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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

क्या है प्यार -- एक अनोखा अहेसास या सिर्फ़ एक 'केमिकल लोचा' - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !
कहते हैं कि प्यार एक ऐसा अनमोल तोहफा है, जो जीवन को खुशियों से भर देता है। मगर वैज्ञानिकों का दावा है कि प्यार-व्यार कुछ नहीं होता, बस दिमाग में होने वाली एक रासायनिक क्रिया है।

वेलेंटाइन डे के मौके पर चीनी विशेषज्ञों ने पहली नजर के प्यार का राज खोला है। उनका दावा है कि यह दिमाग में कुछ रसायन और हार्मोन के मिलने से होने वाली रासायनिक क्रिया है। उनका कहना है कि प्यार का एक शानदार अहसास के अलावा कोई अस्तित्व नहीं है। आम तौर पर लोग मानते हैं कि खूबसूरत लड़की और हेंडसम लड़कों से अक्सर प्यार हो जाता है। किसी को किसी की आवाज भाती है, तो कोई आंखों पर फिदा हो जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि प्यार के लिए व्यक्ति की बाडी लेंग्वेज, बोलने का अंदाज और उसका स्पर्श ज्यादा मायने रखता है। इनके अलावा सबसे महत्वपूर्ण होते हैं फेरोमोन्स। शरीर में स्रावित होने वाले यह रसायन व्यक्ति के सामाजिक जीवन को प्रभावित करते हैं।
पेकिंग यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर माओ लिहुआ का कहना है कि जिसे हम प्यार मानते हैं, दरअसल वो हमारे दिमाग के अनुभव के अलावा कुछ नहीं है।

यूं होता है 'प्यार': - 

किसी के प्रति आकर्षित होने पर जब तंत्रिका तंत्र के जरिए फेरोमोन्स दिमाग में पहुंचकर पियुष ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन के स्रावण को बढ़ाते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज होने के साथ सांसों की गति भी बढ़ जाती है। रक्त का संचार शरीर में तेजी से होने लगता है और आखिर में हथेली पसीजने के साथ ही प्यास लगने लगती है। व्यक्ति का दिमाग इसे प्यार मान बैठता है, जबकि असलियत में यह एक रसायनिक क्रिया है।

चलिए जाने दीजिये इनको ... आप बताएं ... आप क्या सोचते है ... क्या है प्यार  -- एक अनोखा अहेसास या सिर्फ़ एक  'केमिकल लोचा' ?? 

और जब तक आप इस पर विचार करते है मैं ब्लॉग बुलेटिन लगाये देता हूँ ...

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posted by पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ ! 
*तुम्हे तो मालूम है * ** *कि मैं इजहारे इश्क * ** *वक्त की परिधियों में * ** *न तो परिबद्ध करता हूँ * ** *और न ही प्रदर्शित, * ** *समय की मर्यादा* ** *कभी रुकावट न बने * ** *इसलिए मैंने तुम्हारे लिए...

posted by अरुण चन्द्र रॉय at सरोकार
* * *सेंकते हुए **रोटी * *अक्सर जल जाती है* *तुम्हारी उंगलियाँ* *तुम उफ़ भी नहीं कहती * * * *कड़ाही का गरम तेल* *अक्सर छिटक कर * *पड़ जाता है * *तुम्हारी बाहों पर * *फफोले उग आते हैं* *तुम चुप ही रहती हो* * * ...

posted by मनोज पटेल at पढ़ते-पढ़ते
*आज निज़ार कब्बानी... * * * * * * * *निज़ार कब्बानी की कविताएँ * (अनुवाद : मनोज पटेल) काफी पियो अपनी और ज़रा शांति से सुनो मेरी बात. शायद फिर कभी साथ-साथ काफी न पिएँ हम, शायद फिर कभी मौक़ा न मिले तुमस...  

posted by जयदीप शेखर at कभी कभार
* * मेरठ नगरसे कुछ दूर एक शहर है- गढ़ मुक्तेश्वर। वहाँ कुछ बदमाशों ने एक लड़की को तेजाब सेबुरी तरह जला दिया था। यह 1987 के अगस्त की बात है। लड़की ग्यारहवींकी छात्रा थी। बदमाशों ने ...

posted by noreply@blogger.com (Vivek Rastogi) at कल्पनाओं का वृक्ष
श्रीमतीजी की नई चप्पल लेनी थी सो बाटा की बड़ी दुकान घर के पास है वहीं जाना हुआ, अब एक बार बड़ी दुकान में घुस जायें तो सारी चीजें न देखें मजा नहीं आता, और खासकर इससे थोड़ी सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है, ...

posted by Udan Tashtari at उड़न तश्तरी ....
इधर कुछ दिनों से खाली समय में किताबों में डूबा हूँ. न लिख पाने के लिए एक बेहतरीन आड़ कि अभी पढ़ने में व्यस्त हूँ. हाथ में आई पैड है और उस पर खुली है “शान्ताराम”. नाम से तो शुद्ध हिन्दी तो क्या, मराठी की ...

posted by Anupama Tripathi at anupama's sukrity.
हरी-हरी पतियाँ पीस-पीस, असुंअन जल सींच सींच , महीन महीन मेहंदी कर लाये .. हथेली सजाये .. हरी-हरी जब सुर्ख लाल रच जाये .. ताक ताक फूली न समाए .. रूस-रूस रंग देखे ... हियरा अकुलाये शरमाये.... कजरारे नैना र...

posted by सुमित प्रताप सिंह at सुमित प्रताप सिंह
* * अरुण, जो कि मध्यम वर्गीय परिवार से था,दिखने में जितना साधारण उतना ही दिमागी रूप से तेज था. कॉलेज में अक्सर वह अपने रूप-रंग व कद-काठी के कारण उपहास का पात्र बनता था. वेलेन्टाइन दिवस आने वाला था और...

posted by महफूज़ अली (Mahfooz Ali) at लेखनी... 
*फेसबुक पर डॉ. मृणालिनी *ने अपने स्टेटस पर जब यह डाला " *ATTENTION ALL MY LADY FRIENDS....THERE ARE SOME CREEPS ON FACEBOOK LIKE HOW WE HAVE IN SOCIETY WHO ARE TRACKING MIDDLE AGED RICH WOMAN BEFRIENDING ...

जानते हो..!! उसकी प्रतिभा  दीवार से टेक लगा ऊँघती रहती है, कभी   लुढ़क वो सो भी जाती है, लेकिन उसकी तक़दीर  किसी की मोहताज़ नहीं, एक दिन  अँधेरे से निकल खुशनसीबी आएगी, तब उसे दलित, पीड़ित, उपेक...

posted by नवीन प्रकाश at Hindi Tech - तकनीक हिंदी में 
कितनी ही बार हम कंप्यूटर की खराबियों से अपना कीमती वक्त और डाटा गवां देते है पर कंप्यूटर की खराबियों को ठीक करने बस फॉर्मेट करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता । एक छोटा मुफ्त पोर्टेबल टूल जो आपके कंप्यूटर ...

posted by Padm Singh पद्म सिंह at पद्मावलि 
अब जाग उठो अब कमर कसो जीवन की राह बुलाती है ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है भारत माता के वीर सपूतो धारा की पहचान करो नावों के बंधन को खोलो पतवार उठा प्रस्थान करो फिर नए लक्ष्य की चाह विजय की राह...

posted by Archana at मेरे मन की 
शादी के समारोह में 17 जनवरी को हुआ संगीत......जिसमें ऐसा कोई न बचा जो झूमा न हो . और अब आपकी बारी है ......शुरू किजिये गीत ......और झूमिए साथ-साथ....... 1- 2- 3- 4- 5- रिश्तो...

posted by केवल राम : at चलते -चलते...! 
सृजन मानव का स्वभाव है . यही उसकी चेतना का प्रतिबिम्ब भी है . मानव मन - मस्तिष्क में चलने वाली हलचल, भावनाओं और विचारों का अनवरत प्रवाह सृजन के माध्यम से बाहर की दुनिया में प्रवेश करता है . जब तक सब कुछ ...

posted by गिरिजेश राव, Girijesh Rao at एक आलसी का चिठ्ठा 
अंग्रेजी कविताओं और गीतों में गोते लगाने और रचने का भी मुझे शौक रहा है। पाश्चात्य ध्वनियों में प्रवीणता न होने के कारण उन्हें प्रस्तुत करने से बचता रहा हूँ। कभी इनके लिये एक अंग्रेजी ब्लॉग भी बनाया था लेकि...
posted by देव कुमार झा at मेरी दुनिया मेरा जहाँ.... 
मित्रों सबसे पहले आप सभी का आभार जो आप सभी नें जन्मदिन की शुभकामनाएं ब्लाग और फ़ेसबुक के माध्यम पर दी.... पहली बार विशिष्ट होनें सा आभास हुआ :-)अम्मा और पापा मुम्बई में खास हमारे जन्मदिन के कारण ही आए थे, ...

posted by Mukesh Kumar Sinha at जिंदगी की राहें
सबसे पहले तो HAPPY ST. VALENTINE'S DAY!! इस प्यार महोत्सव पर मैंने कुछ शब्दों जो जोड़ा है... उम्मीद करता हूँ पसंद करेंगे...:) और हाँ! मेरे FOLLOWERS की संख्या पिछले दिनों 200 को पार कर कर गयी, अच्छा लगता...

posted by अनुपमा पाठक at अनुशील 
हैं कुछ बातें... जो हम कह नहीं पाए! और जो कहा सब व्यर्थ रहा... हैं कुछ कार्य जो हम कर नहीं पाए! और जो किया जैसा किया मानों हर पल हो व्यर्थ जिया... हैं कुछ कदम... जो हम चल नहीं पाए! और जितना चले सब बस यूँ ह...
 
posted by उदय - uday at कडुवा सच ...
हमें उनकी भी आरजू थी, उसकी भी आरजू थी न जाने किस घड़ी, दिल ने रस्ता बदल लिया !! ... ये किसने कह दिया, जेहन में नहीं 'खुदा' बेफिजूल की बातें हैं, मस्जिद औ मैकदे !
posted by devendra ojha at नुक्कड़

प्रेम एक भावना है समर्पण है, त्याग है प्रेम एक संयोग है तो वियोग भी है किसने जाना प्रेम का मर्म दूषित कर दिया लोगों ने प्रेम की पवित्र भावना को कभी उसे वासना से जोड़ा तो कभी सिर्फ उसे पाने से भूल गये वे कि प...
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिंद !!

21 टिप्पणियाँ:

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

खूबसूरत लड़की और हेंडसम लड़कों से अक्सर प्यार हो जाता है.... ?
शिवम् भाई आप ये नहीं सुने ,"दिल लगे..................से तो परी किस काम की.... | प्यार न होता तो जंहा इतनी खुबसूरत नहीं होती.... |
बहुत अच्छे - अच्छे लिंक्स की उम्दा प्रस्तुती.... :)

vidya ने कहा…

प्यार का रसायनिक आधार पढ़ कर मज़ा आया..

रोचक प्रस्तुति...
मनोहारी लिंक्स..
शुक्रिया.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्यार की व्याख्या नहीं होती - हो ही नहीं सकती
प्यार के शब्द नहीं होते - सब कम लगते हैं
प्यार सरेआम का एहसास नहीं
प्यार न तर्क
प्यार न टाइम पास
प्यार न एक दिन का दायरा
.... हाँ बर्थडे की तरह एक पूरा दिन इसके नाम
................
प्यार - सबकुछ खोकर भी बहुत कुछ पाना

देव कुमार झा ने कहा…

प्रेम का तो स्थान सर्वोत्तम है ही... सच्चा जीवन साथी मिल जाए तो फ़िर जीवन कितना सुगम हो जाता है.....

सुप्पर बुलेटिन शिवम भईया....

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

:))... ye to valentine gift ho gaya shivam bhai:))
hamre post ko yahan jagah de di aapne..!!

thanksssss!

मनोज कुमार ने कहा…

इस परिभाषा का जवाब एक गाना है
वो पास रहें या दूर रहें नज़रो में समाए रहते हैं
बस प्यार इसी को कहते हैं

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

ये सब वैज्ञानिकों के चोचले हैं... ज़बरदस्ती हर बात को सिद्धांतों, परिभाषाओं, अवधारणाओं आदि के जाल में जकड देते हैं..लोग ये क्यों नहीं सोचते कि
सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो,
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो!
प्रेम में डूबे लिंक्स!!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन... अच्छे लिंक्स..
सादर आभार

Pallavi ने कहा…

बढ़िया लिंक्स ...

सदा ने कहा…

बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति ।

Anupama Tripathi ने कहा…

अरे वाह ..!!बुलेटिन में मेरी रचना को स्थान मिला ....आभार शिवम जी ...!!
बहुत बढ़िया लिंक्स संयोजन ....

shikha varshney ने कहा…

प्यार की कोई परिभाषा नहीं हो सकती. न ही कोई सिद्धांत वह बस प्यार है.
बढ़िया बुलेटिन

dheerendra ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति ,....

MY NEW POST ...कामयाबी...

कविता रावत ने कहा…

bahut sundar pyar ke marm ko samjhati bulletin prastuti...

Anju ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति....रसायनिक प्रक्रिया ...पढ़ कर पता चला ...ये सब नजरों का धोखा है ....अक्सर कहते भी हैं .....सच में ऐसा ही है ...जानना अच्छा लगा ..../ फिर भी प्यार ,प्रेम .....तो है ही न ...हम हैं तो ये है ....ये है तो हम है ..../ बाकि रश्मि जी ने कह ही दिया .....
प्यार - सबकुछ खोकर भी बहुत कुछ पाना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चीनी महाश. को प्यार होने दीजिये, सिद्धान्त सुधर जायेंगे।

अजय कुमार झा ने कहा…

वाह प्यार का केमिकल लोचा ..कमाल है जी कमाल है । बेहतरीन लिंक्स । प्रस्तावना हमेशा की तरह सामयिक और सार्थक ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

Maheshwari kaneri ने कहा…

प्यार तो प्यार है और कुछ नहीं..बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति ।

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही बढ़िया लिंक्स
बेहतरीन प्रस्तुति...

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