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बुधवार, 7 नवंबर 2012

एक खबर जो शायद खबर न बनी - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

कल फेसबूक पर एक खबर पता चली ... मैंने उसको वहाँ शेअर भी किया और लोगो की राय जानने की कोशिश की ... आज उसी खबर को आप सब के सामने भी ला रहा हूँ ... ज़रा बताएं आप मे से कितनों ने यह खबर पहले सुनी या पढ़ी थी ... 

Is Kasab more important than a martyr?
This is what 26/11 hero Major Sandeep Unnikrishnan's uncle
K. Mohanan asks before setting himself on fire in front of Rashtrapati Bhavan

"This is so frustrating and unfortunate. A son of India scarifies his life and the cunning politicians can't even hang Kasab," wrote 55-year-old K. Mohanan in his suicide note.


आप मे से कितनों को यह मालूम था कि कसाब कि फांसी के मामले हो रही सरकारी देरी से तंग आ कर 26/11 के शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा ने संसद भवन के पास आत्मदाह का प्रयास किया था ... और बाद मे अस्पताल मे इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था !? 
मुझे नहीं मालूम था ... जहां तक मैं समझता हूँ यह खबर दबाई गई थी !
एक ऐसा देश जहां हीरोइन के नंगे होने से ले कर नेताओ की रास लीला तक खबर बन जाती है ... देश पर अपना सब कुछ नौछावर कर शहीद होने वाला या उसी शहादत के बाद उसका परिवार कभी खबर नहीं बनता  ... ऐसा क्यूँ ???

आप के जवाब के इंतज़ार मे ...

सादर आपका 

शिवम मिश्रा  

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कार्टून:- ओबामा/अमरीका के चुनाव का दूसरा पहलू


लादेन ने बनाया ओबामा को राष्ट्रपति !

महेन्द्र श्रीवास्तव at आधा सच...
*मैं *अमेरिका की नीतियों से इत्तेफाक नहीं रखता हूं, खासतौर पर उसकी विदेश और आर्थिक नीतियों का तो मैं सख्त विरोधी हूं। इसके बाद भी मैं अमेरिकियों की देश के प्रति समर्पण और उनकी राष्ट्रभावना का कायल हूं। भारत में मतों की गणना होती है तो राजनीतिक दलों के कुछ चंपू ही मतगणना के स्थान पर मौजूद होते हैं, ऐसा लगता है कि यहां आम आदमी को पूरी चुनावी प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं है। भारत में पूर्वाह्नन 11.30 के करीब जब टीवी पर खबर आई की ओबामा ने जीत के लिए जरूरी इलेक्टोरल वोट 270 का आंकड़ा प्राप्त कर लिया है, उसी समय हम सब ने देखा कि अमेरिका के किसी एक शहर में नहीं बल्कि पूरा अमेरिका सड़कों... more »

काश....

देखिये , कोई भी हंसेगा नहीं | ये प्यार-व्यार के बारे में हमसे लिखा नहीं जाता है | बहुत कोशिश करके कभी कुछ लिखा था - नजर खामोश रहती गर् जुबाँ कुछ बात कर पाती, कदम मासूम रहते जो तू हमारे साथ चल पाती , न जख्म यूँ पकता ,न तो नासूर यूँ बनते , गर् जख्म होती तू , तू ही मरहम लगा पाती !! . मैं रात को छत पे सुकूं से नींद भर सोता , हर सुबह तू गर् प्यार से मुझको जगा जाती !! . रहम मुझ पर भी होता उस खुदा का टूट कर हरदम , तेरी नजरो की रहमत गर् मुझे इक बार मिल जाती !! . महकता सा मुझे महसूस होता कुदरत का हर जर्रा , तेरी साँसों की खुशबू जो मेरी साँसों में बस जाती !! . मैं राह... more »

हिन्दुत्ववादियों का गोबर

रणधीर सिंह सुमन at लो क सं घ र्ष !
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कठपुतली अर्थात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी वही कह और कर रहे हैं जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की वास्तविक सोच है। नितिन गडकरी ने विवेकानंद की तुलना सी आई ए की कठपुतली दाउद इब्राहीम से की है और आर एस एस की जातीय मानसिकता के अनुरूप विवेकानंद को शुद्र घोषित किया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जर्मन नाजीवादी विचारधारा का मानने वाला संगठन है। भारत जैसे बहुभाषीय, बहुधार्मिक देश में वह ब्राहमण वादी शासन व्यवस्था चाहता है। इसके लिए चाहे राम हो, चाहे कृष्ण हो, चाहे विवेकानंद हो को वह एक वस्तु के रूप में इस्तेमाल करता है। वह इं... more

स्व॰ विपिन चंद्र पाल जी की १५४ वी जयंती पर विशेष

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*क्रांतिकारी विचारों के जनक :- विपिन चंद्र पाल (०७/११/१८५८ - २०/०५/१९३२) * स्वतंत्रता आंदोलन की बुनियाद तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली लाल बाल पाल की तिकड़ी में से एक विपिनचंद्र पाल राष्ट्रवादी नेता होने के साथ-साथ शिक्षक, पत्रकार, लेखक व बेहतरीन वक्ता भी थे और उन्हें भारत में क्रांतिकारी विचारों का जनक भी माना जाता है। इस तिकड़ी ने 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन किया जिसे बड़े पैमाने पर जनता का समर्थन मिला। तिकड़ी के अन्य नेताओं में लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक शामिल थे। गरम विचारों के लिए मशहूर इन नेताओं ने अपनी बात तत्कालीन विदेशी शा... more »

ना मैं बुद्ध हूँ ना वे अंगुलिमाल

रश्मि प्रभा... at मेरी भावनायें...
मैं सच में बुरी हूँ बुरे लोगों में हिम्मत नहीं होती धडल्ले से गालियाँ देने की ! अनुमानित सोच पर किसी की इज्ज़त का जनाजा निकालने की ! अच्छे, संस्कारी लोग अनुमानित आधार पर कभी भी,कहीं भी कुछ भी कहने का अधिकार रखते हैं कुछ भी खुलासा करते हैं ... वे पूरे दिन कभी कभी रात में भी पुलिस का धर्म कानून का धर्म निभाते हैं ! कौन क्या है - इसका पूरा लेखा-जोखा इन अच्छे लोगों के पास होता है ! बिना राम नाम सत्य बताये ये सम्मान की अर्थी निकाल देते हैं हर उस दरवाज़े पर भीड़ लगी होती है जो जनाजे के इंतज़ार में होते हैं - एक वक्र मुस्कान इनकी पुश्तैनी सम्पत्ति है फिर भी दरियादिली से ये अर... more »

कुछ कम कम सा ....

Anju (Anu) Chaudhary at अपनों का साथ
कभी कभी पूरी बरसात से , पड़ने वाली कम कम सी बूंदे इस तन और मन को अधिक शांत करती है वैसे ही ... कम बोलने वाले शब्द कम बाते ,और छोटे वाक्य जो किताब के पन्नों से होकर , इस जिंदगी में खुद की जगह बना लेते हैं अपनों के बीच , खुद की रोशनी लिए हुए ... मुझे पसंद है, बहता हुआ दरिया नित नए पानी सी नए ख्यालों और उमंग से भरी जिंदगी जो अपने साथ एक गहरी चुप्पी रखती हो साथ ही साथ , आँखों की भाषा .. और एक लंबा सा मौन .... जो इस रुकी हुई जिंदगी को नया सा अर्थ देता है और देता है...कुछ अपनों में एक नयी सी पहचान लिए , सिर्फ ,अपने लिए || अंजु (अनु) आज अजब सी शरारत मेरे साथ हुई, मेरे घर को ... more »

नाथूराम गोडसे का कोर्ट में अंतिम बयान --ज़रूर पढ़िए

ZEAL at ZEAL
मेरी हार्दिक इच्छा है की आप लोग , शहीद नाथूराम गोडसे जैसे वीर और कान्तिकारी देशभक्त के कोर्ट में दिए गए अंतिम बयान को अवश्य पढ़ें और इतिहास को जानें ! वन्दे मातरम् ! ------------------------------------------------------------------ Gandhiji Assassin: Nathuram Godses' Final Address to the Court. Nathuram Godse was arrested immediately after he assassinated Gandhiji, based on an F. I. R. filed by Nandlal Mehta at the Tughlak Road Police station at Delhi. The trial, which was held in camera, began on 27th May 1948 and concluded on 10th February 1949. He was sentenced to death. An appea... more »

कार्टून कुछ बोलता है- ऑडिटर्स रिपोर्ट

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !

नियमित स्वास्थ्य जाँच बहुत आवश्यक होती है ---

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन
बहुत दिनों से अपनी सोसायटी के निवासियों के लिए एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करने का विचार था। इस रविवार आखिर यह संभव हो ही गया जब *फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल* के सहयोग से हमने एक *हार्ट चेकअप कैम्प *का आयोजन किया। इस कैम्प में 100 से ज्यादा लोगों का मुफ्त चेकअप किया गया। शिविर में *बी पी , ब्लड सुगर , ई सी जी, पी ऍफ़ टी, और **बी एम् डी टेस्ट किये गए। * मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही सामने है यह* मंदिर* , हरियाली में घिरा हुआ। यहाँ रोज शाम को भक्तजनों के लिए भगवान के दर्शन हेतु मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। यह स्थान महिलाओं विशेषकर वृद्धों के लिए एक अच्छा मिलन स्थान भी है जहाँ व... more »

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की एक शाम और निदा फ़ाज़ली ...

shikha varshney at स्पंदन SPANDAN
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता . बहुत छोटी थी मैं जब यह ग़ज़ल सुनी थी और शायद पहली यही ग़ज़ल ऐसी थी जो पसंद भी आई और समझ में भी आई। एक एक शेर इतनी गहराई से दिल में उतरता जाता कि आज भी कोई मुझे मेरी पसंदीदा गजलों के बारे में पूछे तो एक इसका नाम मैं अवश्य ही लूं।परन्तु बहुत समय तक इन लाजबाब पंक्तियों के रचनाकार का नाम नहीं पता था। समय बीता कुछ जागरूगता आई तो जाना की इस बेहतरीन ग़ज़ल को निदा फाज़ली साहब ने लिखा है। उसके बाद - "घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए". जैसे उनके बहुत से संवेदनशील शेर... more »
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 अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!!

14 टिप्पणियाँ:

Archana ने कहा…

मुझे भी नहीं पता था..यही पता चला....बुलेटिन अपना काम कर रहा है ...

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

शुक्रिया
बहुत बहुत आभार

shikha varshney ने कहा…

एक सार्थक बुलेटिन है यह.

रणधीर सिंह सुमन ने कहा…

nice

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

कार्टून को भी चर्चा में सम्‍मि‍लि‍त करने के लि‍ए आभार.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ख़बरें वही मिलती हैं,जिनका कोई औचित्य नहीं . सच को बताना लोग मुनासिब नहीं समझते , अधिकाँश देश की जनता जानना भी नहीं चाहती . पर एक बात है- वह सच मशाल की तरह सामने आता ही है ...
लिंक्स हमेशा अच्छे होते हैं

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

तभी तो कहता हूँ बहुत से वलिदान व्यर्थ गए, शहीद होना ही है तो उन्हें मारकर होइए जो हरमखोर इस देश को रोज तिल तिल मरने पर मजबूर कर रहे हैं !

Akash Mishra ने कहा…

संदीप उन्नीकृष्णन वाली खबर निसंदेह अफसोसजनक है , यहाँ खबर सिर्फ वही है जिसे दिल्ली खबर बनाना चाहती है |
अच्छी लिंक्स का संग्रह ,
'आधा सच' और 'zeal' ब्लॉग के लेख विशेष पसंद आये |

सादर

सदा ने कहा…

बुलेटिन सच के साथ- साथ
... और लिंक्‍स का संयोजन अनुपम

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रोचक और पठनीय सूत्र ।

भावना पाण्डेय ने कहा…

haan khabron ka chunaav ab ....bahut dukh hota hai deshbhakton ke saath hote aise vyavhaar par ,baaki links bahut achhe hain ,inhe share karne ke liye dhanyavaad.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

अजय कुमार झा ने कहा…

सटीक और सार्थक मुद्दा उठाया आपने शिवम भाई। य्रे सारे तथ्य ही इस बात को साबित करते हैं कि हमारा मीडिया किस दिशा और दशा में है ।

सभी पोस्टों का चयन बखूबी किया आपने । सुंदर सार्थक बुलेटिन ।

ZEAL ने कहा…

Thanks for providing great links Shivam ji.

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