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बुधवार, 3 अप्रैल 2013

इंडिया बनाम भारत.. ब्लॉग बुलेटिन



इंडिया बनाम भारत.... बहुत दिनों से बहस चल निकली है की आखिर भारत और इंडिया में इतना अन्तर क्यों है। नज़र उठा भर के देखिए, एक वर्ग ऐसा है जिसके पास आजीविका के लिए भी गुजारा नहीं है और एक वर्ग ऐसा है जो चकाचौंध से भरी जीवन में असल भारत के दुःख और दर्द की कल्पना भी नहीं कर पाता। आखिर एक ही देश में इतना अन्तर कैसे? आज से आई पी एल शुरु हो गया, या फ़िर यूं कहिए की इंडिया में हलचल शुरु हो गई है... पैसा पानी की तरह बहानें और पार्टी के नाम पर सब कुछ लुटानें को बाज़ार तैयार हो गया.. और वहीं दूसरी तरफ़ कर्ज़ से मरता किसान और पानी न होनें से सूखती फ़सल और बंजर पडी ज़मीन को देखकर दुखी किसान। आखिर कैसे कहा जा सकता है कि यह स्थिति एक कॄषि प्रधान देश की हो सकती है। 

आईए एक नज़र डालते हैं हकीकत पर.. 



Poverty Index (Bad states in dark red)

यह क्षेत्रवार व्यौरा देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है की भारत की कितनी बुरी हालत है और हम कितने अनजान हैं असली तस्वीर से। महाराष्ट्र की बुरी हालत देखकर स्थिति और भी डरावनी लगती है क्योंकी मुम्बई को यदि निकाल दे तो फ़िर शेष महाराष्ट्र की हालत शायद बिहार और उडीसा से भी बदतर होगी।  विदर्भ के किसान जो आत्म-हत्या करनें पर मजबूर हो जा रहे हैं शायद वह किसी राजनीतिक दल के वोटर नहीं हैं सो उनकी सुधि लेनें वाला कोई न होगा। पिछले दिनों खबर आई की वानखेडे और सहारा स्टेडियम की घास को खेलनें योग्य बनाए रखनें के लिए पांच करोड का पानी बहा दिया जाएगा, सुन कर बडा दुख हुआ क्योंकी मैं स्वयं मुम्बई में पानी की किल्लत से परेशान हूं और हमारे यहां केवल एक ही समय पानी आ रहा है।  झुग्गी और झोपडे में रहनें वाले आम मुम्बईकर की दिक्कत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं होगा। आखिर पानी बहानें की क्या ज़रूरत है... आम आदमी की मूलभूत सुविधा को तो बनाए रखिए.... किसान के बारे में सोचिए कोई दूरगामी विचार योजना बनाईए और समस्या के समाधान तलाशिए। जब पूरा भारत त्राहि माम कर रहा है ऐसे में बरबादी को रोकना और इंडिया की जरूरत के लिए भारत का दोहन बन्द कीजिए।  

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चलिए अब आज के बुलेटिन की ओर चला जाए
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विज्ञानं के क्षेत्र में भारत और India का अंतर: राजीव दीक्षित

वो जो सांवला सा रास्ता था

तेरे लिए रिदा हूँ मैं, और तेरी ही 'अदा' हूँ....

आईपीएल तो हैडर स्‍पेस खा गई

उम्र की शाख...

मूर्ख दिवस तो एक बहाना है ....

प्रेम का मौसम, इश्क का दरिया , मोहब्बत का जुनून !!!

वह मुस्कराती मुसहर बच्ची

फील्ड मार्शल सैम 'बहादुर' मानेकशॉ ज़िंदाबाद

होनहार बच्चे और उनके माता - पिता जरा ध्यान दीजिये . ... आपकी खुशियों का सवाल है ....>>> संजय कुमार

छत्तीसगढ यात्रा- विश्वामित्र आश्रम और कर्क ऋषि आश्रम


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आशा है आपको आज का बुलेटिन पसन्द आया होगा.. आप बुलेटिन का आनन्द लीजिए और हम कल फ़िर मिलेंगे एक नए विचार के साथ.... 

जय हिन्द
देव

9 टिप्पणियाँ:

shikha varshney ने कहा…

कमाल का देश है अपना ..
बढ़िया बुलेटिन.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इंडिया बनाम भारत - यह बहस कभी बंद नहीं होने वाली ... बढ़िया बुलेटिन देव बाबू !

vandana gupta ने कहा…

बहुत बढिया लिंक्स सहेजे हैंl।

रश्मि शर्मा ने कहा…

बढ़ि‍या बुलेटि‍न..मेरी रचना शामि‍ल करने के लि‍ए आभार..

Suman ने कहा…

मै खुद एक गाँव से हूँ, किसानों की हालत मुझसे बेहतर कौन जान सकता है भला ?
किसान को कभी खेती का राजा कहा जाता था वह यूँही नहीं कहा जाता था उसके पास खुद की जमीन तो थी ही खाद, बीज अपने थे और उपरसे मेघ राज भी मेहरबान था लेकिन आज पूरी तरह से सरकार पर निर्भर होकर कर्ज में डूबा किसान आत्महत्या नहीं करेगा तो और क्या करेगा ? कृषि प्रधान हमारा देश अब नाम मात्र का रह गया है किसान शहर की और पलायन कर रहे है जो भी बची खुची जमीन बेचकर ! किसानों को खेती संबंधी बढावा देने के लिए कोई खास योजना सरकार के पास नहीं दिखाई देती ..!
आभार मुझे जगह देने के लिए !

स्वप्न मञ्जूषा ने कहा…

वैसे तो काफी देर हो ही चुकी है फिर भी, पानी की समस्या पर सरकार ने अगर अब भी ध्यान नहीं दिया तो 2025 से भारत में पानी के लिए लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जायेंगे। पानी के मामले में भारत की स्थिति सबसे खराब है। अन्य देशो में भी पानी की किल्लत होने वाली है, लेकिन भारत अपनी जनसँख्या की वजह से, भयावह स्थिति में आने वाला है।
बुलेटिन हमेशा की तरह शानदार रही।
धन्यवाद !

स्वप्न मञ्जूषा ने कहा…

हर हाल में पानी बचाने की कोशिश कीजिये, पानी का दुरूपयोग अपराध है।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

वर्तमान व्यवस्था में गरीब और गरीब होते जाने के लिये अभिषप्त है और अमीर वर्ग के लिये तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बुद्धि खोलते तथ्य, सुन्दर सूत्र।

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