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गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

दैनिक बुलेटिन कैन्वस पर उभरते नए रंग...

प्रिये ब्लॉगर मित्रगण, 

सादर आभार! 

आज के बुलेटिन में प्रस्तुत है कुछ नए रंग | कुछ नई खट्टी मीठी प्रस्तुतियां आपके आशीर्वाद के लिए आपके सम्मुख हैं | उम्मीद करता हूँ आपको इन कड़ियों का संकलन पसंद आएगा | 

Old grandpa and wooden bowl

विजयश्री, वाग्‍देवी और वसंतोत्‍सव

क्यूँ मैं ही हमेशा मनाऊं तुम्हें ?

तुम्हारे निर्णय

सब दिन होत न एक समान !!!

आरम्भ से - रश्मि रविज़ा

लल्ला पुराण ७१

'नव्या' पत्रिका में मेरी तीन कवितायेँ....

मोहन कुछ तो बोलो!

भूख भगा डबलरोटी की सोच ले और सो जा !

विनिमय

प्रणाम 
तुषार राज रस्तोगी 

तमाशा-ए-ज़िन्दगी
तमाशा-ए-ज़िन्दगी फेसबुक पन्ना

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

राष्ट्र हित मे आप भी जुड़िये इस मुहिम से ...


ब्लॉगर मित्रों, 
सादर नमस्कार!

आपसे सविनय अनुरोध है के राष्ट्र हित मे आप भी जुड़िये इस मुहिम से - 'मिशन नेताजी'




हर हर महादेव....

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इस नाम से आज सभी भारतीय वाकिफ हैं | एक ऐसा नाम जिसने भारत की आज़ादी की जंग में स्वर्णिम इतिहास रचा | भारत को स्वतंत्र संग्राम हेतु अपनी पहली पूर्ण भारतीय सेना प्रदान की | जंग-ए-आज़ादी के शेर कहलाने वाले नेताजी का नाम आज भारत ही नहीं विदेशों में भी बच्चा बच्चा जानता है | परन्तु बहुत खेद के साथ यह कहना पड़ता है के जितना नेताजी ने भारत और भारतवासियों को दिया उतना देश ने और देशवासियों ने नेताजी को नहीं दिया | 

आजादी के पश्चात नेताजी का नाम एक गुमनाम बनकर रह गया | जनता से झूठ कहा गया के नेताजी की मृत्यु हो गई है परन्तु उन्हें न चाहते हुए भी अज्ञातवास ग्रहण करना पड़ा | इसकी वजह थे चंद खुदगर्ज़ और सत्ता के भूखे नेता जो अपने स्वार्थ हेतु यह नहीं चाहते थे के नेताजी स्वतंत्र भारत की राजनीति में आयें  | सन 1945 मे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित हवाई दुर्घटना या उनके जापानी सरकार के सहयोग से 1945 के बाद सोवियत रूस मे शरण लेने या बाद मे भारत मे उनके होने के बारे मे हमेशा ही सरकार की ओर से गोलमोल जवाब दिया गया है उन से जुड़ी हुई हर जानकारी को "राष्ट्र हित" का हवाला देते हुये हमेशा ही दबाया गया है ... 'मिशन नेताजी' और इस से जुड़े हुये मशहूर पत्रकार श्री अनुज धर ने काफी बार सरकार से अनुरोध किया है कि तथ्यो को सार्वजनिक किया जाये ताकि भारत की जनता भी अपने महान नेता के बारे मे जान सके पर हर बार उन को निराशा ही हाथ आई !

आज हर भारतीय ने नेताजी के आसपास के विवाद के बारे में सुना है, बहुत कम लोग जानते हैं कि तीन सबसे मौजूदा सिद्धांतों के संभावित हल वास्तव में उत्तर प्रदेश में केंद्रित है| संक्षेप में, नेताजी के साथ जो भी हुआ उसे समझाने के लिए हमारे सामने आज केवल तीन विकल्प हैं: या तो ताइवान में उनकी मृत्यु हो गई, या रूस या फिर फैजाबाद में | 

1985 में जब एक रहस्यमय, अनदेखे संत “भगवनजी” के निधन की सूचना मिली, तब उनकी पहचान के बारे में विवाद फैजाबाद में उभर आया था, और जल्द ही पूरे देश भर की सुर्खियों में प्रमुख्यता से बन गया| यह कहा गया कि यह संत वास्तव में सुभाष चंद्र बोस थे। बाद में, जब स्थानीय पत्रकारिता ने जांच कर इस कोण को सही ठहराया, तब नेताजी की भतीजी ललिता बोस ने एक उचित जांच के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 

नेताजी से जुडी सच्चाई, उनके अनसुलझे रहस्य और भगवानजी असल में कौन थे ऐसे सवालों के जवाब सामने लाना ही इस मुहीम का मकसद है |  तथा उन सभी झूठों का पर्दाफ़ाश करने के लिए जो इस झूठ को फ़ैलाने के पीछे हैं, के लिए हमने यह मुहीम छेड़ी है और इस मुहीम से जुड़ना ही अपने आप में गर्व और गौरव का प्रतीक है | आप सभी इस मुहीम से ऑनलाइन याचिका साइन कर के, ब्लॉग के ज़रिये, साकार रूप से, निराकार रूप से, दृश्य-अदृश्य रूप से या फिर किसी भी अन्य रूप से जुड़ सकते हैं और इसे सफल बनाने में हमारा सहयोग कर सकते हैं | धन्य हैं वो लोग जो इसमें अपना योगदान दे रहे हैं | आज पता चल जायेगा के कौन-कौन खून देता है और नेताजी को गुमनामी के अँधेरे आज़ादी दिलाता हैं | जय कारा वीर बजरंगी का | जय हो | भारत माता की जय | 

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पेश-ए-खिदमत हैं आज के ब्लॉग बुलेटिन लिंक्स :

महान देशभक्त वीर चन्द्र शेखर आजाद

सुभाष चन्द्र बोसे से मुलाक़ात

नेताजी

इन्कलाब जिन्दाबाद क्या है? [सरदार भगत सिंह के पत्र(१)]

अब इसको कहूँ ग़ज़ल या दिल का उदगार

गणतंत्र गाओ

गया है

न जाने माँ इतनी हिम्मत रोज़ कहाँ से लाती है

महापुराण

खुली आँखों का सपना

दिन हौले हौले ढलता है

अंडा डाल

वह प्रेम-पंखुड़ी

सगा सौतेला

संघर्ष

सादर प्रणाम
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-ज़िन्दगी
तमाशा-ए-ज़िन्दगी फेसबुक पन्ना

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

दिल विल प्यार व्यार ....


तुमने किसी से कभी प्यार किया ??????????????
किसी को दिल दिया ??????????
मैंने भी दिया वर्षों पहले .......................... :) सुरक्षा के वादे से परे ..........
नाम?
नाम गुम जायेगा 
चेहरा बदल जायेगा 
इक प्यार ही पहचान है 
जब तक है 



दिल विल 
प्यार व्यार तब होता है 
जब उम्र 16 की होती है !
चाल-ढाल 
सब ऐंवे हो जाती है 
पूरी फ़िज़ा सावन के अंधे के नाम होती है !
निवाला,पानी 
सब बैरी हो जाते हैं 
बेवजह तारों को गिनना अच्छा लगने लगता है 
पापा अकबर 
और अपना वजूद सलीम और अनारकली नज़र आता है 
'प्यार किया तो डरना क्या ....'
सुनते ही 
झांसी की रानी मन के घोड़े पर लगाम कसती हैं 
घोड़ा भी ऐसा वैसा नहीं 
चेतक बन जाता है 
पवन वेग से उड़ता है .
परिवार के सदस्यों के आगे 
मनोभावना गाती है -
'पर्दा नहीं जब कोईईईई ख़ुदा से ........'
समाज के आगे ऐंठा थोबड़ा कहता है 
'दुश्मन है ज़माना ठेंगे से ...'
16 साल की उम्र खुद को बहुत समझदार समझती है 
तख्तोताज को ठुकराने की हिम्मत 
बाद में अनारकली को छड़ी से मारती है 
और अनारकली भी कनीजवाली 
सारी गालियाँ दे जाती है ... 
ठहराव होता है 
पर बहुत कम 
..... यूँ ही 16 साल स्वीट नहीं होता !
स्वीट - एकदम हवा मिठाई की तरह .........................


अब एक गंभीर प्यार - सिर्फ एहसास ....


सुनो प्यार,

तुमने कहा था जाते-जाते कि शर्ट धुलवाकर और प्रेस करवाकर रख देना। अगली बार आऊंगा तो पहनूँगा। लेकिन वो तबसे टंगी है अलगनी पर, वैसी ही गन्दी, पसीने की सफ़ेद लकीरों से सजी। मैंने नहीं धुलवाई।

उससे तुम्हारी खुशबू जो आती है।

*** *** ***

तुम्हारा रुमाल, जो छूट गया था पिछली बार टेबल पर। भाई के आने पर उसे मैंने किताबों के पीछे छिपा दिया था। आज जब किताबें उठाईं पढ़ने को, वो रूमाल मिला।

मैंने किताबें वापस रख दीं। अब रूमाल पढ़ रही हूँ।

*** *** ***

तुम्हारी तस्वीर जो लगा रखी है मैंने दीवार पर, उसे देखकर ट्यूशन पढ़ने आये लड़के ने पूछा, “ये कौन हैं आपके” मुझसे कुछ कहते नहीं बना।

सोचा कि अगली बार आओगे, तो तुम्हीं से पूछ लूँगी।

*** *** ***

सुनो, पिछली बार तुमने जो बादाम खरीदकर रख दिए थे और कहा था कि रोज़ खाना। उनमें घुन लग गए थे, फ़ेंक दिए। अगली बार आना तो फिर रख जाना।

खाऊँगी नहीं, तो देखकर याद ही करूँगी तुम्हें।

*** *** ***

तुमने फोन पर कहा था, “अब भी दिन में पाँच बार चाय पीती हो। कम कर दो। देखो, अक्सर एसिडिटी हो जाती है तुम्हें।” मैंने कहा, “कम कर दी।”

पता है क्यों? खुद जो बनानी पड़ती है।

*** *** ***

हम अक्सर उन चीज़ों को ढूँढ़ते हैं, जो मिल नहीं सकतीं और उनकी उपेक्षा कर देते हैं, जो हमारे पास होती हैं। मैंने कभी तुम्हारे प्यार की कद्र नहीं की। सहज ही मिल गया था ना।

अब नहीं करूँगी नाराज़ तुम्हें, तुम्हारी कसम। एक बार लौट आओ।

*** *** ***

इस दुनिया में कोई शान्ति ढूँढ़ता है, कोई ज्ञान, कोई भक्ति, कोई मुक्ति, कोई प्रेम। मैं तुमसे तुम्हारा ही पता पूछकर तुमको ढूँढ़ती हूँ और खुद खो जाती हूँ।

मुझे ढूँढ़ दो ना।


खामोश दिल की सुगबुगाहट से प्यार यूँ मिलता है 

तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो,
माटी के डिबिये की रौशनी में,
सकुचाती हो, शरमाती हो...
इस दुनियादारी के गणित में उलझे,
जो जिए हैं वो पल तुमने
उनसे जुडी ज़िन्दगी का इतिहास सुनाती हो...
अजीब ही पागल हो,
मेरी हर हंसी में,
ढूँढती हो जाने कितने अर्थ
और मेरे हर आंसू को व्यर्थ बताती हो...
तुम्हारी इन बातों के बारे में,
जब भी सोचता हूँ कुछ लिख दूं मैं,
पर खुद का जिक्र यूँ पन्नों पर पढ़कर
जाने क्यूँ मुझसे गुस्सा सी जाती हो...
अक्सर भेज दिया करता हूँ मैं
जो मेसेज तुम्हारे मोबाईल पर 
उन्हें हर रोज पढ़कर,
हर रोज मिटाती हो...
सोचता हूँ छोड़ दूं मैं
ये कवितायें लिखना
पर क्या करूँ, इसी बहाने से ही सही,
तुम अक्सर मेरी कविताओं में आती हो...


प्योर प्राइवेसी के याद आते मचलते पल 



सुनो आज मौसम बहुत हसीं है 
फिफ्टी फिफ्टी  के अनुपात में 
सूरज और बादल टहल रहे हैं 
चलो ना , हम भी टहल आयें 
जेकेट - नहीं होगी उसकी ज़रूरत 
हाँ ले चलेंगे अपनी वो नीली छतरी 
जिसपर  गिरती हैं जब बारिश की बूँदें
तो रंग आसमानी सा हो जाता है 
और टप टप की आवाज के साथ 
लगता है जैसे खुले आकाश के नीचे 
कर रहा हो कोई टैप डांस 
एक ही छतरी को दोनों पकड़ते हुए 
कितना मुश्किल होता है न चलना 
तुम हमेशा कहते हो बीच रास्ते 
क्यों नहीं लेती अपनी अलग छतरी 
मैं नहीं कह पाती तुमसे,बुद्धू हूँ न 
उस एक छतरी में डगमगा कर चलना 
तुम्हारे साथ खुले आसमान के तले
नृत्य करने जैसा एहसास देता है .
उफ़ बहुत फिल्मी हो ,
हाँ हाँ मालूम है यही कहोगे 
इसीलिए तो नहीं कहती कुछ 
वरना तो मन की तिजोरी 
भरी पड़ी है शब्दों से 
न जाने क्या क्या है कहने को 
यह भी कि काश कभी चलते चलते 
किसी टापू पर हम दोनों खो जाएँ 
और कम से कम दो दिनों तक 
न मिले कोई बचाने वाला .
मैं चाहती हूँ देखना 
क्या तब भी तुम्हें आता है याद 
खाने का समय और दो सब्जियां 
देखना चाहती हूँ मैं 
प्योर  प्रायवेसी के उन पलों में 
क्या याद करते हो तुम 
साथ बिताये वो सुनहरे पल।
हाँ बाबा हाँ ,जानती हूँ 
बातों से नहीं भरता पेट 
कोरी भावनाएं हैं यह सब 
फालतू लोगों के शगल 
फिर भी ...
उफ़ कितनी जिद्दी हूँ न मैं


सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

मारे गए गुलफाम



उल्फत भी काम ना आई 
या यूँ कहो रास ना आई 
तो इशकजादे से बन बैठे देवदास 
हो गया  अंगूर खट्टे हैं सा चेहरा ............... 

अब हम कवि नहीं रहे,कहानीकार भी नहीं .... हम सब पञ्च परमेश्वर बन गए हैं - वो भी नकली ! क्योंकि सारे वोट हम अपने बक्से में डाल लेते हैं . इन्कलाब की धरती हो या उपदेशक की .... हम सब भगत सिंह हैं और बुद्ध. भगत सिंह के साथ न सुखदेव,न आज़ाद,न बटुकेश्वर दत्त,न राजगुरु - तो एक डफली एक राग सबकी अपनी अपनी . सीखनेवाला कोई नहीं,अब तो पैदा लेते सब सबकुछ जान लेते हैं ....... पोंगा पंडित बने सब अशुद्ध मंत्र पढ़ रहे - स्थिति है -
का खायीं का पीहीं 
का लेके परदेस जायीं !!!

रुकिए रुकिए .... कुछ पढ़ ही लीजिये,बाद में जो मन करे कहिये ...... पसंद आये तो मन में रखियेगा
नहीं तो सड़क पर फेंक दीजियेगा :) और गाते चलियेगा 
'कौन कौन कितने पानी में 
सबकी है पहचान मुझे' 




रविवार, 24 फ़रवरी 2013

आज छुट्टी है ....



आज छुट्टी है .... तो बच्चों के लिए कुछ होना ज़रूरी है . है न बच्चों ? बोलो - हाँ 
अरे बोलो बोलो ............ नाराज़ हो ? कि अब तक क्यूँ नहीं सोचा ....... प्यारे बच्चों तुम्हें पता ही नहीं कि सब कितना सोचते हैं, मैं तो एक झलक उठाकर लाई हूँ . अब हंस भी दो और सबसे पहले यह गाना सुनो और फिर धीरे धीरे आगे बढ़ते जाओ - 









अब मुझसे पक्की दोस्ती हुई न ? कोशिश करुँगी - फिर आऊं कुछ जादू लेकर :)

रविवारीय बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
सादर नमस्कार!

रविवारीय बुलेटिन में आपके सम्मुख प्रस्तुत हैं कुछ नए लिंक्स | उम्मीद करता हूँ पसंद आयेंगे | आमंत्रण है, आप सब आएं यहाँ, मेरे साथ कुछ पल गुज़ारने की गुज़ारिश है और अपना आशीर्वाद बनायें रखें |












धन्यवाद्
तुषार राज रस्तोगी


Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

ऐसे ऐसे कैसे कैसे !!!



अर्चना चावजी ने क्या सत्य दिखाया है :)

टाईम-पास वार्तालाप
कुछ समय पहले एक फ़िल्म "वक्त "(नई )देखी थी उसमे एक किरदार था जो बहुत सवाल करते रह्ता है,ऐसे किरदारों से हम जिन्दगी में कई बार टकराते है -----
आज मै एक ऐसे टाईम-पास वार्तालाप की चर्चा करना चाहती हूँ जिसका सामना मैने करीब साल भर तक किया है -------आपको भी कई बार इनका सामना करना पडता होगा,जिसमे पुछने वाला ही सब कुछ बताते रहता है ------

---अरे!!!! आप!!!! नमस्ते ।
---नमस्ते !
---और ?,कैसे हैं?
---बढिया !
---कहाँ हैं आजकल ?
---यहीं !
---कोलंबिया में ही ?
---हाँ !
---अच्छा-अच्छा ,और सब अच्छे हैं ?
---हाँ ,एकदम बढिया !
---बच्चे कैसे हैं ?
---बढिया !
---कहाँ है आजकल ?---बाहर ही पढ रहे हैं ?
---हाँ !
---बेटा बडा है ना आपका ?
---हाँ !
---नोएडा में पढ रहा है ना ?
---हाँ !
---इंजिनियरिंग कर रह है ना ?
---हाँ !
---आखरी साल होगा ना उसका ?
---हाँ !
---चलो बढिया ।---और एक बेटी भी थी ना ?
---हाँ !
---वो कहाँ है ?
---पूना !
---क्या कर रही है ?
---बी.बी.ए.!
---पूना से ?
---हाँ !
---क्यों ?
---ऐसे ही !
---बी.बी.ए. तो इंदोरे मे ही हो जाता है ना?
---हाँ !
---पुणे युनिवर्सिटी लगती होगी ना वहाँ ?
---हाँ !
---चलो बढिया ,ऐम.पी।से तो बढिया होगा ?
---हाँ ,देखो!!!
---तो फ़िर आप यहाँ अकेले ?
---नही,मेरी भतिजी है !
---यहीं एड्मिशन लिया है?
---हाँ !
---कौनसी क्लास में?
---इलेवन्थ !
---चलो बढिया,ये आपकी भतिजी है ?
---हाँ !
---क्या नाम है ?
---प्रान्जली !
---क्या सब्जेक्ट लिया है ?
---मेथ्स !
---अच्छा!! ,फ़िर कोचिंग-वोचिंग ?
---हाँ ,लगाई है !
---कहाँ ?
---पलासिया !
---अरेरे,तो वो तो दूर पडता होगा ?
---हाँ !
---फ़िर गाडी ?
---नहीं मै छोडती हूँ !
---अरे तो आपको तो चार राउंड हो जाते होंगे ?
---हाँ !
---चलो फ़िर भी अच्छा है ,आपको साथ तो है !!!
---हाँ!
---अपका खाना तो स्कूल में ही होता होगा ?
---हाँ !
---फ़िर इसका ?,ये भी वहीं खाती है ?
---नही ,इसका टाईम अलग है !
---फ़िर ?
---मेरी मम्मी भी है साथ में ।इसी के लिए आई है !
---चलो बढिया ,फ़िए तो आपको मदद मिल जाती होगी ?
---हाँ !
--- दिन में तो वो अकेले रहती होगी ?
---हाँ !
---फ़िर क्या करती है ?दिन भर बोर हो जाती होगी ?
---हाँ !
---उनको गाँव की याद आती होगी ,जाती होगी कभी-कभी ?
---हाँ ,जाती रहती है !
---अकेले चली जाती है ?
---हाँ !
---इसकी मम्मी ? खरगोन मे रहती है ?-------(*। *)--------
---और इस तरह अनवरत प्रश्नों का सिलसिला चलता रहता है -----
---

---कहीए--- आपको भी तो किसी ऐसे परिचित कि याद नहीं आ रही है ? - http://archanachaoji.blogspot.in/2009/03/blog-post_23.html


होता है न ऐसा ........ ? मुस्कुराइये और बोलिए, साथ ही कुछ और पढ़ लीजिये -





शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

अरे रुक जा रे बंदे ... अरे थम जा रे बंदे - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

कल एक बार फिर देश मे बम फटे ... फिर बेगुनाह लोगो की जानें गई ... लोग घायल हुये ... फिर कुछ ज़िम्मेदारीयां और कुछ गैर ज़िम्मेदारीयां तै की गई ... फिर राजनीति हुई ... फिर मुआवजे बाँटे गए ... सड़कों पर बहे खून की कीमत लगी ... पर क्यों ... भला क्यों ऐसा एक बार फिर हुआ ... और आखिर कब यह सिलसिला रुकेगा !?

"अरे मंदिर यह चुप है ... अरे मस्जिद वो गुमसुम ... इबादत फट पड़ेगी ... ;
समय की लाल आँधी ... कब्रिस्तान के रास्ते ... अरे लथपत चलेगी !!
किसे काफिर कहेगा ... किसे कायर कहेगा ... तेरी कब तक चलेगी ???
अरे रुक जा रे बंदे ... अरे थम जा रे बंदे ... कि कुदरत हंस पड़ेगी !!!"



ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से हम इन बम धमाकों की घोर निंदा करते है और सभी प्रभावित लोगो के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं प्रेषित करते है !

सादर आपका 

शिवम मिश्रा
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हैदराबाद बम विस्फोट 2013 में अब तक 16 व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है। 6 मरणासन्न व्यक्तियों सहित लगभग 120 लोग घायल हैं। गृह मंत्री शिंदे कह रहे हैं कि दो दिन पूर्व सूचना दे दी गयी थी। खुफिया एजेंसियों द्वारा मीडिया में कई तरह की फिल्में दिखाई जा रही हैं। जनता जिस फिल्म को सर्वाधिक पसंद कर ले वही फिल्म न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया जायेगा। और फिर अन्य विस्फोट हो जायेंगे। जनता मरेगी, फिर वही डायलॉग डेलीवेरी शुरू हो जाएगी। मीडिया के माध्यम से खुफिया एजेंसी बता रही हैं कि यासीन भटकल इंडियन मुजाहिद्दीन आजमगढ़ के तबरेज की तरफ शक की सुई है। दूसरी ओर घटना करने का तरीका मक्का मस्जिद विस्फो... more »

धमाके

तुषार राज रस्तोगी at तमाशा-ए-जिंदगी
मदमस्त बसंत की एक शाम गूँज सुनाई दी हाय राम पहले हुआ धमाका आम फिर जोर के फटा भड़ाम धुएं का जब छटा बादल तो बह निकला सारा काजल लहू की मनका जो बहती नीचे धरती को है छूती कितने ही मूर्छित हुए कितने हो गए मूक कितने बधिर हो गए कितने कर गए कूच मृत्यु का हाहाकार मचा यमराज ने कैसा वार रचा हर एक धमाका था कैसा आया पृथ्वी पर भूचाल जैसा मानवता फिर से हार गई भारत माँ शर्मसार हुई कब तक रहेगा हाल यही अब कौन करेगा अपने देश के बिगड़ते हाल सही

आतंकवाद से लड़ना है तो ख़ुफ़िया तंत्र को मजबूत करना ही होगा !!

पूरण खण्डेलवाल at शंखनाद
आतंकवादी घटनाएं हमारे देश में रुकने का नाम नहीं ले रही है और आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों में एक बार फिर कामयाब हो गये हैं ! इसके बाद हमारे सत्ताधीशों द्वारा वही रटे रटाये बयान आयेंगे कि हम आतंकवाद को बर्दास्त नहीं करेंगे लेकिन क्या केवल बयान देने भर से आतंकवाद पर लगाम लग पाएगी ! हमारे सत्ताधीशों के कार्यकलापों को देखकर तो यह कतई नहीं लगता कि आतंकवाद को लेकर वो संजीदा भी है ! उनके लिए आतंकवाद केवल बयानबाजी का मामला है और आतंकवाद को लेकर किस तरह कि बयानबाजी से उनके वोटों में इजाफा हो सकता है यही सोचकर बयानबाजी की जाती है ! सत्तापक्ष हो या विपक्ष सबका आतंकवाद पर अपने अपने वोटों के हिसा... more »

मैं बहुत विचलित हूँ इस शहर में अब ..

आज मैंने फिर देखा है सड़कों पर इंसानी खून मांस के चीथड़े लहूलुहान इंसानियत भेड़ियों ने दिन दहाड़े किया अपना काम जिनके कंधों पर था सुरक्षा का भार वे सोते रहे गहरी नींद में चारमीनार पर फिर से दीखने लगीं हैं दरारे खामोश है गोलकुंडा बूढ़े खंडहर के रूप में शांतिदूत गौतमबुद्ध की प्रतिमा हुसैन सागर के बीच एक दम नि:शब्द मैं बहुत विचलित हूँ इस शहर में अब ..... 21/02/2013 की शाम हैदराबाद में हुए बम विस्फोट के बाद लिखी एक रचना . Top of Form

कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर - साहसी और निर्भिक महिला

मनोज कुमार at विचार
कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर [image: IMG_4650] *साहसी और निर्भिक महिला* [image: IMG_4622]भारत की आज़ादी की लड़ाई में बापू का कदम-कदम पर साथ देने वाली कस्तूरबा गांधी का 22 फरवरी 1944 को निधन आगा ख़ां महल जेल में हुआ। वहीं उनका अंतिम संस्कार भी हुआ। तेरह वर्ष की उम्र में 1882 में गांधीजी का विवाह कस्तूरबाई से हुआ। उनके चार पुत्र थे, हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास।* *बा और बापू एक आदर्श और असाधारण दंपती थे। गांधी जी को अपने जीवन में अपनी अर्धांगिनी कस्तूरबा गांधी का भरपूर साथ मिला। उनके *62 *साल के विवाहित जीवन में भारत के किसी भी साधारण विवाहित इकाई की तरह उतार-चढाव आते

" अपना घर .....सुकून भरा ......."

* * *२२.०२.२००२ एक यादगार तिथि *,हमारे लिए । इसी दिन हमने अपने घर में विधिपूर्वक गृह प्रवेश किया था । अद्भुत तिथि के संयोग को देखते हुए हमने स्वयं ही इस तिथि को गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त मान लिया था ,जो बाद में प्रकांड पंडितों के अनुसार वास्तव में एक अद्भुत रूप से बहुत ही शुभ मुहूर्त था । मूल रूप से हमारे पूर्वज प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील के एक पिछड़े से गाँव 'मद्दूपुर' के निवासी रहे । पिता जी ने अपनी पढ़ाई लिखाई लखनऊ विश्विद्यालय से की । तत्पश्चात रेलवे की सेवा में पूरे सेवाकाल में फैजाबाद जिले में ही तैनात रहे । फैजाबाद में तैनाती के दौरान ही वहीँ शहर में एक घर बना लिया ।... more »

शिंदे साहब की स्पीडपोस्ट

शिवम् मिश्रा at पोलिटिकल जोक्स - Political Jokes
अब कहीं शिंदे साहब यह न कहें कि " हम ने २ दिन पहले ही हैदराबाद आईबी को इन बम धमाकों की चेतावनी स्पीडपोस्ट से भेजी थी !! "

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विशेष लेख : भारत की प्रमुख भाषाएँ।

आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। पहला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी, 2000 को मनाया गया था। यूनेस्को द्वारा नवंबर, 1999 को इस उद्देश्य से इस दिवस की घोषणा हुई थी कि ताकि हर कोई अपनी मातृभाषा का आदर करे तथा वे भाषाएँ जो विलुप्ति के कगार पर हैं उनको बचाने के लिए प्रयत्न किया जा सकें। आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है तो इस अवसर पर मैं आज भारत की प्रमुख भाषाओं का इतिहास आप सबके सामने प्रस्तुत करने की कोशिश करूँगा। प्राचीन भारत में पाली, प्राकृत, मागधी, शूरसेनी (शौरसेनी), संस्कृत तथा द्रविड़ (तेलुगू, तमिल, कन्नड़ आदि) भाषाओं ... more »

हिन्दी ब्लॉगरी की दशकोत्सव यात्रा - 5 [नौ गम्भीर]

गिरिजेश राव, Girijesh Rao at एक आलसी का चिठ्ठा
*पिछले** से आगे...* पहले अश'आर बोलने का नुस्खा! Anurag Sharma उवाच _____________ मुंह में ज़र्दे वाला पान घोलकर बोलिए आ,फिर ज़रा (जरा नहीं वरना क़यामत हो जाएगी) रुकिए फिर बोलिए शआर, उसके बाद पान को बगल में थूक दीजिये, तब बनेगा खालिस अ'शआर ... और कहीं गलती से पिलूरल कर दिया तो शेर में तब्दील हो जाएगा ... ___________ फेसबुक पर यात्रा जारी है। ऊपर का नुस्खा भी वहीं से आयातित है । आज नौ गम्भीर ब्लॉग ब्लॉगर। इन नगीनों से हिन्दी ब्लॉगरी गौरवान्वित है। 36 गढ़ की धरती ब्लॉगरी के लिये बहुत उपजाऊ है! राहुल सिंह के गम्भीर शोधपरक आलेख एकदम कसे बसे और नयी जानकारियों से भरे होते हैं। ब्लॉग ज... more »

मतवाली बेखौफ़ गज़ल

बस कोशिश थी कि कुछ कहें मगर जब बात बिगड़नी होती है तो यूँ बिगड़ती है कि साधे नहीं सधती....काफिया उखड़ा बार बार...कोई बात नही....माईने ही उखड़ गया कि जिसे शिद्दत से चाहा उसे ही कुर्बान कर देने को तैयार...खैर, यही तो है मतवाला पन- यही तो दीवानापन...पढ़ ही लिजिये...सुधार, व्याकरण आदि तो खैर चलता रहेगा...सुधार बता देंगे तो कोशिश होगी कि आगे महफिलों में सुधार कर पढ़ी जाये वरना तो आजकल की महफिलें...किस बात पर दाद मिलेगी ...ये तो आप पर निर्भर हैं...शेर पर नहीं. जबकि लोग लिख रहे हैं कि फलाने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त गज़ल...तब ऐसे में बेआशीष गज़ल का लुत्फ उठायें….और कुछ नहीं तो हिम्मत की दाद दे दे... more »

फ्लिपकार्ट से 1000 शानदार म्यूजिक एलबम डाउनलोड करें एकदम मुफ़्त!

[image: image] आप कहेंगे, सांग्स.पीके क्या बंद हो गया है? या फिर गली-गली बिकने वाले 20 रुपल्ली के एमपी-3 डीवीडी पर क्या बैन लग गया है? नहीं. ऐसा नहीं है. सांग्स.पीके धड़ल्ले से चल रहा है और 20 रुपल्ली के एमपी3 डीवीडी में हर किस्म का गीत संगीत आप खरीद सकते हैं. परंतु, एक तो यह गैरकानूनी है, दूसरा, अपवादों को छोड़ इनकी क्वालिटी एकदम घटिया रहती है. तो, यदि आप बढ़िया क्वालिटी में एमपी3 म्यूजिक एलबम डाउनलोड करना चाहते हैं (*आपको 128 तथा 320 केबीपीएस में से चुनने का विकल्प मिलता है, और जाहिरा तौर पर अच्छी क्वालिटी के लिए 320 केबीपीएस चुनें*) वह भी एकदम मुफ़्त तो फ्लिपकार्ट पर उसके एमप... more »

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अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

एहसासों का दस्तरखान - ब्लॉग बुलेटिन


आदरणीय मित्रगण,
नमस्कार !!!

मैं हाज़िर हूँ आपके रूबरू कुछ नई कुंडलियाँ लेकर | अपने पसंदीदा खजाने से कुछ और मोती चुन कर आपका प्यार पाने के लिए | हंसी, मजाक, यार, प्यार, मोहब्बत, दुःख, दर्द, रुसवाई, अंगड़ाई, भाव, छंद, द्वन्द, अरमान, दास्तान और मेरे प्यारे कद्रदान आज के बुलेटिन में है हर एहसास की भरमार | कहते हैं के आज के दस्तरखान का है अंदाज़-ए-बयां और | आप सभी की दुआएं और साथ चाहूँगा | गौर फरमाएं और प्यार जताएं | पेश-ए-खिदमद करता हूँ अपनी नई कुंडलियों का गट्ठर | 























सादर आभार और प्यार 
तुषार राज रस्तोगी 


बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

लीजिये पढ़िये मेरी पहली ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,

प्रणाम !

मैं तुषार राज रस्तोगी | ब्लॉगर जगत विद्यालय का नवीन दाख़िला | आज से मैं भी ब्लॉग बुलेटिन में अपना योगदान करने का प्रयास करूंगा | आशा करता हूँ के आप सभी मित्रगण को मेरा यह प्रथम प्रयत्न पसंद आयेगा और आप सभी का आशीर्वाद और सहयोग मेरे साथ परस्पर बना रहेगा | मेरे द्वारा चुनी हुई कुछ कड़ियाँ कुछ इस प्रकार हैं | 

लेखागार