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शनिवार, 4 मई 2013

एक की ख़ुशी से दूसरा परेशान - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !


एक बार नारद जी ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा, 
"प्रभु, इस दुनिया में सब के सब दुखी क्यों हैं?"
 श्री कृष्ण जी बोले, 
"खुशियाँ तो सबके पास हैं, बस एक की ख़ुशी से दूसरा परेशान है।"

सादर आपका 

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भटक गये...

गिरिजेश राव at एक आलसी का चिठ्ठा
गेट नम्बर चार। यादव के हाथों में अभिषेक के लिये पानी मिले दूध का गिलास, रक्त कमल, मिश्री, अकउवा पुष्पमाला... मन में भोर का प्रेम उमड़ आया है - मनु का कल्पना लोक। यादव को हतप्रभ करते हुये उसने कमल को सूँघा है। वही दूध सनी भूमा गन्ध! केशों में खिंचाव, तीखी पीड़ा, पोखरे के पानी में डूबता मनु - उसे कमल चाहिये... माँ देख लेगी तो, कमल को दूध के बर्तन में छिपा दिया है। दूध फट जायेगा...आश्चर्य ... मनु, यह मेरे लिये! इससे दूध की गन्ध क्यों आती है? बच्चे प्रिय हैं न तुम्हें ...ललछौंहे, श्याम, गौर ढेर से बच्चे, कमल फूल से बच्चे... बच्चे, दूध, माँ ...क्या कहता है अतनु? ... ... फुलवा ... more »

बेसिक्स ऑफ ई मेल पासवर्ड

Munish Lehri at Kuch Khas Khabar
पासवर्ड बनाने का मौका आया तो आपने झट से डाल दिया 'Munishgarg' जो आपके बेटे का नाम है, क्योंकि उसमें अंक भी होने चाहिए तो आपने लिख दिया 'Munishgarg1985' जो Munishgarg के जन्म का साल है। लेकिन क्या यह ऐसा पासवर्ड है जिसके भरोसे पर आप अपने पर्सनल डाक्यूमेंट और मैसेज की सेफ्टी को लेकर बेफ्रिक हो सकें? कोई दोस्त अनुमान लगाने बैठेगा तो आठ-दस प्रयास के बाद इसका पता लगा ही लेगा! खुद अपना, अपने पार्टनर, बच्चों आदि के नाम या गाड़ी, टेलीफोन के नंबर, जन्म के साल आदि को पासवर्ड बनाना बिना पासवर्ड के काम चलाने जैसा ही है। यही बात '12345' 'ABCDE' 'XYD' जैसे पासवर्ड पर भी लागू होती है। अपने कंप्य... more »

गली आगे मुड़ती है.....

देवेन्द्र पाण्डेय at चित्रों का आनंद
इन्हीं गलियों में भटकते हुए शिवप्रसाद सिंह ने लिखा...गली आगे मुड़ती है। इन्हीं गलियों रहते थे भारतेंदु हरिश्चंद्र। सामने है भारतेंदु भवन।

समलैंगिकता की चीड़फाड़

VICHAAR SHOONYA at विचार शून्य
लगभग डेढ़ वर्ष से मैं भारत भ्रमण पर हूँ। पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण लगभग पूरा भारत नाप चूका हूँ। अपने इस भ्रमण के दौरान पुरे भारत में मुझे जो दो चीजें लगभग सभी जगहे दिखाई पड़ी वो हैं खाने में दक्षिण भारतीय सांभर डोसा और इंसानों में समलैंगिक जोड़े। डोसे का स्वाद मैंने सभी जगहों पर लिया और समलैंगिक जोड़ो को अभी तक सिर्फ निहारा। अभी पिछले हफ्ते चंडीगड़ में था। इस बार एक समलैंगिक से मुलाकात/बातचीत हो ही गयी जो अपने पार्टनर के साथ संयोग से गेस्ट हॉउस में मेरे बगल के कमरे में ठहरा हुआ था। समलैंगिकता को लेकर कुछ प्रश्न मेरे मन में हमेशा रहे हैं जो मैंने उस जीव के सामने रखे ... more »

व्यंग्य: पुलिस पिटने के लिए है

सुमित प्रताप सिंह  at सादर ब्लॉगस्ते!
कल मोनू रास्ते में मिला और मुझसे पूछा, कि भैया पुलिस में भर्ती होना चाहता हूँ। मैंने कहा अच्छी बात है तैयारी करो। उसने पूछा कि पुलिस में भर्ती होने के लिए क्या-क्या करना पड़ेगा? मैंने उससे बोला कि वह इस बारे में अपने पिता से क्यों नहीं पूछते, तो वह बोला, “पिता जी से पूछा था, लेकिन उन्होंने कहा कि वह खुद ही पुलिस की नौकरी से तंग आ चुके हैं और अब वह नहीं चाहते, कि उनका बेटा इस नौकरी में जाए, लेकिन मैं पुलिस में भर्ती होने का इच्छुक हूँ।आपसे निवेदन है, कि मुझे इसकी तैयारी का उपाय बताएँ।” मैंने कहा कि पहले तो भर्ती निकलने पर फॉर्म भरो, फिर टेस्ट की तैयारी के लिए दौड़ का अभ्यास करो, ल... more »

" वक़्त के होंठो पर एक प्रेम गीत "

Neelima at Rhythm
पेशे से व्यवसायी परन्तु मन से कवि दीपक अरोरा जी का कविता संग्रह " वक़्त के होंठो पर एक प्रेम गीत " मेरे हाथो मैं हैं इसको पढना अपने आप में सुखद अनुभूति हैं प्रेम के भिन्न रूपों पर कविता लिखना और कविता को भीतर से जीना अलग अलग अहसास हैं और इन अहसासों को महसूस किया जा सकता हैं दीपक अरोरा जी की पुस्तक " वक़्त के होंठो पर एक प्रेम गीत " में । हर कविता एक अलग फ्लेवर में पर प्रेम रस से भीगी हुइ बहुत ही अन्दर तक असर करती हैं " प्रेम की और तुम्हारा बार बार लौटना " या " जिस दिन हम मिले , तुम देखना / मेरी कलाई की खरोंचो और पीठ पर उभर आये को... more »

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर -- संजय भास्कर

संजय भास्‍कर at शब्दों की मुस्कुराहट
*( चित्र - गूगल से साभार )* फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर यह वह शहर नहीं रहा अब जिस शहर में '' मैं कई वर्षो पहले आया था '' अब तो यह शहर हर समय भागता नजर आता है ! कच्ची सड़के ,कच्चे मकानों और साधन के नाम पर पर साईकल पर चलने वाले लोग रहते है अब आलिशान घरों में और दौड़ते है तेजी से कारों में नए आसमान की तलाश में फ्लाईओवर के आर- पार मोटरसाइकल कारों पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर पहुच गया है नई सदी में मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में बहुत तेजी से बदल रहा है ..........छोटा सा शहर !!! @ संजय भास्कर

जब पहली बार हमें एक अपराधी जैसा होना महसूस हुआ -- ऐ विजिट टू दिल्ली एयरपोर्ट।

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन
एक समय था जब दिल्ली एयरपोर्ट तभी जाना होता था जब *कनाडा* में रहने वाले हमारे मित्र साल दो साल में एक बार दिल्ली आते थे। उन्हें लेने जाते तो आधी रात तक बेसब्री से इंतजार करते। ट्रॉली पर सामान लादे दोनों हाथों से ट्रॉली धकाते हुए जब वे सामने आते तो पहचान कर चेहरे पर जैसे एक विजयी मुस्कान फ़ैल जाती। इसी तरह विदेश जाते समय सभी दोस्त और रिश्तेदार मिलकर उन्हें विदा करने जाते। इस अवसर पर सब प्रस्थान क्षेत्र में बने रेस्तराँ में बैठकर चाय कॉफ़ी का आनंद लेते और बाहर चलते हवाई ज़हाज़ों को देखकर रोमांचित होते। उन दिनों प्रस्थान टर्मिनल का नज़ारा भी बड़ा दिलचस्प होता था। अक्सर* पंजाब*से लोग दल ... more »

दैवीय आपदा.......

विवेक सिंह at स्वप्नलोक
देवताओं के दाढ़ी और मूँछें नहीं होती थीं । वे हमसे ताकतवर थे । उनको युद्ध में हराना मुश्किल था लेकिन असंभव नहीं । रावण के डर से वे थरथर काँपते थे । ... उनके असुरों के साथ युद्ध होते रहते थे । हमारे ऊपर उनकी कृपा बनी रहती थी क्योंकि हम देवताओं और असुरों के बीच बफर स्टेट थे । देवता लोग हमें उल्लू बनाते रहते थे कि हमारे यहाँ वर्षा वे ही कराते हैं और उनकी ही आज्ञा से हमारे यहाँ धूप निकलती है आदि । यहाँ तक कि उन्होंने अपने नाम भी सूर्य, चंद्रमाँ आदि रख लिए थे । अपने प्रभावशाली लोगों को वे भगवान बताते थे । हमारे यहाँ कोई प्रभावशाली व्यक्ति पैदा होने पर वे उसे उन्हीं का अवतार बताकर उसे... more »

शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान की २१४ वीं पुण्यतिथि

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान को सलाम !!* *भारत माता के इस 'शेर' को उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन !*

आर्थिक राष्ट्रवाद जरुरी है

अरुण चन्द्र रॉय at सरोकार
* चीन लद्दाख में डेरा जमाये बैठा है. जब रक्षामंत्री प्रधान मंत्री के पास गए होंगे कि सेना को आदेश दीजिये कि चीन के साथ सख्ती दिखाएँ तो उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा होगा. वित्त मंत्री जी के पास देश भर से व्यापारियों के फोन आये होंगे कि माई बाप, चीन के माल के बिना न तो प्लांट चलेंगे न खुदरा बाज़ार, न कपडा बाज़ार की रौनक रहेगी न इलेक्ट्रोनिक बाज़ार की . देश के अर्थव्यवस्था के लगभग दस प्रतिशत हिस्से पर चीन का परोक्ष कब्ज़ा है. हम चीन से लगभग 44 मिलियन यु एस डालर का माल आयात करते हैं और निर्यात केवल 15 मिलियन यु एस डालर। जिस देश में तमाम मन्युफेक्चारिंग गतिविधिया बंद हो गई हो चीन से इम्पोर्ट... more »
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

12 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

काफी तेज चैनल है आपका! ...आभार।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बिलकुल सही कहा कृष्ण जी ने शिवम् भाई ....... कहते सब हैं हम अकेले हो गए,पर परेशानी की जड़ से मुक्त नहीं होते :)
बढ़िया बुलेटिन

vibha rani Shrivastava ने कहा…

शेर - ए - मैसूर टीपू सुल्तान को सलाम !!
भारत माता के इस 'शेर' को उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन !

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुन्दर सार्थक बात से की बुलेटिन की शुरुआत शिवम भाई ....!!
बढ़िया बुलेटिन .....!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच ही है, बस प्रसन्न होना ही सीखना है।

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर लिंकों के लिए आभार !!

संजय भास्‍कर ने कहा…

टीपू सुल्तान को सलाम !!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

नारद श्री कृष्ण संवाद -- सही बात।
बढ़िया बुलेटिन।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

behtareen links..

vandana gupta ने कहा…

सार्थक बुलेटिन

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

संजय भास्‍कर ने कहा…

बेहद उम्दा .........मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..!!!

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