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गुरुवार, 1 मई 2014

हे प्रभु

आदरणीय ब्लॉगर मित्रगण
सादर नमस्कार

प्रस्तुत है आज के बुलेटिन में लिखी मेरी एक नई कविता :)











हे प्रभु
यह ह्रदय तुम्हे
बुलाता है
एक बार फिर
इस दुनिया में
क्योंकि
जिस व्यवस्था
को तुमने सुधारा था
आज फिर वो व्यस्था
टूटती साँसों को लिए
एक बार फिर
तुम्हारे इंतज़ार में
खड़ी है
आओ इस संसार में
यहाँ प्रभु
तुम्हारे पुत्र
और मानवता
दोनों ही
दूषित हो रही हैं.....

आज की कड़ियाँ 

नवल जी की कविता - गीताश्री

अपनापन - पूनम जैन

नफ़रत हमारा रास्ता नहीं है - शाह नवाज़

वो लड़की - मिथिलेश दुबे

तुम्हें पता है न - वंदना के एल ग्रोवर

कुछ हो गया है ऐसे - दीपिका

महंगाई के हलाहल पी जाएं - रंग गोपाल तिवारी

शायद कुछ रह जाये - प्रीती वाजपयी

हमने यारों की यारियाँ महफूज़ रखी हैं !! - केतन

बहुत याद आओगे हमेशा - नीलिमा शर्मा

अलविदा!! - मंजीत ठाकुर

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

5 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर कविता सुंदर बुलेटिन ।

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन व सूत्र , तुषार भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !

|| प्रेम दो प्रेम मिले , ईश् दो ईश्वर मिले ||

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शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब तुषार भाई बढ़िया कविता है ... इस बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति के लिए आभार |

आशा जोगळेकर ने कहा…

सुंदर कविता के साथ सूत्र भी।

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

आप सभी का सादर आभार | जय हो मंगलमय हो |

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