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बुधवार, 18 जून 2014

किसी न किसी मेज के पास आप रुकेंगे .... ये रहे लिंक्स



कोई यूँ ही नहीं लिखता 
लिखता भी है यूँ ही तो वो यूँ ही नहीं होता 
हम उसे उसकी मेज से उठाकर दूसरी मेज पर रख देते हैं 
यह सोचकर 
कि किसी न किसी मेज के पास आप रुकेंगे  .... ये रहे लिंक्स 


5 टिप्पणियाँ:

expression ने कहा…

बहुत अच्छा बुलेटिन....सभी लिंक्स पठनीय !
शुक्रिया
अनु

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर सूत्रों के साथ आज का सुंदर बुलेटिन ।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

अंतिम लिंक हाईलाईट नहीं हुआ है ।

आशा जोगळेकर ने कहा…

कोशिश तो हर मेज़ पर रुकने की है। सुंदर सी कडियाँ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन दीदी ... आभार आपका |

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