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सोमवार, 23 सितंबर 2013

दुखद समाचार

आज ही पता चला कि हिन्दी की वरिष्ठ ब्लॉगर और ब्लॉग बुलेटिन टीम सक्रिय सदस्य रश्मि प्रभा जी की माता जी आदरणीया सरस्वती प्रसाद जी का विगत 19 सितंबर को स्वर्गवास हो गया । उल्लेखनीय है कि सरस्वती जी कविवर पंत की मानस पुत्री थी । यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है हम सभी के लिए । अम्मा जी की आत्मा को शांति मिले और रश्मि दीदी को इस पीड़ादायक क्षण को सहन करने की शक्ति । हमारी अंत: संवेदनाएं रश्मि दीदी और उनके परिवार के साथ है।

 ॐ शांति ... शांति ... शांति !!

रविवार, 22 सितंबर 2013

एक था टाइगर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
आज २२ सितंबर है ... आज मरहूम नवाब पटौदी साहब की दूसरी पुण्यतिथि है !

भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का बृहस्पतिवार, 22/09/2011 की शाम को निधन हो गया था । उन्हें फेफड़ों में संक्रमण के कारण सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नवाब पटौदी गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के पति और सैफ अली खान के पिता थे।
भारत के लिए 46 टेस्ट खेल चुके पटौदी देश के सबसे युवा और सफल कप्तानों में से रहे । उन्होंने 40 टेस्ट मैचों की भारत की अगुवाई की। पटौदी ने 34.91 की औसत से 2793 रन बनाए । उन्होंने अपने करियर में छह शतक और 16 अर्धशतक जमाए ।
अपनी कलात्मक बल्लेबाजी से अधिक कप्तानी के कारण क्रिकेट जगत में अमिट छाप छोड़ने वाले मंसूर अली खां पटौदी ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व कौशल की नई मिसाल और नए आयाम जोड़े थे। वह पटौदी ही थे जिन्होंने भारतीय खिलाड़ियों में यह आत्मविश्वास जगाया था कि वे भी जीत सकते हैं। पटौदी का जन्म भले ही पांच जनवरी 1941 को भोपाल के नवाब परिवार में हुआ था लेकिन उन्होंने हमेशा विषम परिस्थितियों का सामना किया। चाहे वह निजी जिंदगी हो या फिर क्रिकेट। तब 11 साल के जूनियर पटौदी ने क्रिकेट खेलनी शुरू भी नहीं की थी कि ठीक उनके जन्मदिन पर उनके पिता और पूर्व भारतीय कप्तान इफ्तिखार अली खां पटौदी का निधन हो गया था। इसके बाद जब पटौदी ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलना शुरू किया तो 1961 में कार दुर्घटना में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। इसके बावजूद वह पटौदी का जज्बा और क्रिकेट कौशल ही था कि उन्होंने भारत की तरफ से न सिर्फ 46 टेस्ट मैच खेलकर 34.91 की औसत से 2793 रन बनाए बल्कि इनमें से 40 मैच में टीम की कप्तानी भी की।
पटौदी भारत के पहले सफल कप्तान थे। उनकी कप्तानी में ही भारत ने विदेश में पहली जीत दर्ज की। भारत ने उनकी अगुवाई में नौ टेस्ट मैच जीते जबकि 19 में उसे हार मिली। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि पटौदी से पहले भारतीय टीम ने जो 79 मैच खेले थे उनमें से उसे केवल आठ में जीत मिली थी और 31 में हार। यही नहीं इससे पहले भारत विदेशों में 33 में से कोई भी टेस्ट मैच नहीं जीत पाया था। यह भी संयोग है कि जब पटौदी को कप्तानी सौंपी गई तब टीम वेस्टइंडीज दौरे पर गई। नियमित कप्तान नारी कांट्रैक्टर चोटिल हो गए तो 21 वर्ष के पटौदी को कप्तानी सौंपी गई। वह तब सबसे कम उम्र के कप्तान थे। यह रिकार्ड 2004 तक उनके नाम पर रहा। पटौदी 21 साल 77 दिन में कप्तान बने थे। जिंबाब्वे के तातैंडा तायबू ने 2004 में यह रिकार्ड अपने नाम किया था।
टाइगर के नाम से मशहूर पटौदी की क्रिकेट की कहानी देहरादून के वेल्हम स्कूल से शुरू हुई थी लेकिन अभी उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था कि उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद जूनियर पटौदी को सभी भूल गए। इसके चार साल बाद ही अखबारों में उनका नाम छपा जब विनचेस्टर की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया। अपने पिता के निधन के कुछ दिन ही बाद पटौदी इंग्लैंड आ गए थे। वह जिस जहाज में सफर कर रहे थे उसमें वीनू मांकड़, फ्रैंक वारेल, एवर्टन वीक्स और सनी रामादीन जैसे दिग्गज क्रिकेटर भी थे। वारेल का तब पता नहीं था कि वह जिस बच्चे से मिल रहे हैं 10 साल बाद वही उनके साथ मैदान पर टास के लिए उतरेगा।
नेतृत्व क्षमता उनकी रगों में बसी थी। विनचेस्टर के खिलाफ उनका करियर 1959 में चरम पर था जबकि वह कप्तान थे। उन्होंने तब स्कूल क्रिकेट में डगलस जार्डिन का रिकार्ड तोड़ा था। पटौदी ने इसके बाद दिल्ली की तरफ से दो रणजी मैच खेले और दिसंबर 1961 में इंग्लैंड के खिलाफ फिरोजशाह कोटला मैदान पर पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। यह मैच बारिश से प्रभावित रहा था। 

 
सादर आपका 
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बिखरते अस्तित्व

नीलिमा शर्मा at Rhythm
 

दर्द को मेहमानखाने से हटाकर रख दिया

आनंद कुमार द्विवेदी at आनंद 
 

माँ दुर्गा का रूप तुही है, उसके जैसा ही बन बेटी

girish pankaj at गिरीश पंकज 
 

शनिवार, 21 सितंबर 2013

विश्व शांति दिवस .... ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।।


विश्व शांति दिवस प्रतिवर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि विश्व के सभी देशों में शांति स्थापित हो और वो अहिंसा के मार्ग पर चल सके। वर्तमान समय में पूरे विश्व में शांति कायम करना संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख लक्ष्य है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ व उसकी संस्थाएँ, सिविल सोसायटी और विश्व के सभी देशों की राष्ट्रीय और केंद्र सरकारें प्रतिवर्ष 21 सितंबर विश्व शांति दिवस या अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का आयोजन करती है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व के सभी देशों में शांति का संदेश पहुँचाने के लिए कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत और खेल जगत की प्रसिद्ध हस्तियों को समय - समय पर शांतिदूत भी नियुक्त किया है।

इसी शांति के ना होने के कारण पूरी दुनिया दो विश्व युद्धों को देख चुकी है। विश्व में तीसरा विश्व युद्ध ना हो इसके लिए विश्व में शांति स्थापित करना और ज़रूरी हो गया है। इसलिए हमें मिलकर पूरे विश्व को शांतिमय मनाना होगा।
सादर।।

अब रुख करते हैं आज की बुलेटिन की ओर  ….













पढ़िए ये सुन्दर कड़ियाँ। अब हम मिलते हैं कुछ अंतराल के बाद नमस्कार।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

एल्जाइमर्स डिमेंशिया और ब्लॉग बुलेटिन

एल्जाइमर्स डिमेंशिया अधेड़ावस्था व बुजुर्गावस्था में होने वाला एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी की स्मरण शक्ति गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे यह रोग भी बढ़ता जाता है। याददाश्त क्षीण होने के अलावा रोगी की सूझबूझ, भाषा, व्यवहार और उसके व्यक्तित्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
 [लक्षण] 
* जरूरत का सामान जैसे चाभी, बटुआ या कपड़े इधर-उधर रखकर भूल जाना।
* लोगों के नाम, पता या नंबर भूल जाना।
* रोग की चरम अवस्था में रोगी खाना खाने के बाद भी भूल जाता है कि उसने खाना खाया है या नहीं। कई बार इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपने ही घर के सामने भटकते रहते हैं, लेकिन वे घर नहीं ढूंढ़ पाते।
 [दैनिक कार्यो को करने में असमर्थता] 
* दैनिक कार्य जैसे खाना बनाना, रिमोट या मोबाइल जैसे घरेलू उपकरणों को चलाने में असमर्थता महसूस करना।
* बैंक के कार्य जैसे पैसे निकालने या जमा करने में गलतियां होना।
* गंभीर रूप से ग्रस्त रोगी नित्य क्रिया के कार्य जैसे- कमीज का बटन लगाना या नाड़ा भी नहीं बांध पाते है।
 [व्यवहार व व्यक्तित्व में परिवर्तन आना] 
* अत्यधिक चिड़चिड़ापन, वेवजह शक करना, अचानक रोने लगना या बेचैनी महसूस करना।
* एक ही काम को अनेक बार करना या एक ही बात को बार-बार पूछते रहना।
 [भाषा व बातचीत प्रभावित होना] 
बात करते समय रोगी को सही शब्द, विषय व नाम ध्यान में नहीं रहते। ऐसे में रोगी की भाषा अत्यंत अटपटी व अधूरी लगती है।
 

[इलाज] 
कुछ दवाएं उपलब्ध है, जिनके सेवन से ऐसे रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझ-बूझ में सुधार होता है। इन दवाओं को जितना जल्दी शुरू करे उतना ही फायदेमंद होता है क्योंकि ये दवाइयां रोग को आगे बढ़ने से रोकती है। अक्सर परिजन इस रोग के लक्षणों को वृद्धावस्था की स्वाभाविक खामियां मानकर इलाज नहीं करवाते। इस कारण रोग असाध्य हो जाता है।
दवाओं से अधिक कई बार रोगियों और उनके परिजनों को काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। काउंसलिंग के तहत रोगी के अलावा उसके परिजनों को मरीज के लक्षणों की सही पहचान कर उनसे निपटने की सटीक व्यावहारिक विधियां बतायी जाती हैं। 
- डॉ. उन्नति कुमार 


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर …. 











तब तक  शुभ रात्रि। कल फिर मिलेंगे।। 

गुरुवार, 19 सितंबर 2013

चुप रहनें के फ़ायदे... ब्लॉग बुलेटिन

सभी मित्रों को देव बाबा की राम राम...

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एक औरत डॉक्टर के पास गयी उसे उसके पति ने पीटा था जिस कारण उसकी आंखें काली और नीली हो गयी थी!
डॉक्टर ने उसे पूछा क्या हुआ?
औरत ने कहा डॉक्टर साहब मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूं? मेरे पति रोज शराब पीकर आकर आते है और मुझे बहुत पीटते है!
डॉक्टर ने कहा मेरे पास इसके लिए एक बहुत बढि़या इलाज है, जब तुम्हारे पति शराब पीकर घर लौटे तो गरम पानी करना उसमें थोड़ा सा नमक डालना और गरारे करना शुरू कर देना और करते ही रहना, लगातार करते रहना!
दो हफ्ते बाद वो महिला डॉक्टर के पास आयी तो बिलकुल तंदुरुस्त और प्रसन्न लग रही थी!
महिला कहने लगी डॉक्टर साहब ये तो जबरदस्त आइडिया बताया था आपने, अब तो जब भी मेरे पति शराब पीकर घर आते है तो मैं गरारे करना शुरू कर देती हूं और वो मुझे छूते तक नहीं!

डॉक्टर- देखा, अगर मुंह को चुप रखा जाये तो कितना फायदेमंद रहता है!

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आज का बुलेटिन..........










मन बैचैन

राष्ट्रीय साहित्य,कला और संस्कृति का सम्मान समारोह

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फिर मिलेंगे ...

बुधवार, 18 सितंबर 2013

"रहीम" का आँगन, राम की "तुलसी" और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकारों मित्रों को सादर नमस्ते।। आज मैं अपनी 25वीं बुलेटिन में आपके साथ एक दिलचस्प खबर साझा कर रहा हूँ, उम्मीद है कि आपको ये खबर पसंद आएगी।

नाम हाफिज इकरार अब्बासी। इनकी उम्र 83 साल से भी अधिक है, पेशे से ये अधिवक्ता है। कोर्ट - कचहरी में ये अपनी दलीलें भी पेश करते रहते हैं। लेकिन एक बात इन्हें दूसरों से जुदा बनाती हैं और वो बात समाज को सांप्रदायिक सौहार्द व भाईचारे का आईना दिखाती है। मुसलमान होते हुए भी वह अपने आँगन में तुलसी को सम्मान देते हैं तो अपने घर के दरवाजे पर गौ सेवा की इबारतें भी लिखते हैं। बीते 70 सालों में उनके जीवन का एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब उन्होंने दिन की शुरुआत गाय और तुलसी के बगैर की हो। 

यह सार्थक कार्य कर रहें हैं अमरोहा (उत्तर प्रदेश) शहर के मुहल्ला सराय कोहना निवासी हाफिज इकरार अब्बासीजनवरी, सन 1930 ई. को स्वर्गीय मुख़्तार अहमद अब्बासी के घर जन्म लेने वाले इकरार अब्बासी ने 10 साल की छोटी उम्र में कुरान शरीफ की आयतें याद कर ली थी।  उसके बाद उन्होंने मुरादाबाद से एम. ए. और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और वकालत शुरू कर दी। रोज़ कोर्ट जाना और मुकदमों पर बहस करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। लेकिन इस दिनचर्या को शुरू करने से पहले दस साल की उम्र से शुरू की गई अपनी खास दिनचर्या वह आज तक नहीं भूले। और वो है गौ सेवा और तुलसी की चाय। घर के आँगन में बनी गौसाला में 2 गाय रखने की परंपरा 70 साल से चली आ रही है। सुबह की नमाज़ पढ़कर गायों को चारा देना, पानी पिलाना तथा उनकी सफाई करना उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। अब्बासी जी के घर के आँगन में तुलसी की छोटी बगिया महक रही है, बगैर तुलसी के वो चाय भी नहीं पीते है। तुलसी की साफ़ सफाई भी उनकी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा है। हाफिज इकरार अब्बासी कहते हैं कि -"उनके घर में कभी दूध व घी ख़रीदा ही नहीं गया। हम घर में पल रही गाय के दूध का ही इस्तेमाल करते हैं।" अपने शौक के बारे में बताते हुए कहते हैं कि -"हिंदू भाई गाय व तुलसी को पूजनीय मानते हैं तो वह इस लायक है भी, मानव जाति के लिए दोनों कुदरती तोहफा है।" वो आगे कहते है -"83 बरस की उम्र में कभी बीमार नहीं पड़ा।  यह गाय का दूध और तुलसी की ही देन है।"


अब रुख करते हैं आज की बुलेटिन की ओर  …. 














कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभ रात्रि।।

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

एम. एफ. हुसैन, अनंत पई और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।। अपनी तीन दिवसीय यात्रा से कल ही लौटा हूँ, इसलिए ब्लॉगजगत से थोड़ा दूर था। इस बुलेटिन से ब्लॉगजगत में वापसी कर रहा हूँ।  आभार।।


मकबूल फ़िदा हुसैन भारत के जाने - माने चित्रकार थे। इनका जन्म 17 सितम्बर, सन 1915 ई. में मुंबई (महाराष्ट्र) में हुआ था। ये एम. एफ. हुसैन के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध हुए थे। ये भारत के सबसे मशहूर चित्रकारों में से एक हैं। क्रिस्टीज़ ऑक्शन में उनके द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग 20 लाख अमेरिकी डॉलर में बिकी थी, इसी के साथ वो भारत के सबसे महंगे चित्रकार बन गए थे। उनकी एक और पेंटिंग 2008 में लगभग 16 लाख अमेरिकी डॉलर में बिकी थी। 2010 में उन्होंने क़तर की नागरिकता भी स्वीकार कर ली थी। हुसैन साहब कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हुए। भारत सरकार द्वारा उन्हें 1955 में पद्मश्री, 1973 में पदमभूषण और 1991 में पदमविभूषण से सम्मानित किया गया। 1971 में साओ पोलो में उन्हें विश्व विख्यात कलाकार पिकासो के साथ विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। हुसैन जी का निधन 9 जून, सन 2011 ई. में लंदन (इंग्लैंड) में हुआ।


अनंत पई (17 सितम्बर 1929, कार्कल, कर्नाटक — 24 फरवरी 2011, मुंबई), जो अंकल पई के नाम से लोकप्रिय थे, भारतीय शिक्षाशास्री और कॉमिक्स, ख़ासकर अमर चित्र कथा श्रृंखला, के रचयिता थे । इंडिया बुक हाउज़ प्रकाशकों के साथ 1967 में शुरू की गई इस कॉमिक्स श्रृंखला के ज़रिए बच्चों को परंपरागत भारतीय लोक कथाएँ, पौराणिक कहानियाँ और ऐतिहासिक पात्रों की जीवनियाँ बताई गईं । 1980 में टिंकल नामक बच्चों के लिए पत्रिका उन्होंने रंग रेखा फ़ीचर्स, भारत का पहला कॉमिक और कार्टून सिंडिकेट, के नीचे शुरू की. 1998 तक यह सिंडिकेट चला, जिसके वो आख़िर तक निदेशक रहे ।
दिल का दौरा पड़ने से 24 फरवरी 2011 को शाम के 5 बजे अनंत पई का निधन हो गया । आगे पढ़े यहाँ …. 


आज पूरा हिंदी ब्लॉगजगत इन दोनों महान शख्सियतों को हार्दिक नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। सादर।।


अब रुख करते हैं आज की बुलेटिन की ओर …. 















तब तक के लिए शुभ रात्रि। कल फिर मिलेंगे।।

रविवार, 15 सितंबर 2013

आइए मिलिए कुछ नायाब , कुछ नए ब्लॉगों से




जिन दिनों धुरंधर एग्रीगेटर चिट्ठाजगत और ब्लॉगवाणी दोनों अपनी पूरी रवानी पे थे उन्हीं दिनों चिट्ठाजगत की तरफ़ से एक मेल सबको प्राप्त होता था , जिनमें उन नए ब्लॉग्स की जानकारी होती वो भी उनके नाम व यू आर एल पते के साथ जो चिट्ठाजगत पर पंजीकृत होते थे । मगर चिट्ठाजगत के "भूले बिसरे गीत " बन जाने के बाद ये परंपरा भी समाप्त हो चली । अब आलम ये है कि आपको भूलते भटकते हुए नए ब्लॉग्स मिल जाते हैं तो लगता है अरे वाह ये कितना अच्छा कितना बेहतरीन ब्लॉग है । हालांकि हमारीवाणी ने मुखपृष्ठ पर नए ब्लॉग्स के लिए एक कोना बना रखा जिस पर मैं अक्सर टहल के देखता हूं नए ब्लॉग्स को । किसी भी नए ब्लॉग का पहला अनुसरक बनने का अपना ही आनंद है । चलिए छोडिए इन सब बातों को , आइए मिलाता हूं आपको कुछ चुनिंदा ब्लॉग्स से


इन ब्लॉगों से मेरा परिचय तकनीक में सिद्धहस्त ब्लॉगर श्री बी एस पाबला जी ने कराया था , यूं ही एक दिन बात बात में , जब मैंने उनसे कहा कि सर आजकल तो ऐसा लग रहा है कि सबने लिखता ही छोड दिया है । 


सोतडू

फ़िलहाल चमकती पोस्ट नगीना और टाटा गोदरेज  में लिखते हुए सोतडू महाशय लिखते हैं

"कल नगीना से मुलाकात हुई, अच्छा लगा. दरअसल अपने फ़न के माहिर किसी भी आदमी से मिलकर अच्छा लगता है.
नगीना एक मोची हैं.

दरअसल हुआ यूं कि मेरी घड़ी के पट्टे का लूप (चमड़े का घेरा जो पट्टे को बाहर भागने से रोकता है) टूट गया था. घड़ीसाज़ के पास गया (शोरूम नहीं- सस्ते में काम करने वाले के पास) तो पता चला कि लूप छुट्टे नहीं मिलते.
उसने सामने बैठे मोची की ओर इशारा किया, मैं वहां पहुंच गया.
मोची ने मेरी ज़रूरत को समझा और बताया कि वह नहीं कर सकता, अलबत्ता आगे जाकर चौराहे के पास एक मोची है वह कर देगा.
अपनी चप्पल या जूते सिलवा रहे एक सज्जन ने इसकी तस्दीक की और कहा कि वह बहुत बढ़िया कर देगा. "

अब थोडा जागिए और हरी मिर्च का आनंद लीजीए , इस पर लिखते हुए मनीष जोशी अपनी हालिया पोस्ट में लिखते हैं
इस जनम में एक और दिन


गर दे जीगरा दे जो, नमक से खार ना खाए
खड़े को लड़खड़ाने के, दिनों की याद रह जाए
किनारे रास्तों के घोंसले, चढ़ पेड़ सोचे जा  
नई राहें उड़ानों की, जड़ी मिट्टी न मिटवाए
ठिकाना घर बदलने का, दाग दस्तूर है दुनिया 
जमा वो भी नहीं होता, जहां से भाग कर आए,
 कुलदीप जी के इस ब्लॉग का नाम है let us talk
इस पर भी एक कविता ..नहीं नहीं कविता का बेताल है

आजकल कविता वेताल सम

अनचाहे ही कन्धे पर

सवार हो जाती है।

वेताल सम प्रश्न उठाती है

एवं उत्तर न दे पाने की अवस्था में

एक बार फिर पेड़ से उतर

मेरा कन्धा तलाश लेती है।

वो सामन्य से दिखने वाले प्रश्न भी

मुझे अक्सर निरुत्तर कर देते हैं।

अब जैसे कल ही का प्रश्न था 



अब मिलिए अनुपमा जी के बेहतरीन ब्लॉग अनुशील से

इनकी कोई भी पोस्ट ऐसी नहीं है जो आपको बांध न सके । बेहतरीन कलेवर और गजब की अदभुत शैली वाला ये ब्लॉग  सचमुच ही ब्लॉग जगत का नगीना बना हआ है

हालिया पोस्ट में वो कहती हैं , मैं आकाश देखता हूं

"बहुत देर से आसमान पर नज़रें टिकाये बैठे थे, चीज़ें जैसी हैं वैसी क्यूँ हैं, क्यूँ यूँ ही बस उठ कर कोई चल देता है जीवन के बीच से, समय से पहले क्यूँ बुझ जाती है बाती? इतनी सारी उलझनें है, इतने सारे अनुत्तरित प्रश्न हैं, मन इतना व्यथित और अव्यवस्थित है कि कुछ भी कह पाना संभव नहीं! क्या ऐसा नहीं हो सकता कि नियति से कोई चूक हो गयी हो और इस बात का एहसास होते ही वह भूल सुधार करेगी और जो उसने छीना है जगत से, बिना क्षण खोये उसे लौटा देगी… वह फिर रच सकेगा, फिर हंस सकेगा फिर लिख सकेगा और अपनी कही बात दोहराते हुए हमें आश्वस्त करते हुए कह सकेगा : : "विदा....... शब्दकोष का सबसे रुआंसा शब्द है", मैं कैसे विदा हो जाऊं, लो आ गया वापस….!"
 अब कुछ नए ब्लॉगों से एक मुलाकात हो जाए

यूं ही कभी


जिया लागे न


देहात


सारांश 


अस्तित्व


पटियेबाजी



तो आज के लिए इतना ही , अब मुझे इज़ाज़त दें ।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

हिंदी को प्रणाम

प्रिये ब्लॉगर मित्रों,
आज हिंदी दिवस के उपलक्ष में एक छोटी से आशा आपको समर्पित कर रहा हूँ | उम्मीद है मेरी प्रार्थना पर आप सभी गौर करेंगे और इस आकांशा का सम्मान करेंगे |

हिंदी दिवस
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आता है साल में एक बार
कहते जिसे 'हिंदी दिवस'
क्यों इसे मनाने के लिए
हम सभी होते हैं विवश

हिन्द की बदकिस्मती
हिंदी यहाँ लाचार है
पाती कोई दूजी ज़बां
यहाँ प्यार बेशुमार है

काश! हिंदी भी यहाँ
बिंदी बनकर चमकती
सूर्य की भाँती दमकती
अँधेरे में ना सिसकती

आओ मिलकर लें अहद
हिंदी को आगे लायेंगे
अपनी मातृभाषा को हम
माता समझ अपनाएंगे

शर्म न आये किसी को
अब हिंदी के उपयोग में
मान अब सब मिल करें
हिंदी के सदुपयोग में

हाथ जोड़े करता वंदन
'निर्जन' हिंदी भाषा को
अर्जी है हम आगे बढ़ाएं
राष्ट्रभाषा, मातृभाषा को

सिर्फ एक दिन नहीं साल का हर दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाएं | हिंदी को सर्वोच्च स्थान देने में सहायता करें | हिन्द में हिंदी की गरिमा बनायें रखें | अपनी मातृभाषा का सम्मान करें | उससे प्रेम करें | अत्यधिक प्रयोग में लायें | हिंदी भाषी बनें | हिंदी में लिखें पढ़ें अच्छा लगता है | सम्मानित और गौरवान्वित महसूस होता है | हिंदी जिंदाबाद | हिन्द जिंदाबाद | भारत माता की जय | जय हो मंगलमय हो |











आज की कड़ियाँ 

हिंदी दिवस तो हो गया ! - सुशील कुमार जोशी

हिंदी की समस्या - आशुतोष दूबे

कविता में भारतीयता की पहचान - मोहन श्रोत्रिय

हे माँ हिंदी भावभरी ! - तरुण

कहती हूं.....सुन लो तुम - रश्मि शर्मा

हुई कण्ठहार हिंदी !! - डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

मातृभाषा का सम्मान करें - अनुपमा त्रिपाठी

चौदह सितम्बर-चौदह दोहे - डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

हिंदी दिवस (दोहावली) - सरिता भाटिया

हिन्दी इक डोर हुई - डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

आओ हिंदी दिवस मनाएं - प्रतिभा मालिक

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार

जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

हिंदी .... ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।।



कल 14 सितंबर है, कल "हिंदी दिवस" है। मैं जानता हूँ कल हिंदी के विषय में बातें की जाएँगी। कैसे हिंदी को बचाया जाए,  हिंदी को किस भाषा से ख़तरा, हिंदी का विकास कैसे हो? इत्यादि सवाल कल कई गोष्ठियों और चर्चाओं का विषय रहेंगी। लेकिन मैं अपने सभी हिंदी चिठ्ठाकार मित्रों और मुझसे वरिष्ठ हिंदी चिठ्ठाकारों से एक निवेदन करना चाहता हूँ, अगर आप "हिंदी दिवस" मानना चाहते हैं तो, वही करते आइए जो आप अब तक करते आ रहे थे यानि "हिंदी में सार्थक चिठ्ठाकारी"। यही असली "हिंदी दिवस" होगा और हिंदी भाषा का सही मायने में सार्थक विकास होगा। सादर …. आभार।।   



अब चलते हैं आज की बुलेटिन  ओर  …. 















आडवाणी कब तक नाराज रहेंगे?

राष्ट्रभाषा हिंदी : विचार और विमर्श


तब तक के लिए शुभ रात्रि। अब मिलेंगे थोड़े अंतराल के बाद।।

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

625वीं बुलेटिन और एकता की मिसाल

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।।


अभी हाल ही में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में जब सांप्रदायिक हिंसा जोरों पर थी, तो वही मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल में एकता की एक नई मिसाल कायम हुई। सारा शहर जहाँ हिंसा की आग में जल रहा था, तो यहाँ जिला अस्पताल में मरीज़ और उनके रिश्तेदार इस हिंसा से परेशान हो रहे थे लेकिन उन्होंने इस कठिन परिस्थिति में हार नहीं मानी और सभी लोगों ने जात-पात भूलाकर इंसानियत की एक अनूठी मिसाल कायम की। जिला अस्पताल में लोगों ने एक दूसरी बहुत मदद की, लोगों ने धर्म-जाती का भेद भूलाकर एक ही चूल्हे पर खाना बनाया और खाया, साथ ही साथ जिससे जितना हो सका उसने एक दूसरे की भली भांति मदद भी की!!

ऐसे ही अनूठी मिसालों से कायम होती है इंसानियत, जो किसी धर्म और जाती से भी ऊपर होती और ऐसी मिसालों से ही देश में अमन चैन कायम रहता है। जय हिंद।।  


अब चलते हैं आज की बुलेटिन  की ओर ……














कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभ रात्रि।।

बुधवार, 11 सितंबर 2013

जन्मदिन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी चिठ्ठाकार मित्रों को सादर नमस्ते।।

आज भारत के मशहूर गाँधीवादी, प्रसिद्ध समाज-सुधारक और "भूदान आंदोलन" के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे जी का जन्म दिवस है। आज उनके जन्म दिवस पर पूरा हिंदी ब्लॉगजगत और हमारी ब्लॉग बुलेटिन टीम उन्हें हार्दिक नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है। सादर।।






आज हमारा जन्मदिन है। हम पैदा हुए थे, अपने ननिहाल में 11 सितंबर, 1994 ई. में जौनपुर, उत्तर प्रदेश में लेकिन हमारा बचपन बीता है यहाँ मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश में जो अभी भी बीत ही रहा है। अपने बारे में बताने को वैसे कुछ खास नहीं है लेकिन फिर भी मैं अपने छोटे - मोटे शौक आप सबको बता रहा हूँ। मुझे क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और उससे भी ज्यादा इस खेल की नॉलेज मुझे कुछ ज्यादा ही है। मुझे यात्रा करना बेहद पसंद है खासकर नई जगहों की, लेकिन मुझे पुरानी जगह (जहाँ मैं पहले जा चुका हूँ) जाना भी बेहद पसंद है। अक्सर मेरे घरवाले और दोस्त कहते रहते है कि मेरी जनरल नॉलेज बहुत तेज़ है, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता है। मुझे पत्र - पत्रिकाएँ पढ़ना भी बहुत पसंद है जैसे :- जनरल नॉलेज की बुक, नंदन, सुमन -सौरभ, क्रिकेट सम्राट आदि। आगे पढ़े यहाँ ….

आज फेसबुक पर जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाओं के ढेर सारे संदेश आएँ हैं, जिन्हें यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ :-




जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें स्वीकार करो ... साथ साथ ढेरों आशीर्वाद !



Rakesh Mishra

मेरी ओर से जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें || ♥♥ :۩۞۩๑•*¯)
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जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई



जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं...सदा खुश रहो !!!





जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!



जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो हर्ष




जन्मदिन की शुभकामनाएँ




जन्मदिवस पर बच्चों को माखन - मिश्री का भोग लगाते हैं ,तुम्हे क्या पसंद है बताना :)
आज के विशेष दिन और आने वाले हर पल के लिए अशेष शुभकामनाएं ..... खुश रहो :)



जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ भगवान आपको अच्छी सेहत प्रदानकरे ऐसी कामना है हमारी .......




wish you a very happy birth day :-)




जन्म दिवस की मंगल कामनाएँ



happy birthday



जन्मदिवस की हार्दिक बधाई !!




जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!



many many happy returns of the day dear....:)



जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ....



जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आप को जीवन में वो सब कुछ दे जिसकी आपको कामना हो !




जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाऐँ.......
जीवन सुगंधमय एवं उल्लासमय व्यतीत हो......
मंगल कामनाऐँ....




जन्म-दिन की मुबारक और शुभकामनायें......


आप लोगों के भी बधाई और शुभकामनाओं संदेशों का इंतज़ार रहेगा। आभार।। 


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर …. 



















शुभ रात्रि।। 

लेखागार