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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

इश्क़ की दास्ताँ है प्यारे ... अपनी अपनी जुबां है प्यारे - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो, 
प्रणाम !

पप्पू दुकान पर जाकर बोला, "कोई ऐसा वैलेंटाइन डे का कार्ड है जिसपर लिखा हो, "तुम ही मेरा पहला और आखिरी प्यार हो?"
 दुकानदार: हां है।
 पप्पू: ठीक है, 12 दे दो।
 हैप्पी वेलेंटाइन दिवस।


हाँ तो साहब कैसा गया आप का वैलेंटाइन डे ???

सादर आपका 

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मुहब्बत का दिन ....


हरकीरत ' हीर' at हरकीरत ' हीर'

*रात इमरोज़ जी का फोन आता है संग्रह में दो नज्में कम हो रही हैं ( मेरा पंजाबी का काव्य संग्रह वे छाप रहे हैं ) तुरंत लिख कर भेजो ...आज रात सोना मत ....रात भर सोचती रही क्या लिखूं ..? .अचानक ध्यान आया आज तो वेलेंटाइन डे है और रात इन नज्मों का जन्म हुआ ...ये मूल पंजाबी में लिखी गईं थीं यहाँ पंजाबी से अनुदित हैं .....* *14 फ़रवरी ....(वेलेंटाइन डे पर विशेष )* *मुहब्बत का दिन ....* तुमने कहा- आज की रात सोना मत आज तूने लिखनी हैं नज्में मेरी खातिर ... क्यूंकि ... आज मुहब्बत का दिन है .. लो आज की रात मैं सारी की सारी हीर बन आ गई हूँ तुम्हारे पास चलो आज की रात हम नज्मों के समुंदर में ... more »

प्रेम का जादू (वेलेन्टाइन डे)


डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़र
प्रेम का जादू (वेलेन्टाइन डे) ******* 1. प्रेम का पाग घीमे-धीमे पकता जो प्रेम सच्चा. 2. खुद में लीन गिरता-सँभलता प्रेम अनाड़ी. 3. प्रेम का जादू सिर चढ़ के बोले जिसको लगे. 4. प्रेम की माला सब कोई जपता प्रेम न बूझा. 5. प्रेम की अग्नि ऊँच-नीच न देखे मन में जले. 6. प्रेम का काढ़ा हर रोग की दवा ज़रा-सा पी लो. 7. प्रेम बंधन न रस्सी न साँकल पर अटूट. - जेन्नी शबनम (फरवरी 14, 2013)

हमारी पीढ़ी की कशमकश




हमारी पीढ़ी बड़े कशमकश से गुजर रही है। वह नयी पीढ़ी के साथ कदम मिला कर चल रही है, लेकिन पुरानी पीढ़ी के रिवाजों रवायतों का दामन भी नहीं छोड़ना चाहती। पुरानी परम्पराओं को भी बड़े शौक से निभाती है या यूँ कहें पुरानी पीढ़ी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती। हाल में ही बहुत करीब से यह सब अनुभव हुआ जब अपनी फ्रेंड के बेटे के हल्दी की रस्म में शामिल हुई। वही बचपन की सहेली 'सीमा', जो बारह साल बाद मुझे इंटरनेट के थ्रू मिली और उसके मिलने की पूरी दास्तान मैंने यहाँ लिख दी थी। आप सबने जरूर पढ़ी होगी, और शायद याद भी हो फिर भी मुझे अपनी इस सहेली का परिचय देने में बहुत गर्व महसूस होता है। ... more »

तलाश एक खोये हुये सपने की…


राम त्यागी at मेरी आवाज


*16-17 दिसम्बर २०१२* को पूरा भारत देश अपनी बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध के लिए आक्रोश में था, पूरा देश प्रदर्शनों के जरिये अपने आक्रोश का इजहार करते हुए अपराधियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा के लिए एक स्वर में खड़ा दिखाई दिया| एक पिता ने बिना किसी भेदभाव के उच्च शिक्षा के लिए हर सुविधा मुहैया कराई, एक सपने की नीव बुनी, लडकी ने भी मेहनत से अपने पिता के विश्वास को एक बल दिया| पर एक भयावह रात में कुछ दरिंदों ने उस सपने को चकनाचूर कर दिया, रही सही कसर समाज ने - हम सब ने, पुलिस ने अपने लचर रवैये से पूरी करी, हम सब कहीं न कहीं इस वीभत्स कृत्य में जिम्मेदार थे| हमारी असंवेदनशीलता और सब कुछ... more »

सर्वव्यापक


गिरिजा कुलश्रेष्ठ at Yeh Mera Jahaan

श्वास में ,प्रश्वास में तुम हो आस में विश्वास में तुम हो अश्रु में या हास में तुम हो दो दृगों की प्यास में तुम हो । उत्साह का स्फुरण हो सम्पूर्णता का वरण हो अन्तर के स्वर्णाभरण हो आराध्य हित जागरण हो । वेदना तुम हो, तरल संवेदना तुम हो देह संज्ञाहीन मैं हूँ ,चेतना तुम हो । चुभ रहे हों शूल या फिर खिल रहे हों फूल तुम बसे हर भाव पश्चाताप हो या भूल । दृष्टि में तुम हो चिरंतन सृष्टि में तुम हो तप रही हो जब धरा घन वृष्टि में तुम हो । जीत में हो तुम हदय की हार में भी तुम उलाहनों में भी , मधुर मनुहार में भी तुम । विश्व में तुम हो अखिल अस्तित्व में तुम हो । कोई भी देखले चाहे हृदय के... more »

इश्क़ = अनारकली = मधुबाला


शिवम् मिश्रा at बुरा भला


* " कोई इश्क़ का नाम ले ... और अनारकली का जिक्र न हो ... यह मुमकिन नहीं " **और आज वैसे भी इश्क़ का दिन है ...**१४ फरवरी **मधुबाला जी की जंयती* * * * * *मधुबाला* (जन्म: 14 फरवरी, 1933, दिल्ली - निधन: 23 फरवरी, 1969, बंबई) भारतीय हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थी। उनके अभिनय में एक आदर्श भारतीय नारी को देखा जा सकता है।चेहरे द्वारा भावाभियक्ति तथा नज़ाक़त उनकी प्रमुख विशेषता है। उनके अभिनय प्रतिभा,व्यक्तित्व और खूबसूरती को देख कर यही कहा जाता है कि वह भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महान अभिनेत्री है। वास्तव मे हिन्दी फ़िल्मों के समीक्षक मधुबाला के अभिनय काल को *स्वर्ण युग* की संज्ञा से ... more »

बसंती रंग छा गया


धीरेन्द्र सिंह भदौरिया at काव्यान्जलि


*बसंती रंग छा गया,...* प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया! विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!! आज हुई साकार कल्पना, सारी धरती कुञ्ज बन गई! विधु बैनी के पीत वसन पर,अम्बर की द्रष्टि थम गई!! मलय पवन ने विजन डुलाया ,तरुओं की तंद्रा टूटी! भौरें उपवन में गान कर उठे ,फूलों की लज्जा छूटी!! एक-एक कर सब पात झर गए , जैसे नभ से तारे टूटे! मित्र सभी झर गए पुराने,नए सभी खुशियाँ मिल लूटें!! अमुओं के सिर मौर बाँधकर,महक व्याह लाइ अमराई! कोयल की खुल गई समाधि,खगदल की बारात बौराई!! सरसों की पीली साड़ी के संग,हरी किनारी लगी न... more »

यूँ दबे पाँव आया वसंत !

संतोष त्रिवेदी at बैसवारी baiswari
*यूँ दबे पाँव आया वसंत !* *हरियाली की चादर ओढ़े * *धूप गुनगुनी साथ लिए,* *मंद पवन से द्वार बुहारे * *पुलकित मन ,श्रृंगार किये ,* ** *पट खोल दिए दोनों तुरंत !* *यूँ दबे पाँव आया वसंत !!* ** *नयनों से धार बही झर-झर* *काजल बह गया अश्रु बनकर ,* *सामने दिखे मेरे प्रियतम * *बरबस लिया उन्हें अंक भर ,* ** *मिल रहे प्रिया से आज कन्त !* *यूँ दबे पाँव आया वसंत !!*

उपासना प्रेम की आध्यात्मिक अनुभूति है और वासना देह की भौतिक अनुभूति

RAJIV CHATURVEDI at Shabd Setu
*"कृष्ण उस प्यार की समग्र परिभाषा है जिसमें मोह भी शामिल है ...नेह भी शामिल है ,स्नेह भी शामिल है और देह भी शामिल है ...कृष्ण का अर्थ है कर्षण यानी खीचना यानी आकर्षण और मोह तथा सम्मोहन का मोहन भी तो कृष्ण है ...वह प्रवृति से प्यार करता है ...वह प्राकृत से प्यार करता है ...गाय से ..पहाड़ से ..मोर से ...नदियों के छोर से प्यार करता है ...वह भौतिक चीजो से प्यार नहीं करता ...वह जननी (देवकी ) को छोड़ता है ...जमीन छोड़ता है ...जरूरत छोड़ता है ...जागीर छोड़ता है ...जिन्दगी छोड़ता है ...पर भावना के पटल पर उसकी अटलता देखिये --- वह माँ यशोदा को नहीं छोड़ता ...देवकी को विपत्ति में नहीं छोड़ता ...सुदाम... more »

{ २४१ } तनहाई में जब कभी...

गोपाल कृष्ण शुक्ल at पाँखुरी
तनहाई में जब कभी अपने ख्वाबों में तुमसे मिलता हूँ________ सच बताऊँ प्रियतम तुम्हे हृदय की प्रत्येक उमंगों में प्रतिबिम्बित करता हूँ_________ मानस-दर्पण में प्रीति-पुष्प के सुगँधित पराग को रचता हूँ___________ मानस-पटल पर कौंधते बार-बार चन्द्र-सम आकर्षण को चूमने को आतुर ओष्ठ____________ प्रेमातुर हृदय के स्पंदन में वीणा की ध्वनि और कोमल कँठ-स्वर का अभिनन्दन करता हूँ________ तनहाई में जब कभी अपने ख्वाबों में तुमसे मिलता हूँ___________ ------------------------------- गोपाल कृष्ण शुक्ल

अंतरजाल का जाल

प्रतीक माहेश्वरी at प्रतीक माहेश्वरी
*अंतरजाल*, आज थोड़े से भी पढ़े लिखे लोगों के लिए उनके *जीवन का अभिन्न अंग* हो गया है और पढ़े-लिखे ही क्यों, अशिक्षित लोगों के लिए भी यह कोई माया से कम नहीं है जो अपने जादू से उनको मोह लेती है। कम्प्युटर का प्रचलन भारत में एक विस्तृत पैमाने पर करीब ८-१० साल पहले ही आया था और आज हर इंसान को अपनी गिरफ्त में रखने की क्षमता रख रहा है। जहाँ अंतरजाल के आने से लोगों तक *खबर पहुँचने की गति**, हर प्रश्न के उत्तर, कणों-कण सवालों के सरलतम जवाब, **लोगों की उँगलियों के मोहताज* हो गए हैं, वहीँ अंतरजाल ने * धोखाधड़ी, उत्पात, **व्यभिचार और न जाने कितने असामाजिक तत्वों* को भी बढ़ावा दिया है। पर मैं यही सम... more »
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 अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

12 टिप्पणियाँ:

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

आभार .....!!

बहुत सी नई पोस्ट्स देखने को मिली ....!!

DrZakir Ali Rajnish ने कहा…

सुंदर चर्चा शिवम भाई। बधाई।

क्‍या बदलेगा न्‍यूटन का नियम ?

shikha varshney ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन है.

expression ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन...
शानदार लिंक्स......
आभार शिवम् जी.

अनु

सुमन कपूर 'मीत' ने कहा…

waah ..bahut badhiya

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत दिनों बाद मेरी पोस्ट शामिल करने के लिये ,,,,,आभार ,,,शिवम् जी,,,

राम त्यागी ने कहा…

Thanks Shivam bhai for including my post :) बहुत अच्छी चर्चा :)

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

...आभार महराज :-)

शिवम् मिश्रा ने कहा…

@धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…
"बहुत दिनों बाद मेरी पोस्ट शामिल करने के लिये ,,,,,आभार ,,,शिवम् जी,,,"

कमाल करते है आप भी ... पता नहीं आप ब्लॉग बुलेटिन से क्या उम्मीद लगाए बैठे है ... अगर कोई पूर्वाग्रह तो उसे दूर कीजिये ... इस महीने की 7 तारीख से ले कर अब तक आप के ब्लॉग मे कुल ३ पोस्टें आई है जिस मे से २ ब्लॉग बुलेटिन मे शामिल की गई है ... उसके बाद भी आप कहते है कि ... आप की पोस्ट बुलेटिन मे शामिल नहीं होती ... इस से पहले भी आपने कुछ ऐसा ही कमेन्ट दिया था ८ तारीख की बुलेटिन मे ... क्या मामला है जनाब !!?? आपको अगर ब्लॉग बुलेटिन या मुझ से कोई शिकायत है तो खुल कर बताएं यूं बेकार के आरोप न लगाएँ !
वैसे एक बात बताता चलूँ ... यहाँ किसी के लिए भी कोई आरक्षित सीट नहीं है ... और न ही यह लाज़मी है कि हर एक की हर पोस्ट को बुलेटिन मे शामिल किया ही जाना है !
सादर !

सदा ने कहा…

बेहतरीन लिंक्‍स संयोजन ... आभार

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बुलेटिन में मुझे शामिल करने के लिए शुक्रिया. बहुत अच्छे अच्छे लिंक्स हैं. धन्यवाद.

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