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शनिवार, 3 मई 2014

'OPEN' और 'CLOSE' - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

सब कहते हैं कि 'OPEN' और 'CLOSE' दो विपरीत शब्द हैं ;
 लेकिन वास्तव में आप सबसे ज्यादा उसी व्यक्ति के सामने 'OPEN' रहते हैं जिससे आप सबसे ज्यादा 'CLOSE' हैं !

क्यों सही कह रहा हूँ न !?
सादर आपका
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आरम्भ...


Rashmi Swaroop at लेखिका


‘‘एक हाथ में गीता और एक हाथ में कुरान हो’’


ARUN SATHI at चौथाखंभा


श्रमिक


Amit Kumar Nema at एक:


बहुलतावाद 'इवेंट' नहीं है नामवरजी !


Jagadishwar Chaturvedi at नया जमाना


काश..... ! स्कूल जाने वाले दुनिया के बच्चे एक साथ हड़ताल कर दें.....


Manohar Chamoli at अलविदा [alwidaa]


वक्त के साथ चलने की कोशिश -- वन्दना अवस्थी दुबे :)


संजय भास्‍कर at शब्दों की मुस्कुराहट


आसमान..


अर्यमन चेतस पाण्डेय at उन्मेष …


शादी की सेंतीस्वी सालगिरह पर -----


Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR


इंसाफ


Ramaajay Sharma at दिल की बातें


(लघुकथा) खण्डित मूर्ति‍


काजल कुमार Kajal Kumar at कथा कहानी
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

10 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर सूत्र सुंदर संयोजन सुंदर बुलेटिन हमेशा की तरह:)

Amit Kumar Nema ने कहा…

शिवम जी , उत्तम चयन , सार्थक व समावेशी , मेरी रचना 'श्रमिक' को आज के ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद |

abhishek shukla ने कहा…

आभार संयोजक महोदय आपने मेरे लेख को शामिल किया..

Aparna Sah ने कहा…

hamesha ki tarah sundar link laye hain...achha chunav...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

क्या हुआ बुलेटिन रिपोर्टरों को...??? लिंक्स बहुत अच्छे!!

SKT ने कहा…

आज तो आपने हीरे ही परोस दिये, तश्तरी में रख कर! एक से बढ़ कर एक नायाब...!

Rashmi Swaroop ने कहा…

सही कह रहे हैं… :)
मेरे प्रयास को भी स्थान देने के लिये बहुत धन्यवाद।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

Rajesh Kumari ने कहा…

सुन्दर सूत्रों से सजा गुलदस्ता ,मेरी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार

अर्यमन चेतस पाण्डेय ने कहा…

sundar sankalan...mujhe sthaan dene ka aabhaar.. :)

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