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मंगलवार, 16 जुलाई 2013

कर का मनका डाल कर ... मन का मनका फेर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
 
एक छोटा बच्चा था ... बहुत ही नेक और होशियार ... पढ़ने में भी काफी तेज था ... एक दिन वो मंदिर में गया ।

मंदिर के अन्दर सभी भक्तो भगवान के दर्शन कर रहे थे और मंत्र बोल रहे थे । कुछ भक्त स्तुतिगान भी कर रहे थे । कुछ भक्त संस्कृत के काफी मुश्किल श्लोक भी बोल रहे थे।
लड़के ने कुछ देर यह सब देखा और उसके चहेरे पर मायूसी छा गयी । क्योंकि उसे यह सब भजन या मंत्र नहीं आते थे ।
वो कुछ देर वहाँ खड़ा रहा और कुछ उपाय खोजने लगा ।
कुछ पल में ही लड़के के चहेरे पर मुस्कराहट छा गयी । उसने अपनी आँखे बंद की , अपने दोनों हाथ जोड़े और दस बार A-B-C-D बोलने लगा।
मंदिर के पुजारी ने यह देखा उसने लड़के से पूछा कि "बेटे तुम यह क्या कर रहे हो , लड़के ने पूरी बात बताई ।"
पुजारी ने कहा कि ” बेटे भगवान की इस तरह से पूजा नहीं की जा सकती, तुम तो A-B-C-D बोल रहे हो ।”
लड़के ने उत्तर दिया कि ” मुझे प्रार्थना , मंत्र , भजन नहीं आते . मुझे सिर्फ A-B-C-D ही आती है . प्रार्थना , मंत्र ,भजन यह सब A-B-C-D से ही बनते है । मैं दस बार A-B-C-D बोल गया हूँ । यह सब शब्द में से भगवान अपने लिए खुद प्रार्थना , मंत्र , भजन बना लेंगे । "
 
लड़के की बात सुनकर पुजारी जी चुप हो गए । उनको अपनी भूल का एहसास हो गया । उन्होंने बच्चें को बहुत सारा प्रसाद दिया और एक प्रार्थना सिखा दी ।

बोध – सीख
 
प्रार्थना हदय को साफ और निर्मल करती है ..
शब्दों का महत्व नहीं है – भाव का महत्व है ..
नेक दिल से की हुई प्रार्थना भगवान तक जरूर पहुचती है ..
प्रार्थना के अन्दर जब भाव मिल जाता है तो भगवान के दर्शन जरूर होते हैं।

सादर आपका 
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प्रिंटर जो समा जाए आपकी पॉकेट में

प्रिंटर का पहला मॉडल बनाते समय विशेषज्ञों ने भी नहीं सोचा होगा कि तकनीक हमें इतनी आगे ले जाएगी कि इसे जेब में रखा जा सकेगा। जी हां एलजी ने अब ऐसा फोटो प्रिंटर लांच किया है जो आसानी से जेब में रखा जा सकता है। एलजी कंपनी ने अपने इस गैजेट से प्रिंट करना इतना आसान बना दिया है कि मात्र 15 सेकेंड में आप प्रिंट ले सकते हैं। ये फोटो प्रिंट करने में आपकी सोच से भी ज्यादा आसान है। इसे ब्लूटूथ और एनएफसी (नीयर फिल्ड टेक्नोलॉजी) के जरिए भी कनेक्ट किया जा सकता है। इसको लाना ले जाना जितना आसान है उतना ही इसे अफोर्ड करना भी। कंपनी ने इसकी कीमत मात्र 13500 रखी है। आप सोच रहे होंगे इसमें इस्... more »

सत्यं शिवं सुन्दरम

डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' at नीड़ का निर्माण फिर-फिर...
बहुत पहले मैंने एक फ़िल्म देखी थी ‘मेरी सूरत, तेरी आँखें’। इस फ़िल्म ने मेरे मन पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा और सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या तन की सुन्दरता इतनी आवश्यक होती है, जिसके ना होने पर अपने साथ छोड़ जाते हैं। और मन की सुन्दरता ? क्या वह आवश्यक नहीं ? एक कहावत हम सब ने सुनी होगी कि ‘सुन्दरता देखने वाले की आँखों में होती है’। पर ये शायद कुछ ही लोगों का सच है। वरना ज्यादातर लोगों के लिए वही सुन्दर होता है, जो वास्त्विक रूप में आकर्षक है। पर क्या इस सुन्दरता और आकर्षण का वास्तविक रूप में वही मूल्य है, जो हम आँकते हैं ? क्या मानवीय गुण और आत्मिक सुन्दरता कहीं ज्यादा मूल्यवान नहीं ... more »

सुख -दुःख

कालीपद प्रसाद at मेरे विचार मेरी अनुभूति
दिन के उजाला में लोग भूल जाते है काली रात को काली रात फिर आएगी ,तुम याद रखकर तो देखो। रौशनी के आने पर ,तम भाग जाता है गम को भुलाकर एकबार, हंसकर तो देखो। तुम को दुखी देखकर ,दुखी है अपने सारे उनके दुःख का भी एहसास, करके तो देखो। चाहत अनंत है ,हर चाहत पूरी नहीं होती यकीन न हो तो दोस्तों से पूछकर तो देखो। शरीर का घाव अपने आप भर जायेगा जरा अंतर्मन का घाव को ,भुलाकर तो देखो। दुनियाँ रंगीन है , गम के साथ खुशियाँ है बेसुमार जरा गम के दुनियाँ से बाहर, आकर तो देखो। इस जिंदगी में न कोई सदा दुखी, न कोई सदा सुखी दुःख से ही सुख का एहसास है , सोचकर तो देखो।  more »

बेटी के जन्मदिन पर

poonam at anubuthi
प्यारी मानसी , आज से ठीक इक्कीस वर्ष पूर्व तुमने हमारे जीवन को महकाया था , तुम्हारे आने की खुशी मे घर का हर सदस्य हर्षाया था , याद है आज भी मुझे वह तेरा पहला दीदार , मूँदीं पलकें , बंधी मुट्ठी ,लंबी अलकें, उजला चाँद सा रूप , चाँदनी सी मुस्कान , तेरे पहले क्रंदन मे भी थी एक मिठास , आज पूरे इक्कीस वर्ष की नन्ही सी मेरी जान , जीवन के इस मोड पर मेरी बस यही दुआ , मिले हर सुख जीवन मे न टूटे कोई अरमान , जादू की कोई छड़ी तो नहीं मेरे पास , जिसे फिरा तेरे सिर हर लूँ हर संताप , मेरा मान है तू , मेरा अभिमान है तू , तेरे भीतर बसे मेरे प्राण ..... !! शुभ आशीष माँ

मारकंडेय काटजू बोले तो निर्मल बाबा !

महेन्द्र श्रीवास्तव at आधा सच...
मैं आज बात करूंगा भारतीय प्रेस परिषद के चेयरमैन पूर्व जस्टिस मारकंडेय काटजू की। मेरी नजर में मारकंडेय काटजू बोले तो समझिए निर्मल बाबा ! जिस तरह से निर्मल बाबा के पास हर समस्या का समाधान है, कुछ इसी तरह का व्यवहार कर रहे हैं आजकल काटजू साहब। हालाकि उनके पास समस्या का कोई समाधान नहीं है, बस एक उंगली जो हर मसले पर करते रहते हैं। पहली नजर में तो यही लगता है कि दोनों प्रचार के भूखे हैं, दोनों को लगता है कि वो बहुत जानकार हैं, दोनों को लगता है कि उनकी बातों को अगर देशवासी माने तो वो तरक्की कर सकते हैं। आपको बता दूं कि दोनों में अंतर भी बहुत मामूली है। जानते हैं क्या ? एक टीवी

जोहांसबर्ग में टॉल्सटाय फार्म की स्थापना

मनोज कुमार at मनोज
*गांधी और गांधीवाद-**1**51* *1909* *जोहांसबर्ग में टॉल्सटाय फार्म की स्थापना* लंदन से गंधी जी *1909* के अंत तक वापस आ गए। वहां का उनका राजनीतिक उद्देश्य पूरा नहीं हुआ था। ब्रिटिश सरकार ने दक्षिण अफ़्रीका उपनिवेश की नीति को रोकने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर दी थी। दक्षिण अफ़्रिका वापस आने पर एक परीक्षा की घड़ी उनके सामने थी। उन्हें अब लगने लगा था कि धीमे पड़ चुके सत्याग्रह को तेज़ करना होगा। इसके लिए स्वैच्छिक त्याग करने वाले सत्याग्रहियों को उन्हें एकजुट रखना था। सत्याग्रही को बलिदान देने योग्य होने के लिए सादगी, शुद्धि, संयम और अनुशासन अपनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। इसके साथ ह... more »

महान कैलाश पर्वत

प्रवीण कुमार गुप्ता at हिन्दू हिंदी हिन्दुस्थान
कैलाश पर्वत .......दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत, अप्राकृतिक शक्तियों का भण्डारक एक्सिस मुंडी को ब्रह्मांड का केंद्र, दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव के रूप में, यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है जहाँ चारों दिशाएं मिल जाती हैं। और यह नाम, असली और महान, दुनिया के सबसे पवित्र और सबसे रहस्यमय पहाड़ों में से एक कैलाश पर्वत से सम्बंधित हैं। एक्सिस मुंडी वह स्थान है अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं रूसिया के वैज्ञानिक ने वह स्थान कैलाश पर्वत बताया है। भूगोल और पौराणिक रूप से कैलाश पर्वत महत्वपूर्ण भूमिका निभात... more »

एमिली डिकिन्सन की कविता

मनोज पटेल at पढ़ते-पढ़ते
*एमिली डिकिन्सन की एक और कविता... * * * *तुम बुझा नहीं सकते हो आग को : एमिली डिकिन्सन * (अनुवाद : मनोज पटेल) तुम बुझा नहीं सकते आग को जला सकने वाली कोई चीज बुझ सकती है खुद से ही, बिना किसी पंखे के सबसे धीमी रात को भी. ज्वार को लपेट कर तुम रख नहीं सकते किसी दराज में क्योंकि हवाओं को पता चल जाएगा उसका और वे बता देंगी तुम्हारे देवदार फर्श को. :: :: ::

धर्म क्या है ?

प्राचीन समृद्ध भारत at ॥ भारत-भारती वैभवं ॥
दोस्तों आज दुनिया में धर्म की काफी वैराईटी आ गयी है । आज ईसाईयत , इस्लाम , बोद्ध, जैन तथा हिन्दू ....... आदि सभी को धर्म कहा जा रहा है यही कारण है की आज लोग धर्म के नाम पर कुत्तों की तरह लड़ रहे है । आज हम इसी की पड़ताल करेंगे और साथ में वैदिक विद्वान पं० महेंद्र पाल आर्य जी की भी सहायता लेंगे । धर्म का स्पष्ट शब्दों में अर्थ है : धारण करने योग्य आचरण । अर्थात सही और गलत की पहचान । इसी कारण जब से धरती पर मनुष्य है तभी से धरती पर धर्म / ज्ञान होना आवश्यक है । अन्यथा धर्म विहीन मनुष्य पशुतुल्य है । ज्ञात हो लगभग १००० ईसापूर्व तक धरती पर ये सभी दुकाने नही थी केवल  more »

राजनैतिक निशाने साधनें का खेल देश पर भारी नहीं पड़ जाए !!

पूरण खण्डेलवाल at शंखनाद
इशरत जहाँ मामले को लेकर जिस तरह से देश की दो सर्वोच्च एजेंशियाँ आमने सामने है और अब जो ख़बरें सामने आ रही है वो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक स्थति की और इशारा कर रही है ! अब ख़बरें ऐसी आ रही है कि अपनें चार अधिकारियों को बेवजह फंसाने को लेकर कुपित आईबी अधिकारियों नें अपना काम सिमित कर दिया है ! अगर सच यही है तो यही कहा जा सकता है कि सरकार नें आंतरिक सुरक्षा को रामभरोसे छोड़ दिया है ! आईबी के निदेशक आसिफ इब्राहिम नें प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के यहाँ लिखित आपति जताते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी ! लेकिन उनकी किसी नें नहीं सुनी और इतना ही  more »

मेरी सोच,मेरा चिंतन

Anju (Anu) Chaudhary at अपनों का साथ
कुछ ऐसे वचन जो हर किसी पर लागूं होते हैं अगर कोई उसे दिल से माने तो ...बस ऐसे ही पढ़ते पढ़ते कुछ वचन मेरे हाथ भी लेगे...तो सोचा कि चलो इसे अपने ब्लॉग पर सबके साथ साँझा करके हमेशा के लिए अपने पास सुरक्षित रख लिए जाए, ताकि जब मन करे इसे आसानी से पढ़ा जा सके || (1) *माचिस की तीली का सिर होता है,पर दिमाग नहीं,इसलिए वह थोड़े से घर्षण से जल उठती है| हमारे पास सिर भी और दिमाग भी,फिर भी हम छोटी-सी बात पर उत्तेजित क्यों हो जाते हैं?* बात बहुत छोटी सी है पर इसके अपने बहुत गहरे अर्थ है ...अगर मैंने ये कहूँ की हर किसी को जीवन में बहुत बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है|मैंने अपनी इस लाइ
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

14 टिप्पणियाँ:

expression ने कहा…

बहुत प्यारी कहानी.....
हम तो अब तक सीधे सरल शब्दों में प्रार्थना करते हैं...श्लोक कभी रटे नहीं गए...भगवान् के आगे वैसे शब्दों की भी क्या आवश्यकता है बताओ??
लिंक्स अब पढ़ते हैं सारे...
शुक्रिया शिवम्..

सस्नेह
अनु

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बढिया लिंक्स, अच्छा बुलेटिन
मुझे स्थान देने के लिए आभार

shikha varshney ने कहा…

बिलकुल भाव का ही महत्व है.
बढ़िया बुलेटिन.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बेहतरीन चर्चा.

रामराम.

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

अच्छे सूत्रों का समावेश किया है !!.
आभार !!

मनोज पटेल ने कहा…

धन्यवाद शिवम जी!!

Anupama Tripathi ने कहा…

सार्थक संदेश और उत्तम लिंक्स ...शिवम भाई ...!!

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर लिंक सयोजन

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा लिंकों के साथ सुंदर प्रस्तुति,,,

RECENT POST : अभी भी आशा है,

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

क्या बात क्या रचना लिखी आपने | बहुत सुन्दर बुलेटिन सजाया भाई | जय हो |

Darshan Jangara ने कहा…

बहुत उम्दा लिंकों के साथ सुंदर प्रस्तुति,
मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए आभार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर संकलित सूत्र...

HARSHVARDHAN ने कहा…

सुन्दर और ज्ञानपरक बुलेटिन है। बधाई हो!!

नये लेख : "भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक" पर जारी 5 रुपये का सिक्का मिल ही गया!!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप का बहुत बहुत आभार !

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