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बुधवार, 23 जुलाई 2014

3 महान विभूतियाँ और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।।

आज २३ जुलाई है ... एक बेहद खास दिन ... भारत के ३ महान विभूतियों से जुड़ा हुआ ... जिन मे से २ की आज जयंती है और एक की बरसी !
'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे'का नारा देकर देश में स्वराज की अलख जगाने वाले बाल गंगाधर तिलक उदारवादी हिन्दुत्व के पैरोकार होने के बावजूद कट्टरपंथी माने जाने वाले लोगों के भी आदर्श थे। धार्मिक परम्पराओं को एक स्थान विशेष से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की अनोखी कोशिश करने वाले तिलक सही मायने में 'लोकमान्य' थे। एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षक और विचारक के रूप में देश को आजादी की दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले तिलक ने कांग्रेस को सभाओं और सम्मेलनों के कमरों से निकाल कर जनता तक पहुंचाया था।

पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' (२३ जुलाई, १९०६ - २७ फरवरी, १९३१) ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। सन् १९२२ में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रान्तिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में पहले ९ अगस्त १९२५ को काकोरी काण्ड किया और फरार हो गये। इसके पश्चात् सन् १९२७ में 'बिस्मिल' के साथ ४ प्रमुख साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रान्तिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला सॉण्डर्स का वध करके लिया एवम् दिल्ली पहुँच कर असेम्बली बम काण्ड को अंजाम दिया।
लक्ष्मी सहगल (जन्म: 24 अक्टूबर, 1914 - निधन : 23 जुलाई , 2012 ) भारत की स्वतंत्रता संग्राम की सेनानी थी। वे आजाद हिन्द फौज की अधिकारी तथा 'आजाद हिन्द सरकार' में महिला मामलों की मंत्री थीं। वे व्यवसाय से डॉक्टर थी जो द्वितीय विश्वयुद्ध के समय प्रकाश में आयीं। वे आजाद हिन्द फौज की 'रानी लक्ष्मी रेजिमेन्ट' की कमाण्डर थीं।

आज तीनों महान स्वतन्त्रता सेनानियों को हिन्दी ब्लॉगजगत और ब्लॉग बुलेटिन टीम स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती है। सादर।।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर  …………… । 














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। सादर।।

9 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

तीन तीन महान विभूतियों बाल गंगाधर तिलक,पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' तथा लक्ष्मी सहगल की याद के साथ उनको श्रद्धासुमन अर्पित करता हुआ आज का सुंदर बुलेटिन । 'उलूक' के सूत्र 'दुकानों की दुकान लिखने लिखाने की दुकान हो जाये' को भी स्थान देकर सम्मान देने के लिये आभार हर्षवर्धन ।

रश्मि शर्मा ने कहा…

तीनों महान वि‍भूति‍यों को श्रद्धासुमन अर्पित करता सुंदर बुलेटि‍न.....मेरी रचना को स्‍थान देने के लि‍ए आभार

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

बेहद उम्दा और बेहतरीन ...आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@मुकेश के जन्मदिन पर.

jafar ने कहा…

sabhi ko pranam....

parmeshwari choudhary ने कहा…

धन्यवाद हर्ष वर्धन जी। आज का सूत्र संकलन बहुत अच्छा लगा।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

महान विभूतियों को प्रणाम और श्रद्धांजली

vibha rani Shrivastava ने कहा…

महान विभूतियों को शत शत नमन और श्रद्धांजली ....

आपको स्नेहाशीष .... शुक्रिया ....

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति ....धन्यवाद

कविता रावत ने कहा…

तीनों महान वि‍भूति‍यों को श्रद्धासुमन!

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