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रविवार, 11 अगस्त 2013

बुलेटिन बोले तो बुलेट ट्रेन ......वन लाइनर सुपर फ़ास्ट



कहते हैं कि कम शब्दों में जितना अधिक कहा जाए उसका मज़ा और उसका असर कुछ और ही होता है । मैं शुरू से ही प्रयोगों में यकीन रखता आया हूं और न सिर्फ़ जीवन बल्कि लेखन में भी अलग अलग विधाओं , वैसे मुझे असल में किसी भी विधा की कोई समझ नहीं है , में नई नई खुराफ़ात करने में बहुत आनंद आता है । यही वज़ह है कि कभी फ़ेसबुक स्टेटस को सहेज़ने के लिए फ़ेसबुक नाम से ही ब्लॉग बना लिया तो कभी ब्लॉगरों की टिप्पणियों को सहेज़ने के लिए टिप्पी का टिप्पा नामक ब्लॉग । इन दिनों वन लाइनर यानि व्यंग्य बाणों पर हाथ साधा जा रहा है । मैंने पाया कि आज जबकि लोग व्यस्तता के कारण बहुत कम समय में बहुत कुछ पढ लिख लेना चाहते हैं ये छोटे छोटे चुटीले वाक्य न सिर्फ़ लोगों को गुदगुदाते भी हैं बल्कि अपना भरपूर असर भी डालते हैं ।
पिछले दिनों हमने भी अपने स्टेटस पर खूब उझीले ऐसे देखिए ,
"पाकिस्तान ने भारतीय चौकियों पर दागी 7000 गोलियां , सब की सब "कडी चेतावनी" से टकरा के चूर चूर हो गईं

पाकिस्तान सरकार सुबह से टीवी पर आंख गडाए बैठी है कि आज बिहार के किस भकलोल मंतरी ने उनके लिए क्या कहा

मेरा "बयान" आधिकारिक नहीं था : शहरयार खान । अजी हमें तो वो बयान से ज्यादा "बनियान" लग रहा था जिसे आपने गलती से पहन लिया था शाम को उतार फ़ेंका

आतंकियों की धमकी का करारा जवाब दिया जाएगा , जवाब को बेसन में लपेट के रिफ़ाइंड में तल कर "करारा" किए जाने के निर्देश दिए गए
ब्लॉग पोस्टों की चर्चा हो या उनके लिंक्स को सहेज़ने की बात वन लाइनर यहां भी कमाल लगते हैं । अब बुलेटिन में भी आप इस वन लाइनर के साथ पोस्ट लिंक्स को देखिए


इट्स हैप्पन ओनली इन गुजरात : एंड नींद उड जाए सबकी दिन रात :)

समाज क्या कहेगा : कहने के अलावा और क्या करेगा :)

व्हाट्स अप फ़ेसबुक और समाज : तीनों ही उछल उबल रहे हैं आज :)

मनौती : पूरी हुई क्या :)

राष्ट्रपति के आदेश का पालन हो : और प्रधानमंत्री के मौन की आदत हो :)

इस नागपंचमी जरा बच के रहना : डस लें को खच्च से कहना :)

पुंछ के शहीदों को नमन : इनकी शहादत से ही है , देश में अमन

सोचते रहते हैं हम : बस सोचते ही रह जाते हैं :)

होना चाहिए : और होते रहना चाहिए :)

विवाद की जडें : हमेशा फ़साद का पेड खडा कर देती हैं :)

नागपंचमी और मेरा गुमना: मिलने की कथा ध्यान से सुनना :)

सेल्सियस की कब्र से : फ़रेनहाइट निकल के आया क्या :)

मेरे शहर में मेरा इंतज़ार : और खुद मुझे ही पता नहीं है यार :)

परेशान कर दिया है इस वकील के सवालों ने : जवाब देकर उन्हें बेचैन कर डालिए

 अमर शहीद खुदीराम बोस की १०५वीं पुण्य तिथि : देश के शहीद को नमन

कागज़ की कश्ती बारिश का पानी : अपनी कश्ती खुद है चलानी :)

अब गीत नहीं गाती है गौरैया : हमें तो दिखती भी नहीं है भैया :)

आज के बुलेटिन में इतना ही , जल्दी ही मिलूंगा अगले बुलेटिन में एक नए अंदाज़ के साथ ।

आपका खबरीलाल
अजय कुमार झा

14 टिप्पणियाँ:

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत खूब भैयन .... इशटाईल पसंद आया .... बहुते धूम मचाये बुलेट मार के :) जय हो

Kulwant Happy ने कहा…

वाह गुरू, हम भी इस वन लाइनर सुपरफास्‍ट में हैं, मैं तो अचानक आया, तो देखा कि हम भी हैं। शुक्रिया, गजब। जब कुछ अचानक नजर आता है तो सरप्राइज होता है, सरप्राइज के लिए शुक्रिया ।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

तो आपकी तुर्की-ब-तुर्की शुरू.... !

अनुपमा पाठक ने कहा…

Nice oneliners:)

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही बेह्तरीन लिंकों के साथ सार्थक पठनीय बुलेटिन । सादर आभार।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

जय हो खबरीलाल जी ... देर से आए पर दुरुस्त आए ... मज़ेदार वन लाइनर बुलेटिन ... जय हो !

उज्ज्वल कुमार झा ने कहा…

नए अंदाज़ में लिखे गए टिका टिप्पणी वाकई काबिले तारिफ के हैं........बहुत बढ़ियां।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

एक लाईन में शहद भी,तीर भी,मरहम भी,हंसी भी - वाह

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सटीक.

रामराम.

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन!!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा सुंदर बुलेटिन ,,,

RECENT POST : जिन्दगी.

मेरा अव्यक्त --राम किशोर उपाध्याय ने कहा…

पढ़कर अच्छा लगा।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

सहीए है

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कहा है, बयान नहीं, बनियाइन है। रोचक सूत्र..

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