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शुक्रवार, 30 मई 2014

खुशियाँ दो, खुशियाँ लो - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज नीलिमा शर्मा जी की फेसबुक प्रोफ़ाइल पर एक बेहद सार्थक स्टेटस पढ़ने को मिला तो सोचा आप सब को भी पढ़वाया जाये ... तो लीजिये पढ़िये |

एक बार पचास लोगों का ग्रुप किसी सेमीनार में हिस्सा ले रहा था। सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि- स्पीकर अचानक ही रुका और सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला , ”आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है।” सभी ने ऐसा ही किया। अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया।
स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा। सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था… 5 पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया।

स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” "नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया”, एक पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।

“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है।“, स्पीकर ने निर्दश दिया।
एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे , और - कमरे में किसी तरह की अफरा- तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये। स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा ,” बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियाँ  ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता ,दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है।


Moral of the Story: जब तुम औरों को उनकी खुशियाँ  देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे तुम्हारी खुशियाँ  मिल जाएँगी।

सादर आपका
शिवम् मिश्रा
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माँ तुझे सलाम ! (14)

रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार 

गफलत

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

10 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

अच्छे लिंक्स के साथ खुशियों का असली पैगाम :)

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति व लिंक्स , शिवम भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

आशा जोगळेकर ने कहा…

सुंदर कहानी सीख भी बहुत काम की। सूत्रों पर जाते हैं और पढते हैं।

प्रीती बाजपेयी ने कहा…

सुन्दर सयोजन, प्रसन्नता हुई पढ़ कर ...धन्यवाद हमारी रचना को शामिल करने क लिए|

shikha varshney ने कहा…

पढ़ते हैं जाकर।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

धन्यवाद, शिवम जी !

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

आभार शिवम् भाई।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार ।

Sriram Roy ने कहा…

रचना को शामिल करने क लिए शिवम भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !

prritiy----sneh ने कहा…

bahut achhi shuruat ke saath sunder links diye gaye hain. inmein meripanktiyon ko sthan dene ke liye dhanywad.

shubhkamnayen

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