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रविवार, 28 अप्रैल 2013

इंडियन होम रूल मूवमेंट


प्रणाम मित्रों, 
आज २८ अप्रैल एक महत्त्वपूर्ण दिवस है | इस तारीख का महत्त्व आज आपके सामने लाते हैं । 

अखिल भारतीय होम रूल लीग, एक राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन था जिसकी स्थापना १९१६ में स्व. बाल गंगाधर तिलक द्वारा भारत में स्वशासन के लिए राष्ट्रीय मांग का नेतृत्व करने के लिए "होम रूल" के नाम के साथ की गई थी | भारत को ब्रिटिश राज में एक डोमिनियन का दर्जा प्राप्त करने के लिए ऐसा किया गया था | उस समय ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और न्यूफ़ाउंडलैंड डोमिनियन के रूप में स्थापित थे |

होम रूल का झंडा 



प्रथम विश्व युद्ध के संदर्भ में
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अधिकांश भारतीयों और भारतीय राजनीतिक नेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध और उन भारतीय सैनकों को जो बर्तानिया सरकार की तरफ से जर्मनी, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य और तुर्क साम्राज्य के खिलाफ लड़ रहे थे को लेकर अपने अपने मत थे | उन्होंने इस युद्ध में लड़ रहे भारतीय सैनिकों को अपनी प्रतिक्रिया में विभाजित किया गया था | उत्तरार्द्ध की भागीदारी भारत के मुसलमानों को सताने की मंशा से की गई थी, जिसमें इस्लाम के खलीफा के रूप में सुल्तान सरगना थे |

बहुत से भारतीय क्रांतिकारियों, युद्ध का विरोध किया और जो नरमपंथी और उदारवादी थे उन्होंने युद्ध का समर्थन किया | इस मुद्दे ने भारत के राजनीतिक दलों को अलग अलग वर्गों विभाजित कर दिया और स्वशासन के मुद्दे के लिए बढ़ती मांग को भड़कती आग की तरह छोड़ दिया है जिसके सुलगने का अभी तक कुछ अतापता नहीं था |

संस्थापक और संस्थापना
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१९१६ से १९१८ के बीच, जब युद्ध खत्म होने की कगार पर था उस समय कुछ प्रमुख भारतीयों जैसे जोसेफ़ बप्तिस्ता, बाल गंगाधर तिलक, जी.एस. खापर्डे, सर एस.सुब्रमनिया आइयर, और थियोसोफिकल सोसाइटी की लीडर एनी बसंत ने आपस में सहमति के साथ समस्त भारत में एक राष्ट्रीय गठबंधन लीग बनाने का फैसला लिया जो के विशेष रूप से भारत के लिए बर्तानिया साम्राज्य के भीतर होम रूल, या स्वशासन की मांग करने के लिए डट कर कड़ी रह सके | बाल गंगाधर तिलक ने पुणे, महाराष्ट्र में पहली लीग की स्थापना की जिसका मुख्यालय दिल्ली में स्तिथ था और इसकी गतिविधियों के प्रमुख शहर थे मुंबई, कलकत्ता और मद्रास |

यह कदम उस समय काफी चर्चा में रहा और भारतीयों के बीच काफी उत्तेजना भी उठता रहा | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बहुत से सदस्य और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कई सदस्यों जो १९१६ के लखनऊ पैक्ट के समय से सम्बंधित थे, को इस विचार ने आकर्षित किया | लीग के बड़े नेताओं ने उग्र भाषण दिए | सैकड़ों और हजारों भारतीयों के हस्ताक्षर की हुई याचिकाएं ब्रिटिश अधिकारियों को सौंपी गईं | मुस्लिम लीग और इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच उदारवादियों और कट्टरपंथियों के साथ ही एकता का एकीकरण श्रीमती एनी बेसेंट की एक उल्लेखनीय उपलब्धि थी. बाद में १९१७ में ऐनी बेसेंट को सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और यह आन्दोलन भारत के दूरदराज़ गावों तक फैल गया और अपना प्रभाव बनाने लगा | लीग ने राजनीतिक जागरूकता फैलाने के लिए सिंध, पंजाब, गुजरात, संयुक्त प्रांत, बिहार, उड़ीसा और साथ ही मद्रास और दुसरे सभी राज्यों को एक सक्रिय राजनीतिक आंदोलन के लिए उठ खड़ा किया और सभी एक जुट हो कर नए क्षेत्रों में राजनीतिक जागरूकता फैलाने में शामिल हो गए |

कांग्रेस से अंतर
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लीग ने कॉलेज के छात्रों, शिक्षित भारतीयों और शहरों में लोगों को दिलों में भड़कती आग, उत्साह, उत्सुकता और उनकी प्रतिक्रियाओं से, ब्रिटिश सरकार को यह दिखने का प्रयास किया के भारत की जनता इस मुद्दे को लेकर कितनी सतर्क और प्रभावित है | हालाँकि इतनी जागरूकता के और इस मुद्दे के प्रति ब्रिटिश सरकार के थोड़े बहुत उत्साह के बावाजूद यह मतभेद और विभाजित सोच हमेशा बनी रही के अपनी विचारधारा को व्यक्त करने के लिए सार्वजानिक प्रदर्शनों, या सहमति और समझौते के साथ विधान परिषदों के लिए चुनाव लड़ा जाये जो की वायसराय की रबर स्टांप से ज्यादा आलोचना का कारण था |

इसके आगे का विकास रुक गया, क्योंकि गांधी और उनके सत्याग्रह के अहिंसक तरीके बड़े पैमाने पर आधारित सविनय अवज्ञा:, अन्य गतिविधियों और क्रांति इसका कारण बने | गाँधी की हिन्दू जीवन शैली, व्यव्हार और भारतीय संस्कृति के प्रति उनका लगाव और सम्मान ने भारतीय जनता के दिलों में उनके प्रति आदर जगा दिया और वो जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए | टैक्स विद्रोहों पर ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ चंपारण, बिहार और खेड़ा, गुजरात के किसानों के नेतृत्व में उनकी जीत ने उन्हें एक राष्ट्रीय हीरो बना दिया.

गांधी के समझ लिया था के असली भारत ९००,००० गांवों में बस्ता है, मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता और मद्रास के शहरों में नहीं | भारतीय लोगों में अधिकांश गरीब अनपढ़ और किसान थे ना की पश्चिमी शिक्षित वकील |

विघटन
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१९२० में, अखिल भारतीय होम रूल लीग ने गांधी को इसके अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया | एक वर्ष में ये संगठन एक संयुक्त भारतीय राजनीतिक मोर्चे के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय हो गया और इसका स्वयं का अस्तित्व खत्म हो गया |

आज की कड़ियाँ 


























आशा करता हूँ आज का बुलेटिन पसंद आएगा । धन्यवाद् 
तुषार राज रस्तोगी 

जय बजरंगबली महाराज | हर हर महादेव शंभू  | जय श्री राम 

11 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

फिर सांकल बजी .... कई बेहतरीन लिंक्स मिले

Sadhana Vaid ने कहा…

तुषार जी हृदय से आभारी हूँ कि आपने 'स्वीकृति' रचना को इस बुलेटिन में स्थान दिया ! इस ब्लॉग पर सारी रचनाएं मेरी स्वर्गीय माँ श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना 'किरण' जी द्वारा रचित हैं ! रचना कार के स्थान पर आप यदि उनका नाम देंगे तो बहुत आभारी रहूँगी ! वे 'किरण' के नाम से लिखती थीं ! आज के सभी सूत्र बहुत आकर्षक हैं ! कष्ट देने के लिये क्षमाप्रार्थी हूँ !

Rajput ने कहा…

बहुत लाजवाब जानकारी मुहैया करवाई आपने। सभी लिंक्स दो अभी नहीं देख पाया लेकिन जीतने देखे वो बहुत अच्छे हैं

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आज इस बुलेटिन के माध्यम से बेहद उम्दा जानकारी दी आपने तुषार भाई ... जय हो !

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

साधना जी रचना में नाम बदल दिया है | इश्वर आपकी माताजी की आत्मा को शांति प्रदान करें |

शिवम् भाई जय हो |

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

sabhi links behatar lagi ............

Rajendra Kumar ने कहा…

बेहतरीन लिंकों के साथ सार्थक आलेख भी सराहनीय है,आभार.

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

बेहतरीन लिंकों का समावेश !!

Madan Mohan Saxena ने कहा…

nice links

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर सूत्र..

Anurag Sharma ने कहा…

धन्यवाद तुषार!

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