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बुधवार, 9 मई 2012

वॉट्स विक्‍की डॉनर से बस हमको मोहब्‍बत तक

बेटे, बड़ा होकर क्‍या बनना चाहोगे। मास्‍टर जी, बड़ा होकर डॉनर बनना चाहूंगा। बहुत अच्‍छी बात है बेटा। समाज सेवा करना मानव जीवन का उद्देश्‍य होना चाहिए। पीछे से आवाज आती है, लगता है मास्‍टर जी ने विक्‍की डॉनर नहीं देखी। जय हो।  छोटू विक्‍की डॉनर से याद आया, अभी अभी ब्‍लॉग बुलेटिन पर कुलवंत हैप्‍पी ने वॉट्स विक्‍की डॉनर से बस हमको मोहब्‍बत तक  एक पोस्‍ट डाली है। चल एक चक्‍कर मार आते हैं।

वॉट्स विक्‍की डॉनर रिटर्न   और  वॉट्स विक्‍की डॉनर

रुई का पेड़ A cotton tree or tree cotton

बैंक बैलेंस को छोड़िए, किरपा होए महान

ग़ज़ल और ट्विटर "अँधेरी रात है खुद का भी साया साथ नहीं"

देखो रूठा ना करो ...

मार्क्स, बुद्ध और अनिल म्ह्माने

कहानी-पाठ और परिचर्चा

अपने समय का कठफोड़वा मैं

बस हम को मोहब्‍बत है इंदौर से

चलो दोस्‍तो, अब मैं आपको इंदौर शहर में छोड़कर जा रहा हूं। फिर मिलेंगे, चलते चलते।

2 टिप्पणियाँ:

dheerendra ने कहा…

सुंदर लिंक्स प्रस्तुति,..

my recent post....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

शिवम् मिश्रा ने कहा…

उम्दा लिंक्स + कुलवंत हैप्पी = एक उम्दा ब्लॉग बुलेटिन !

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