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गुरुवार, 10 मई 2012

अजीब या रोचक - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लोगर मित्रो ,
प्रणाम !
  राहुल सिंह जी  के ब्लॉग   पर इसे देख और पढ़ मैं चकरा गया था शायद आपका भी यही हाल हो ... पर है यह कमाल ... न माने तो खुद ही अजमा लीजिये ... पर हाँ अपनी राय देना न भूलियेगा !




"i cdnuolt blveiee taht I cluod aulaclty uesdnatnrd waht I was rdanieg. The phaonmneal pweor of the hmuan mnid, aoccdrnig to a rscheearch at Cmabrigde Uinervtisy, it dseno't mtaetr in waht oerdr the ltteres in a wrod are, the olny iproamtnt tihng is taht the frsit and lsat ltteer be in the rghit pclae. The rset can be a taotl mses and you can sitll raed it whotuit a pboerlm. Tihs is bcuseae the huamn mnid deos not raed ervey lteter by istlef, but teh wrod as a wlohe. Azanmig huh? yaeh and I awlyas tghuhot slpeling was ipmorantt! can you raed tihs?"  
 

  हाँ जी ... तो फिर क्या राय है आपकी ... ???
सादर आपका 
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posted by विकल्प-मंच परिवार at विकल्प 
(अठारह सौ सत्तावन के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महाकाव्यात्मक गाथा का सिंहावलोकन *असद जैदी* ने हमारे मौजूदा दौर की सच्चाइयों की चट्टानी जमीन पर खड़े होकर किया है. 10 मई की पूर्वसंध्या पर अपने पुरखों की ...

posted by भारत योगी at BharatYogi.net * भारत योगी* 
भारत भूमि सदैव से ही महापुरुषों और वीरों की भूमि रही है. यहां गांधी जैसे शांति के दूतों ने जन्म लिया है तो साथ ही ताकत और साहस के परिचायक महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, भगतसिंह जैसे लोगों ने भी जन्म लिय...

*जादू ने पापा के कई नाम रखे हैं। * *जब बहुत प्‍यार आता है जादू पापा को 'पापे' कहते हैं। * *जब टॉफी चाहिए या बाहर घूमने जाना है या फिर * *अपने मन का कोई काम करवाना है तो जादू आकर कहते हैं --'पापे आप बहु...

ओह तो ये तुम हो,,,, उसने अपनी उनींदी आँखे खोलते हुए कहा , तो रात के ढाई बजे अपने बेडरूम में तुम किसे एक्स्पेक्ट कर रही थी उसकी की आवाज़ में झुंझलाहट थी , "सलमान खान को ... उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया...

posted by shikha varshney at स्पंदन SPANDAN 
यूँ सुना था तथाकथित अमीर और विकसित देशों में सड़कों पर जानवर नहीं घूमते. उनके लिए अलग दुनिया है. बच्चों को गाय, बकरी, सूअर जैसे पालतू जानवर दिखाने के लिए भी चिड़िया घर ले जाना पड़ता है. और जो वहां ना जा प...

posted by गौरव सोलंकी at रोटी, कपड़ा और सिनेमा 
* * *किशोर कुमार ने यह लेख साठ के दशक में फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका के लिए लिखा था। वे कश्मीर से लौटे थे और अचानक उन्हें लगा था कि निर्माताओं की और उनकी ख़ुद की पैसे की भूख ने उन्हें एक गंभीर गायक से एक जोकर एक...
posted by डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन
मौका हो , दस्तूर हो और लॉन्ग वीकेंड , तो कुछ ऐसा करना चाहिए जो २-३ दिन में ही एक जिंदगी जीने काअहसास दिलाये । जैसा कि पिछले चार भाग में पढ़ा, हमने इन तीनों का पूरा फायदा उठाते हुए, पांच सूत्रीयकार्यक्रम इ...

posted by पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
*तन्हा ही हर दर्द-ए-गम को न भुलाया होता,* *मुदित सरगम तार वीणा का बजाया होता ! * ** *सरे वक्त जलते न पलकों पे अश्कों के दीये,* *हर ज़ख्म दिल में महफूज़ न छुपाया होता!* ** *चाह की मंडियों में अगर प्रेम ...

posted by शिवम् मिश्रा at बुरा भला 
*का जी ... सुन रहे है न ... आज बर्थड़े है ... हाँ हाँ वही हैप्पी वाला ... का कहे किसका ... हद है भई ... इतना भी बताना होगा ... आप लोग भी न ... कुछों याद नहीं रखते है ... भक ... * *अरे आज अपने **झा जी का बर...
posted by Rahul Singh at सिंहावलोकन
10 अप्रैल 1912, इंग्लैंड से अमरीका के लिए करीब 2200 यात्रियों के साथ अपनी पहली यात्रा पर रवाना जहाज टाइटेनिक पांचवें दिन, 15 अप्रैल को अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। बचा लिए गए 700 यात्रियों का य...

posted by अजय कुमार झा at खबरों की खबर 
*इस खबर पर :-पुलिस देखती रही दुकान से माल बतोर ले गए चोर * *मेरी नज़र :-* देखो बे दुकान से माल बटोर कर ले गए तक खबर एकदम पटरी पे है और पुलिस देख रही है यही क्या कम है वर्ना पुलिस ..अजी असली पुलिस तो ...

चलो बहती गंगा में हाथ मैं भी धो लूँ | इस सत्य को सभी मानते हैं जिस चीज़ की इंसान को आवश्यकता होती है वो उसी कि तलाश में लगा रहता है | पहले सीधे रस्ते से उस चीज़ को पाने कि कोशिश किया करता है फिर ग...
posted by Er. Shilpa Mehta at निरामिष
शाकाहारी बनें, स्वस्थ रहें, ज़िम्मेदार रहें *१. *मांसाहारी सिर्फ पशु कोशिकाएं एवं वसा ही नहीं, बल्कि वेस्ट प्रोडक्ट भी ग्रहण करते हैं | जैसे पशुओं को खिलाये जाने वाले रासायनिक भोज्य। उन्हें इंजेक्शन द्वारा...
posted by अभिषेक प्रसाद 'अवि' at खामोशी... 
बहुत दिनों से सोंच रहा था कुछ सार्थक लिखूं... अब इसका ये मतलब बिलकुल नहीं कि अब तक निरर्थक लिखता आ रहा था... पर सोंचा बहुत दिन हो गए लोगों को कुछ ज्ञान नहीं बांटा... वैसे ऐसा नहीं है कि आज अचानक दिमाग में...
posted by ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड at ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड 
'मेरे पास माँहै।" फिल्म दीवार का यहसंवाद अमरहो गयाहै। सैंतीससालों मेंभी यह संवाद धुँधलायानहीं है, बल्कि इससंवाद कीशक्ति देखतेहुए आधुनिककाल काविज्ञापन जगततक इसेभुना रहाहै। एकतराजू मेंसारे ऐश्वर्य, धन दौलत...

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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिंद !!

15 टिप्पणियाँ:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

Badhiya charcha .. kafi pathaniy link mile...badhai

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

इस सुन्दर संकलन के लिये मेरा धन्यवाद स्वीकारें!

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

Meri post ko shamil karne ke liye dhanyavaad...

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

aabhaar, Shivam ji !

Sonal Rastogi ने कहा…

badhiyaa links Meri post ko shamil karne ke liye dhanyavaad...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

Azanmig !!

रोचक सुन्दर विस्तृत चर्चा .

shikha varshney ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन. बढ़िया लिंक्स.

shikha varshney ने कहा…

and yes ..i can read it and totally understand :):)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

अब तो आदत हो गयी है यह पढ़ने की.. इसे तो अभी कुकहह दिन पहले हिन्दी ब्लॉग पर भी पढ़ा था.. लिंक नहीं दे रहा और मान्गियेगा भी मत, नहीं दे पाउँगा!
बाक़ी सब तो मजेदार और बेहतरीन है!!

शेखचिल्ली का बाप ने कहा…

lajawab,,,

सुज्ञ ने कहा…

सुन्दर संकलन!! सुगम प्रस्तुति!! शानदार बुलेटिन!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बढ़िया बढ़िया

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

Maheshwari kaneri ने कहा…

बढ़िया बढ़िया.....

अजय कुमार झा ने कहा…

हां ये बात मैंने भी पढी थी कहीं और कमाल लगा था जब देखा कि शब्दों के उलटे पुलटे लिखे होने के बावजूद भी हम उसे पढ और समझ पा रहे थे । यही मानव मनोविज्ञान और आदत है ।

सुंदर लिंक्स का चयन किया आपने मिसर जी । जमाए रहिए बुलेटिन

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