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गुरुवार, 1 नवंबर 2012

इन्हें नहीं पढ़ा तो समझो कुछ अधुरा रह गया ...



पढने,सीखने,लिखने,मिटाने,सहेजने .... कोई आखिरी पड़ाव नहीं . नहीं होती कोई बात ऐसी - जो आखिरी बार कही गई हो . प्यार,माँ,बचपन,दर्द,चुनौती .... सबका अपनी आँखों से चलता जाता है सिलसिला,ऐसा नहीं वैसा - कौन नहीं चाहता और चाहने पर नहीं देनेवाला करता है कुतर्क -
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो ...
याद है खामोशी फिल्म के इस गीत को वह लड़की गाती है, जो सबको मुर्ख बनाती थी . सच तो ये है कि -
प्यार नहीं छुपता छुपाने से .... खैर चलिए एक नज़र चुने गए लिंक्स पर डालिए और लम्बी सांस लेकर कहिये - 
वाकई नहीं पढ़ते तो अधुरा रह जाता कुछ !!!










8 टिप्पणियाँ:

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर ....वाकई नहीं पढ़ते तो अधुरा रह जाता !!!

Manu Tyagi ने कहा…

sach . badhiya links

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

काश पढ़ पायें सभी लिंक्स..

ज्योति खरे ने कहा…

बहुत ही बढ़िया अच्छा हुआ पढ़ लिया

सुमन कपूर 'मीत' ने कहा…

bahut bahut shukriya ..padha bhi aur achchha bhi lga ...

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

badhiya hai ....

शिवम् मिश्रा ने कहा…

अभी पढ़ते है ... :)

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बढिया लिंक्स

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