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रविवार, 10 मार्च 2013

गर्मी आ गई... ब्‍लॉग बुलेटिन

मित्रों, आज कल कितनी गर्मी पडनें लगी है, मार्च महिने से ही गर्मी के इस रूप से अंदाज़ा लगा सकते हैं की आगे क्या हाल होनें वाला है। इस गर्मी में हमारी हालत न बिगडे उसके लिए अभी से थोडी तैयारी करना ही समझदारी होगी।



लू से बचें


गर्मियों में यदि आप बाहर निकलते हैं तो लू लगना एक आम बात है,  इसकी सबसे बड़ी वजह है शरीर में पानी की कमी होना। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और अपनें शरीर को सीधे धूप से बचाएं। हो सके तो सन-ग्लासेस लगाएं और सर पर टोपी लगाएं। गर्म हवाओं से बचें। 

कुछ घरेलू उपाय:

  • गर्मियों में कच्चे आम का शर्बत पन्ना  पीना चाहिए। यह लू से बचानें का एक रामबाण तरीका है
  • यदि घर से बाहर निकलना ही है तो फ़िर एक पानी की बोतल ले कर चलें, एक एक घूंट पानी पीते चलें और शरीर में पानी की कमी न होनें दे
  • छाता लेकर चलें, कभी कभी यह सम्भव नहीं होता लेकिन प्रयास करें
  • सलाद की मात्रा बढाएं, कच्चा प्याज़, खीरा और ककडी बहुत फ़ायदे मंद हैं
  • लू से बचने के लिए बेल या नींबू का शर्बत भी पीया जा सकता है। यह आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।
  • बाहर से आने के बाद तुरंत पानी नहीं पीएं। जब आपके शरीर का तापमान सामान्य हो जाए तभी पानी पीएं।
  • याद रखें साफ़ और स्वच्छ पानी ही पिएं। 

खान-पान का ध्यान

  • मसालेदार भोजन से परहेज़ करें, भोजन को पचनें दें और जब भूख लगे तभी खाएं
  • भोजन में फ़ाईबर युक्त खाद्य-पदार्थ की मात्रा बढा दें
  • छाछ और दही एक बार अवश्य लें
  • सादा पानी आपको तरोताजा रखनें के लिए अहम है सो पानी पिए और स्वस्थ रहें
  • धनियां और पुदीना भी पेट को ठीक रखते हैं 
  • किसी भी तरह की अपच,अजीर्णता, पित्त की अधिकता, पेट दर्द, गैस में जलजीरा लाभकारी होता है। 
  • खूब खाईए लेकिन पचनें योग्य, तेल और मसाले से परहेज़ कीजिए... 

अपनें शरीर को साफ़ रखें, पसीना घमौरी, खुजली और त्वचा सम्बन्धी रोग उत्पन्न करता है सो बचाव करें... 

याद रखिए सावधानी ही बचाव है। 
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चलिए अब हम अपने बुलेटिन की ओर बढते हैं
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बुरा न मानो होली है ...:):)

स्वप्न मञ्जूषा at काव्य मंजूषा
अविनाश वाचास्पत्ति : बड़े नटखट है नुक्कड़ वाले भईया                               का करें ब्लॉग लिखईया होSS ... रविन्द्र प्रभात : तन मन तेरे रंग रंगूँगा                     साया बना तुझे संग चलूँगा                     सेवा करूँगा, मेवा भी दूँगा                     परिकल्पना तू है साजना SSS  समीर लाल : अभी न जाओ छोड़ कर                   के दिल अभी भरा नहीं                   अभी
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कुछ मेरी कलम से और रंजू......

वन्दना अवस्थी दुबे at अपनी बात...
रंजू की किताब मुझे लगभग बीस दिन पहले मिल गयी थी..... सपरिवार पाठ भी हो गया. लेकिन "कुछ मेरी कलम से’ के बारे में लिखने आज बैठी हूं. उम्मीद है रंजू माफ़ कर देगी ...बल्कि कर ही दिया होगा अपने किसी की किताब मिलने पर मैं उसे बहुत देर तक हाथ में लेकर बैठी रह जाती हूं... बहुत अपना सा अहसास होता है. रंजू की किताब के साथ भी ऐसा ही हुआ कितनी देर तक तो बस कवर ही देखती रही. जब भी कवितायें पढती हूं तो चमत्कृत होती हूं. समझ में ही नहीं आता कि कवि/कवियित्री कैसे इतने गहरे भाव चंद शब्दों में भर देते हैं? रंजू की कवितायें भी चमत्कृत करती हैं. कई कविताएं तो बार-बार पढने का मन करता है, पढी भी हैं. कु...more »

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शिक्षकों की भूमिका और भविष्य की तैयारी...

वृजेश सिंह at बसंत के बिखरे पत्ते 
महान वैज्ञानिक आइंसटाइन नें कहा था कि "कल्पना ज्ञान से भी ज्यादा शक्तिशाली है।" अपने मन की कल्पनाओं को साकार करने की प्रक्रिया में इंसान नें तमाम आविष्कार किए और खूबसूरत चीजों का निर्माण किया। साइकिल का आविष्कार मैकमिलन नें किया, बल्ब का आविष्कार एडीशन नें किया। एक सहज सा सवाल मन में आता है कि उन्होनें यह आविष्कार क्यों किए ? शायद मैकमिलन लोगों के जीवन की रफ्तार को बढ़ाना चाहते थे। मशीन के माध्यम से रफ़्तार को इंसानी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहते थे। एडिशन लोगों की जिंदगी में रौशनी लाना चाहते थे। अपने आविष्कार की सफलता तक पहुंचने के लिए एडीशन नें सैकड़ों असफल प्रयोग किए, लेकिन हार ... more »

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तेरा अहसास....

* * *तुमसे मिलने का वो पहला अहसास* *तुमसे बार-बार मिलने को उकसा गया .....* *तुम्हारी बातों का वो सिलसिला * *मेरी नज़रों में तुम्हे खास बना गया .......* *शुक्रगुजार हूँ उन कायनातों का मैं * *जिसने मुझे तुमसे मिलाया .......* *बेरंग उदास जीवन में मेरे * *प्यार के रंग ले आया* *कुछ अफ़सोस सी थी जिन्दगी .......* *कुछ अधूरे से पलछिन थे .....* *कई जागती रातों में * *कई अधूरे सपने थे ........* *तुमने आकर जैसे * *मौसम की करवट ही बदल दी .......* *खामोश जुबान को मेरे लफ्ज दे दिए-- गुनगुनाने को* *सपनों में रंग भर दिए -- मुस्कुराने को* *अब गुजारिश है उन कायनातों से .......* *दे दुआएँ ऐसी की* *जीवन का य... more »

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यादों के फूल.....

रश्मि शर्मा at रूप-अरूप 
मुझे बेहद पसंद है् पलाश के फूल...जब भी देखती हूं.....बि‍ना पत्‍ते के लाल-लाल.....दग्‍ध पलाश, मुझे लगता है इसके पीछे कोई ऐसी कहानी रही होगी....लोक कथा.....दंत कथा....जि‍से समय के साथ सबने भुला दि‍या..........कि एक बेहद खूबसूरत राजकुमार थी। एक बार वह आखेट के दौरान सखि‍यों के संग प्‍यास बुझाने जंगल में झील के कि‍नारे गई......वहीं उसने देखा उसे, और प्‍यार जो गया उससे। वो था ही इतना खूबसूरत.....बि‍ल्‍कुल कि‍सी युवराज सा.... दोनों की आंखें मि‍ली......लगा...पसंद करते हैं एक-दूजे को.....मन ही मन प्रण लि‍या, कि मि‍लेंगे...... कई मुलाकातें....प्‍यार परवान चढ़ा........वहीं झील का कि‍नारा उनक...more »
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सबसे ख़तरनाक होता है

Randhir Singh Suman at लो क सं घ र्ष ! 
*सबसे ख़तरनाक होता है* *हमारे सपनों का मर जाना कुछ भी बन बस कायर मत बन।* *पाश की यह लाइन जीने की कला सिखाती है भारतीय शिक्षा आन्दोलन की शुरुआत डोरैजियो नाम के एक आयरिश और बंगाली पिता-- माता की संतान से मिलती है | जो 1830 के आस -- पास बंगाल में एक युवा शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता था जो नौजवानों के बीच में प्रगतिशील सक्रियता के लिए इतना लोकप्रिय था | उसे नौकरी से निकाल दिया गया वो क्रांतिकारी नौजवान अल्प आयु में ही काल कलवित हो गया | परन्तु उसके दिए गये विचारों के मशाल को उसके शिष्यों ने उस काल परिवेश में आगे बढाया |* 1857 के बाद भारतीय पुर्न जागरण दौर आता है | उस काल खण्ड में मुख्यत:... more »

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एक मुलाकात

रश्मि प्रभा... at परिकल्पना
दीप्ति नवल का व्यक्तित्व बहुआयामी है| वे कवयित्री और चित्रकार होने के साथ साथ एक कुशल छायाकार भी हैं| इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत से भी बहुत लगाव है और वे खुद भी कई वाद्य यंत्र बजा लेती हैं| उनकी प्रकाशित पुस्तकों में लम्हा-लम्हा मील का पत्थर साबित हुई ... उसे पढना - लम्हे को जीने जैसा है ! अपनी ही ज़िन्दगी से कुछ रौशनी लिए हम अजनबी रास्तों से पहचान बनाते हैं = कलम को वादियों में डुबो लिखते हैं अभिनीत चेहरे से परे - *अजनबी / दीप्ति नवल* अजनबी रास्तों पर पैदल चलें कुछ न कहें अपनी-अपनी तन्हाइयाँ लिए सवालों के दायरों से निकलकर रिवाज़ों की सरहदों के परे हम यूँ ही साथ चलते रहें कुछ... more 
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ए शो बाई सुपर स्टार्स ऑफ एल के जी( A Show By Superstars of LKG)

माधव( Madhav) at माधव 
माधव के स्कुल मे कल कल्चरल प्रोग्राम हुआ . फाइनेंशियल ईयर का आखिरी महीना मार्च होने के चलते मेरा ऑफिस शनिवार को भी खुल रहा है . माधव के प्रोग्राम को देखने के लिए मैंने विशेष अनुरोध कर छुट्टी ली. माधव को लेकर हम तीन बजे स्कुल पहुचे. स्कुल मे बच्चों का मेक अप किया गया . कल्चरल प्रोग्राम शाम को पांच बजे शुरू हुआ . प्रोग्राम बहुत सुन्दर और आकर्षक था . माधव ने एक Rhyme( Five Little Ducks) और एक Play ( Story of Ant & Bird) किया . इसके अलावा Grand Finale मे भी भाग लिया . माधव को स्टेज पर एक्ट करता देख बहुत अच्छा लगा .
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आरम्भ से - अशोक आंद्रे

रश्मि प्रभा... at वटवृक्ष 
Sunday, August 28, 2011 अशोक आंद्रे *साकार करने के लिए * [image: [scan0004.jpg]] कविताएँ रास्ता ढूंढती हैं पगडंडियों पर चलते हुए तब पीछा करती हैं दो आँखें उसकी देह पर कुछ निशान टटोलने के लिए. एक गंध की पहचान बनाते हुए जाना कि गांधारी बनना कितना असंभव होता है यह तभी संभव हो पाता है जब सौ पुत्रों की बलि देने के लिए अपने आँचल को अपने ही पैरों से रौंद सकने की ताकत को अपनी छाती में दबा सके, आँखें तो लगातार पीछा करती रहतीं हैं अंधी आस्थाओं के अंबार भी तो पीछा कर रहे हैं उसकी काली पट्टी के पीछे रास्ता ढूंढती कविताओं को उनके क़दमों की आहट भी तो सुनाई नहीं देती मात्र वृक्षों के ब... more »

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शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 18

संगीता तोमर Sangeeta Tomar at सादर ब्लॉगस्ते! 
*नैनो टेक्नोलॉजी - विश्व भाग्य विधाता* नैनो टेक्नोलॉजी विश्व की एक ऐसी अद्भुत और शक्तिशाली तकनीकि है, जो विज्ञान के समस्त रूपों को परिभाषित करती है। यह तकनीकि आगामी दिनों में विकास की एक नई परिभाषा लिखेगी, जिसके बिना आम आदमी के जीवन का विकास क्रम अधूरा होगा। साधारण से शब्दों में परिभाषित किया जाये, तो ऐसी तकनीक जो वर्तमान समय की भारी भरकम तकनीक से आगे बढ़कर हल्के रूप में विज्ञान के हर अविष्कार को नियंत्रित करती हो। जैसे कि मोटर्स, रोबोट, कंप्यूटर इत्यादि हल्के और शक्तिशाली आकार की मशीनें, जिनको आजकल लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इन दिनों साइंटिफिक और इंजीनियरिंग समुदाय में यह चर्चा जोरों... more »

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फेसबुकिया ब्लॉगिंग और ब्लॉग पर फेसबुकिंग -- यही है ज़माने की चाल !

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन 
अब जब हमारे सभी ब्लॉगर मित्र बन्धु फेसबुक की ओर कूच कर चुके हैं, तो न चाहते हुए भी हम भी कुछ कुछ फेसबुकिया हो गए हैं। हालाँकि जो मज़ा यहाँ है , वह वहां कहाँ। इसलिए पिछले एक महीने में फेसबुक पर अलग अलग मूड और माहौल में जो कुछ चन्द पंक्तियाँ डाली, उन्हें यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है : *फेसबुकिया क्षणिकाएं * १) कभी कभी न जाने क्यों -- ऐसा लगता है, जैसे -- हम एलियन हों , और 'इंसानों' की धरती पर उतर आये हों , किसी गलती के तहत। २) आज --- सारी रात मेघा , गरजते रहे बरसते रहे --- नयनों से फिर आज , सारी रात --- ३) यूँ समझो कि बस हम ही हम हैं। ये और बात है कि हम ही हम हैं... more »

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तो मित्रों आशा है आपको आज का बुलेटिन पसन्द आया होगा, तो फ़िर अपना ध्यान रखिए, खुद बचिए और अपनें अपनों को बचाईए..

जय हिन्द
देव


11 टिप्पणियाँ:

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सुन्दर !!

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

बहुत ही बढ़िया चर्चा, जानकारियों से भरा ।

vandana gupta ने कहा…

badhiya buletin

Reena Maurya ने कहा…

बुलेटिन पर स्थान देने के लिए आपका शुक्रिया.///
:-)

शिवम् मिश्रा ने कहा…

गर्मी तो देव बाबू सही मे अभी से काफी पड़ने लगी है ... ऐसे मे आपके बताए उपाए सही मे काम आएंगे ... आभार !

लिंक्स भी सब दमदार है ... बढ़िया बुलेटिन लगाया है !

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

वृजेश सिंह ने कहा…

बहुत-बहुत शुक्रिया देव कुमार जी। रचना को पसंद करने और पोस्ट का हिस्सा बनाने के लिए। बढ़ती गर्मी के साथ रचनात्मकता का सफर भी आगे बढ़ता रहे, उसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

Archana ने कहा…

बसंत के बिखरे पत्ते ...पर कुछ पोस्ट पढ़ी ..बहुत अच्छी लगी ,पहली बार देखा ये लिंक ...आभार

देव कुमार झा ने कहा…

सभी का आभार.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कुछ छूटे हुये ब्लॉग भी पढ़ लेते हैं।

रश्मि शर्मा ने कहा…

बुलेटि‍न में स्‍थान देने का शुक्रि‍या...कुछ नए ब्‍लाग दि‍खे..पढ़ती हूं उन्‍हें

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