Subscribe:

Ads 468x60px

रविवार, 21 अक्तूबर 2012

'वक्त' ख़त्म, 'सिलसिला' थमा ... - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो, 
प्रणाम !

थ्रिलर, रोमांस, रूहानी मौसिकी के जादूगर यश चोपड़ा नहीं रहे..
वाई..आर.एफ. का लाल रंग स्याह हो गया..
फिल्मों को अलविदा कहते हुए दुनिया से अलविदा कह गए..
परमात्मा उनकी आत्मा को शान्ति दे!!
यश चोपड़ा (२७.०९.१९३२ - २१.१०.२०१२)


 आज शाम जैसे ही फेसबूक खोला सलिल वर्मा जी की वाल पर यह दुखद समाचार मिला कि दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक एवं पटकथा लेखक यश चोपड़ा का संक्षिप्त बीमारी के बाद रविवार को मुम्बई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। यश चोपड़ा डेंगू से पीड़ित थे।

डेंगू की शिकायत के चलते यश चोपड़ा को 12 अक्टूबर को मुम्बई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके परिवार में पत्नी पामेला चोपड़ा एवं दो लड़के आदित्य एवं उदय हैं।

फिल्म के क्षेत्र में अपने अविस्मरणीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2001 में दादा साहब फाल्के एवं 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

यशराज चोपड़ा का जन्म 21 सितम्बर 1932 को अविभाजित भारत के लाहौर शहर में हुआ था। यश राज ने अपना फिल्मी करियर अपने बड़े भाई बीआर चोपड़ा (बल राज चोपड़ा) के सहायक के तौर पर शुरू किया।

यशराज ने बीआर फिल्म्स के तले बनी फिल्म 'धूल का फूल' के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यश ने बीआर फिल्म्स की जबर्दस्त सफल फिल्म 'वक्त' के अलावा अमिताभ बच्चन अभिनीत 'दीवार' का भी निर्देशन किया। इस फिल्म ने अमिताभ को एंग्री यंग मैन के खिताब से नवाजा।

यशराज ने 1973 में यशराज फिल्म्स से खुद का बैनर स्थापित किया और एक से बढ़कर एक फिल्में दी। प्रेम कहानी को पिरोने के जादूगर यशराज ने 'दाग', 'त्रिशूल', 'कभी-कभी', 'चांदनी', 'डर', 'दिल तो पागल है', 'मोहब्बतें' एवं 'वीर जारा' जैसी फिल्मों का निर्माण एवं निर्देशन किया। यशराज की फिल्में अपने संगीत के जरिए दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में कामयाब रहीं।

 इन दिनों यश चोपड़ा 'जब तक है जान' की शूटिंग में व्यस्त थे। स्वास्थ्य खराब होने के कारण फिल्म की शूटिंग के कुछ हिस्सों की शूटिंग को रोक दिया गया था। उन्होंने इस फिल्म के साथ ही फिल्म निर्माण से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

यशराज को अपने 50 साल के फिल्मी करियर छह राष्ट्रीय पुरस्कार एवं 11 फिल्म फेयर पुरस्कारों से नवाजा गया था। 

पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम और पूरे ब्लॉग जगत की ओर से स्व ॰ यश चोपड़ा जी को विनम्र श्रद्धांजलि !!

=========================================

'वक्त'ख़त्म, 'सिलसिला' थमा!

IRFAN at ITNI SI BAAT

यश चोपड़ा का देहांत, ''जब तक है जान'' आखिरी फिल्‍म

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा का 80 साल की उम्र में मुंबई में देहांत हो गया है। उन्हें डेंगू से पीड़ित होने के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा नहीं रहे। लीलावती अस्पताल में रविवार को उनका निधन हो गया है। वो पिछले 9 दिनों से लीलावती अस्पताल में भर्ती थे। यश चोपड़ा डेंगू से पीड़ित थे। उम्मीद की जा रही थी कि वो जिल्दी जल्दी ठीक होकर घर लौट जाएंगे लेकिन अब यश चोपड़ा नहीं रहे। यश चोपड़ा ने बॉलीवुड का प्रतिष्ठित बैनर यशराज फ़िल्म की नींव रखी थी। यश चोपड़ा ने कई मल्टी स्टारर फ़िल्में बनाईं। यश चोपड़ा के परिवार में पत्नी पामेला चोपड़... more »

1962 के युद्ध की कुछ धुंधली यादें !

रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार
20 अक्टूबर 1962 को चीन ने भारत के ऊपर आक्रमण कर उसे युद्ध की विभीषिका में धकेल दिया था . भारत चीन की सीमायें जहाँ हैं वहां पर सर्दी का हर समय आलम बहुत बुरा रहता है, यहाँ का तापमान सदैव ही माइनस में होता है। । वे उसके आदी हुआ करते है और हमारे जैसे देश में हर सैनिक में इतनी सर्दी सहने का माद्दा न था। लेकिन हमारे सैनिक अपनी जान की बाजी लगाये दुश्मनों का सामना करते रहे। वहां पर रसद और हथियार पहुँचाने में भी इतनी कठिनाई होती थी कि सैनिकों के पास इसका अभाव बना रहता था। उनके पास लड़ने के लिए पर्याप्त हथियार भी नहीं होते थे। खाने के लिए सामग्री उपलब्ध नहीं... more »

आम आदमी के लिए फलों का राजा आम नहीं , केला होता है --

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन
कहते हैं आम फलों का राजा है . ज़ाहिर है , राजा है तो आम आम आदमी की पहुँच से बाहर ही होगा . इसीलिए बचपन में हमें भी जो फल सबसे ज्यादा प्यारा लगता था वो आम नहीं केला था . आखिर , तब हम भी तो आम आदमी ही थे . भले ही अब आम आदमी से ऊपर उठ गए हैं ( बाहर की दुनिया देखकर ऐसा लगता है ) , लेकिन रहते तो बनाना रिपब्लिक में ही हैं . इसलिए फलों में सबसे प्रिय अभी भी केला ही है . इसका भी वैज्ञानिक कारण है। बचपन में जो बातें सिखाई जाती हैं या परिस्थितिवश सीखने को मिलती हैं , वे जिंदगी भर न सिर्फ याद रहती हैं बल्कि आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं . समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है, फलों का स्वरुप भी।... more »

"जेल-डायरी" तिहाड़ से काबुल-कंधार तक : शेर सिंह राणा

noreply@blogger.com (Ratan singh shekhawat) at ज्ञान दर्पण
हार्परकॉलिन्स पब्लिशर्स इंडिया ए जोइंट वेन्चर विद दी इंडिया टुडे, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित फूलन देवी हत्याकांड में आरोपी तिहाड़ जेल में बंद शेरसिंह राणा की “जेल-डायरी” तिहाड़ से काबुल कंधार तक पढ़ी| पुस्तक में शेरसिंह राणा के बचपन, विद्यार्थी जीवन के बारे में उसी की जबानी क्रमबद्ध वर्णन तो है ही साथ ही उसके प्रेम कहानी का भी वर्णन किया गया है| शेरसिंह राणा के फूलन हत्याकांड के आरोप में तिहाड़ पहुंचने और तिहाड़ में उसके जेल जीवन के संस्मरण पुरे विवरण के साथ दर्शाये गए है| राणा द्वारा पुस्तक के माध्यम से तिहाड़ में अपने जेल जीवन पर डाला गया प्रकाश तिहाड़ की कार्यप्रणाली व वहां के वातावरण ... more »

अब चेक से नहीं मिलेगा बीमा भुगतान

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*दैनिक जागरण की खबर के अनुसार* सरकारी और निजी बीमा कंपनियां अब बीमा धारक को पैसे का भुगतान चेक के माध्यम से नहीं करेंगी। सभी बीमा धारकों को भुगतान अब एनईएफटी [नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर] से होगा। इसके माध्यम से पैसा सीधे बीमा धारक के खाते में भेजा जाएगा। एलआईसी के मेरठ डिवीजन में आने वाले 11 जिलों मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत में अब तक करीब ढाई लाख बीमा धारकों का एनईएफटी में रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इसके अलावा करीब 30 लाख ऐसे बीमाधारक जिनका पेमेंट ड्यू है, उनमें से करीब 27 हजार को एनईएफटी का फार्म भरने के लिए कहा गया है। एलआ... more »
 

कंजंक्टिवाईटिस है दुनिया को

रश्मि प्रभा... at मेरी नज़र से
एक छोटा सा परिचय .... इस नज़्म से बेहतर और क्या ! विश्व दीपक *अंतर्नाद* *कंजंक्टिवाईटिस है दुनिया को* उधर मत ताकना, कंजंक्टिवाईटिस (conjunctivitis) है दुनिया को.. आँखें छोटी किए बुन रही है अपनी सहुलियत से हीं रास्ता, रोड़े, रंग, रोशनी, रूह, रिश्ते... सब कुछ... देख रही है अपने हिसाब से हीं तुझमें तुझे, मुझमें मुझे... देख रही है अभी तुझे हीं... आँखें लाल किए.. उधर मत ताकना, बरगला लेगी तुझे भी; बना लेगी तुझे भी..खुद-सा हीं....

आखिर जिंदगी को क्या तलाश है...

मन्टू कुमार at मन के कोने से
कभी-कभी सोचता हूँ कि जिंदगी हमें चलाती है या हम उसे...क्या जिंदगी में बस वहीँ सब होना चाहिए जो केवल और केवल हम चाहते है...क्या जिंदगी में सबकुछ खुशी ही होती है या दुःख का मतलब भी समझ में आना चाहिए... हमें कभी-कभार अंदाजा भी नही लग पाता कि जिंदगी को हमसे क्या चाहिए...और हम उसे क्या दे रहे हैं...हमारे कुछ फैसले,हमें उन नतीजों तक लेकर जाते हैं जिसकी कल्पना हमने कि भी नही थी...फिर दोष किस पर डालें... जिंदगी पर या अपने-आप पर... जिंदगी के सफर में हम कुछ राहें चुनते हैं...मंजिल की खोज में आगे बढते हैं,पर मंजिल का कोई अता-पता नही...तो राहें गलत थी या हमारा फैसला... किसी शायर ने यूँ फ़रमाया है... more »

नेताओं का सेक्सी फ़ैशन

Arunesh c dave at अष्टावक्र
देखिये साहब देश में पिछले कुछ दिनो से भंडाफ़ोड़ की बहार आयी हुई है। लोग बाग जिधर देखो मुंह उठाये सरकारी दस्तावेजो और सबूतो के साथ आरोप पर आरोप पेले पड़े हैं। कल शरद पवरा की बिटिया सुप्रिया सुले जी ने अपने उपर लगाये गये आरोपों पर भड़क कर कहा कि आरोप लगाना फ़ैशन हो गया है। अब साहब किसी भी चीज के फ़ैशन बन जाने के लिये दो बाते जरूरी होती है। पहला यह कि लोग पीटे नही, आप ही देखिये सार्वजनिक जगह में पप्पी झप्पी लेना फ़ैशन नहीं बन पाया। धर्मरक्षक लोग पीटने पहुंच जाते हैं। शादी शुदा भी हो तो क्या, जो करना है कमरे में करो जी, समाज को मत बिगाड़ॊ। नेताओं पर आरोप लगाना भी पहले पिटाई खाने का ... more »

काश, हम कुछ सीख इस बबलू से ही ले पाते !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
पैसों के लिए अपनी माँ-बहिनों और देश का सौदा करने वालों ! काश कि तुम लोग कुछ सीख, भरतपुर, राजस्थान के इस रिक्शा चालक, बबलू से ही ले पाते ! पेट के खातिर अपनी छाती पर कपडे से अपनी एक माह की नवजात बच्ची को बांधे यह शख्स चिलचिलाती धूप में अपने रिक्शे से सवारियों को ढोता भरतपुर की गलियों में दिख जाएगा, जाकर देख आओ, गद्दारों ! दरिद्रता और ठीक से देखभाल न हो पाने की वजह से एक माह पहले इसकी पत्नी का प्रसव के तुरंत बाद देहावसान हो गया था ! इस नवजात बच्ची का अब पिता के अलावा इस दुनिया में और कोई रिश्तेदार भी नहीं है ! अगर बबलू चाहता तो अपनी असमर्थता का रोना रोकर इस बच्ची का सौदा भी कर... more »

अलविदा ! प्यार के देवता...खुशदीप

Khushdeep Sehgal at देशनामा
अलविदा ! प्यार के देवता *यश चोपड़ा * जन्म-27 सितंबर 1932, लाहौर​ मृत्यु-21अक्टूबर 2012, मुंबई
 =========================================

अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!

7 टिप्पणियाँ:

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

यश जी को नमन ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

यश चोपड़ा जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

यश चौपड़ा जी को सच्ची श्रद्धांजलि

अच्छे लिंक्स देखने को मिले,
आपको स्वस्थ होकर यहां देखना अच्छा लगा। शुभकामनाएं

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

विनम्र श्रद्धांजलि..

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

bhagwaan yash jee ki aatma ko shanti pradan karen aur unke chahnewaale ko is dukh ko sahan karne ki shakti de ...

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

upyogi jankari aur acchhe links mile. aabhar.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार