय हिन्द....!!!
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6 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

विजय दिवस पर शहीदों को नमन । सरकार अभी व्यस्त है । सुंदर बुलेटिन।

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने हेतु आभार
अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन!

आशा जोगळेकर ने कहा…

विजय दिवस पर कारगिल के शहीदों को नमन। अब पकडते हैं सूत्रों को।

sadhana vaid ने कहा…

बहुत सुंदर सार्थक बुलेटिन ! विजय दिवस पर उन सभी अमर शहीदों को, जो लौट के घर ना आये, भावभीनी श्रद्धांजलि तथा देशवासियों को उन पर गर्व करने के लिये हार्दिक बधाई ! आज के बुलेटिन में मेरी रचना को स्थान देने के लिये हृदय से धन्यवाद !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

एक ऐतिहासिक घटना जो लिखी भले ख़ून से गई हो, देश के सपूतों की अमिट दास्तान कहती है!! सिर झुकाता हूँ!!

ज्योति-कलश ने कहा…

अमर शहीदों के प्रति सुन्दर सार्थक श्रद्धांजलि !
मेरा भी शत-शत नमन उन वीरों को
बहुत आभार के साथ
ज्योत्स्ना शर्मा

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